एयर इंडिया का निजीकरण :
इजारेदार पूंजीपतियों के अधिकतम मुनाफे़ कमाने की लालच को पूरा करने के लिए मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी क़दम

एयर इंडिया और इसकी सहायक इकाई ए.आई. एक्सप्रेस, जिसके पास 94 विमान हैं और जो 100 से अधिक घरेलू उड़ानों और 60 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को संचालन करती है, इन्हें टाटा समूह को बेच दिया गया है।

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मुद्रीकरण – निजी पूंजीवादी लाभ के लिए सार्वजनिक संपत्ति की लूट

23 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक संपत्ति का “मुद्रीकरण” करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि सरकार को इस योजना से चार साल में 6 लाख करोड़ रुपये एकत्र होने की उम्मीद है।

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बिजली संशोधन विधेयक 2021 : 
बिजली क्षेत्र के मज़दूर निजीकरण के विरोध में संघर्ष की राह पर

हाल ही में मज़दूर एकता लहर के संवाददाता ने संसद पर धरना दे रहे बिजली क्षेत्र की यूनियनों व फेडरेशनों के नेताओं से उनके मुद्दों और मांगों के बारे में बात की। हम यहां दो साक्षात्कारों के मुख्य बिन्दू पेश करे हैं – अभिमन्यु धनखड़, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स के राष्ट्रीय महासचिव हैं और इंजीनियर शैलेंद्र दूबे, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष हैं।

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भारत संचार निगम लिमिटेड के निजीकरण का विरोध करें!

कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल.) के निजीकरण का विरोध करने के लिए 20 जून, 2021 को एक जनसभा आयोजित की। इसमें स्टील, रेलवे, बंदरगाह और डॉक, बिजली, पेट्रोलियम, बी.एस.एन.एल. और जन संगठनों के कार्यकर्ताओं के 200 से अधिक नेताओं और प्रतिभागियों ने भाग लिया। सितंबर 2020 में शुरू हुई “निजीकरण के खि़लाफ़ एकजुट हों” श्रृंखला की यह 13वीं बैठक थी। पिछली बैठकें विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी प्रतिष्ठानों के निजीकरण से संबंधित थीं।

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सार्वजनिक क्षेत्र की आयुध निर्माण कंपनियों के निगमीकरण के खि़लाफ़ मज़दूरों के न्यायोचित संघर्ष का समर्थन करें!

16 जून, 2021 को केंद्र सरकार ने आयुध निर्माण बोर्ड (ओ.एफ.बी.) को भंग करने और इसे 7 निगमों में बदलने के निर्णय की घोषणा की। ओ.एफ.बी. आयुध कारखानों और संबंधित संस्थानों का एक छत्र निकाय है। यह वर्तमान में रक्षा मंत्रालय का एक अधीनस्थ संस्थान है और यह 41 कारखानों, नौ प्रशिक्षण संस्थानों, तीन क्षेत्रीय विपणन केंद्रों और सुरक्षा के पांच क्षेत्रीय नियंत्रकों का एक समूह है।

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Defence Employees Against Corporatisation

देशभर में मज़दूर अपने अधिकारों पर हमलों का विरोध कर रहे हैं

इस समय सरकार कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन के बहाने देश के श्रम कानूनों में पूंजीवादी संशोधन करके और मज़दूर वर्ग के अधिकारों को कुचलकर एक जबरदस्त बदलाव लागू करने की कोशिश कर रही है। इन हमलों के खि़लाफ़ अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने धरना प्रदर्शन और अन्य विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं।

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BSNL

बी.एस.एन.एल. के एक्जीक्यूटिव्स एसोसियेशन के महासचिव कामरेड सेबास्टिन के साथ साक्षात्कार

बी.एस.एन.एल. के निजीकरण की सरकार की योजना का विरोध करें

सार्वजनिक क्षेत्र की टेलीकाम सेवा प्रदाता कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल.) के निजीकरण को उचित ठहराने के लिये सरकार काफी प्रचार करती आयी है। इस सरकारी कंपनी की विशाल सम्पत्ति को सरकार बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हाथों में कौड़ियों के दाम पर बेच देना चाहती है। बी.एस.एन.एल. के कर्मचारी इस क़दम के विरोध में संघर्ष कर रहे हैं।

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Rail workers

मुम्बई में रेल मज़दूरों ने निजीकरण तथा नयी पेन्शन योजना का विरोध किया

18 अक्तूबर, 2019 को मुम्बई में सैकड़ों रेल मज़दूरों ने निजीकरण की तरफ बढ़ाये जा रहे रेल मंत्रालय के क़दमों का तथा मज़दूर-विरोधी नयी पेन्शन योजना (एन.पी.एस.) का विरोध किया।
यह विरोध प्रदर्शन आल इंडिया ट्रैकमेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू), इंडियन रेलवेज़ सिग्नल एंड टेलिकॉम मेन्टेनर्स यूनियन (आई.आर.एस.टी.एम.यू), वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज़ मूवमेंट फार ओल्ड पेन्शन स्कीम (डब्ल्यू.आर.ई.एम.ओ.एस.) तथा रेल मज़दूर यूनियन (आर.एम.यू.) ने आयोजित किया था।

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बी.एस.एन.एल. को बंद करने तथा उसका निजीकरण करने के क़दम

भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल.) प्रबंधन ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से कम करके 58 वर्ष करने की योजना बनाई है। उन्होंने 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी मज़दूरों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वी.आर.एस.) देने की पेशकश की है। इन दोनों क़दमों से 54,000 से अधिक मज़दूरों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। यह बी.एस.एन.एल. के कुल कर्मचारियों

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