आज़ादी दिवस 2021 के अवसर पर :
हिन्दोस्तान को नयी बुनियादों पर खड़ा करने की ज़रूरत है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 15 अगस्त, 2021
हमारे इस राजनीतिक तौर पर आज़ाद राज्य में, 74 वर्षों के आर्थिक विकास के बाद, आज करोड़ों-करोड़ों स्त्री-पुरुष दो वक्त की रोटी के लिए, रोज़गार की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। तड़के से देर रात तक कमर-तोड़ मेहनत करने के बाद, अधिकतम लोग उतना पैसा नहीं कमा पाते हैं जितना इंसान लायक ज़िन्दगी जीने के लिए ज़रूरी है।

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हमारे पाठकों से : लॉक डाउन के अनुभव की कहानी मज़दूरों की जुबानी

संपादक महोदय,

देश के अन्य महानगरों की तरह गुजरात स्थित अहमदाबाद में भी लाखों की तादाद में प्रवासी मज़दूर आते हैं। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश और बिहार से आये काम करने वाले मज़दूरों की आप-बीती है। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते 22 मार्च से तालाबंदी हुई और सारे उद्योग-धंधे बंद कर दिए गए। इन्हीं बंद कंपनियों की श्रेणी में बावला स्थित एक स्टील कंपनी शामिल है जिसमें तकरीबन 750 मज़दूर कार्यरत हैं।

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