बिलकीस बानो मामले के मुजरिमों की रिहाई :
हिन्दोस्तानी राज्य पूरी तरह से सांप्रदायिक है – आइए हम सब मिलकर इंसाफ हासिल करने के अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं!


15 अगस्त को आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर, 2002 के गुजरात जनसंहार के दौरान सामूहिक बलात्कार और हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार अपराधियों में से 11 लोगों को रिहा कर दिया गया। 2008 में उन सभी को एक गर्भवती महिला बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या के जघन्य अपराध के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। उन्होंने उसके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी बलात्कार किया था और उसके तीन साल के बच्चे का सिर पत्थर पर पटककर उसकी हत्या कर दी थी।

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ऑपरेशन ब्लूस्टार की 38वीं बरसी पर:
स्वर्ण मंदिर पर सैनिक हमले से सबक


हुक्मरान वर्ग को बहुत डर है कि हिन्दोस्तान के लोग अपने धार्मिक और अन्य भेदभावों को एक तरफ करके, अपने सांझे दुश्मन के खि़लाफ़, अपने सांझे लक्ष्य के लिए, एकजुट हो जाएंगे। इसे रोकने के लिए हुक्मरान वर्ग ने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद को फैलाने के तौर-तरीक़ों में कुशलता हासिल कर ली है। अलग-अलग समय पर राज्य अलग-अलग समुदायों को निशाना बनाता है। पहले तो निशाना बनाए गए समुदाय के खि़लाफ़ राज्य बहुत ही जहरीला प्रचार फैलाता है और उसके बाद, बड़े सुनियोजित तरीक़े से उस समुदाय पर हमले करवाता है। उसके बाद राज्य यह झूठा प्रचार फैलाता है कि अलग-अलग धर्मों के लोग एक दूसरे का क़त्ल कर रहे हैं।

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बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 26 वर्ष बाद :

बड़े सरमायदार और उनका राज्य लोगों की एकता और भाईचारे को बर्बाद कर रहे हैं

26 वर्ष पहले, 6 दिसम्बर, 1992 को दिन-दहाड़े टीवी कैमरों के सामने बाबरी मस्जिद को गिराया गया था और उस नज़ारे को टीवी के ज़रिये पूरी दुनिया में प्रसारित किया गया था। भाजपा के सर्वोच्च नेताओं के उकसावे पर, एक हथियारबंद भीड़ ने उस घिनौनी कार्यवाही को अंजाम दिया था। केंद्र में नरसिंह राव की कांग्रेस पार्टी नीत सरकार और राज्य में भाजपा नीत सरकार की आंखों के सामने, पांच सदी से अधिक पुराने उस ऐतिहासिक स्मारक को गिराया गया था। केंद्र और राज्य के सुरक्षा बलों ने उस घिनौनी कार्यवाही को अंजाम देने वाली हथियारबंद भीड़ को सुरक्षा प्रदान की। वह राजकीय आतंक का कांड था।

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