240_Campening on Mudka in Okhla 22 may-6


फैक्ट्री अग्नि कांड में मज़दूरों की मौत के विरोध में प्रदर्शन

मज़दूर एकता कमेटी ने 22 मई, 2022 को मुंडका फैक्ट्री अग्निकांड में मज़दूरों की मौत के विरोध में, दक्षिण दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एक ज़ोरदार प्रदर्शन आयोजित किया। इसमें अनेक युवा और महिला मज़दूरों ने दिलेरी के साथ भाग लिया।

आगे पढ़ें


बी.ई.एम.एल. का निजीकरण मज़दूर-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी है

1964 में अपनी स्थापना के बाद से बी.ई.एम.एल. हमेशा एक लाभ कमाने वाला सार्वजनिक उपक्रम रहा है। इसकी संपत्ति का मूल्य 65,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। अकेले बेंगलुरू और मैसूर में बी.ई.एम.एल. के पास जो ज़मीन है उसकी क़ीमत ही 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

आगे पढ़ें
240_pawanhans


पवन हंस के निजीकरण का विरोध करें!

29 अप्रैल, 2022 को मंत्रीमंडल के आर्थिक मामलों की समिति ने पवन हंस लिमिटेड (पी.एच.एल.) में सरकार की 51 प्रतिषत हिस्सेदारी को खरीदने के लिए स्टार-9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लगाई गई 211 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी। पी.एच.एल. राज्य की मालिकी वाली हेलीकॉप्टर सेवा है। स्टार-9 मोबिलिटी तीन कंपनियों – महाराजा एविएशन, बिग चार्टर और अल्मास ग्लोबल अपॉर्चुनिटी फंड का एक संघ है।

आगे पढ़ें

हमारे पाठकों से
1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह

संपादक महोदय,

1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह के अवसर पर जो लेख मई के अंक में प्रकाशित किया गया है, मैं उसके बारे में लिख रहा हूं। आज के वर्तमान दौर की हालतों को देखते हुए यह पूरी तरह से सच है कि अब भी वही अंग्रजों द्वारा बनाई गई नीतियों के तहत लोगों में जाति और धर्म के नाम पर फूट डालो, बांटो और राज करो के हथकंडों को ही अपनाया जा रहा है। इनके खि़लाफ़ आज भी संघर्ष चल रहा है।

आगे पढ़ें

हमारे पाठकों से :
लेखों को सुनिए

हमारी कोशिश यही रहती है कि यह पेपर ज्यादा से ज्यादा फैले। मेहनतकश व किसानों को जितना ज्यादा हम समझा पाऐंगे उतना ही अच्छा है। इसी दिशा में जो एक कदम उठाया गया है वह  मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हमारी वेबसाईट पर “लेखों को सुनिए” नामक नया सेक्शन बना है जहां कुछ महत्त्वपुर्ण लेख तथा बयान हमें ऑडियो के माध्यम से उपलब्ध हुए हैं।

आगे पढ़ें

नाज़ी जर्मनी की पराजय की 77वीं वर्षगाँठ के अवसर पर :
दूसरे विश्व युद्ध से सबक

स्थायी शांति क़ायम करने के लिए साम्राज्यवादी जंग के स्रोत, साम्राज्यवादी व्यवस्था, को उखाड़ फेंकना होगा और उसकी जगह पर समाजवाद की स्थापना करनी होगी
77 वर्ष पहले, 9 मई, 1945 को नाज़ी जर्मनी ने जर्मनी की राजधानी, बर्लिन में सोवियत संघ की लाल सेना के प्रतिनिधियों के सामने, आत्म-समर्पण किया था। इसके साथ, यूरोप में दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ।

आगे पढ़ें


हिन्दोस्तान की आज़ादी का महान युद्ध – 1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह के अवसर पर

हमें बांटने वालों और हमारी ज़मीन व श्रम का शोषण और लूट करने वालों के खि़लाफ़ संघर्ष आज भी जारी है

आज से 165 वर्ष पहले, 10 मई को मेरठ में तैनात किये गये ईस्ट इंडिया कंपनी के सिपाहियों ने दिल्ली पर कब्ज़ा करने के लिए कूच किया था। वह महान ग़दर की शुरुआत थी। वह हिन्दोस्तान की आज़ादी का जंग था, हिन्दोस्तानी उपमहाद्वीप के व्यापक क्षेत्र पर कब्ज़ा किये हुए, उस अंग्रेज़ व्यापारी कंपनी के अन्यायपूर्ण, दमनकारी और खुदगर्ज़ शासन से आज़ादी के लिए जंग था।

आगे पढ़ें


बिजली-आपूर्ति का संकट और उसका असली कारण

हिन्दोस्तान में बिजली को लेकर वर्ग संघर्ष पर लेखों की श्रृंखला में यह दूसरा लेख है
देश के बहुत से स्थानों में बिजली की कमी की गंभीर समस्या है क्योंकि थर्मल पॉवर प्लांटों (ताप बिजलीघरों) के पास आवश्यक बिजली-उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयला नहीं है। इजारेदार-नियंत्रित मीडिया इस बात को लेकर भ्रम पैदा कर रही है कि बिजली की कमी के लिए कौन और क्या ज़िम्मेदार है।

आगे पढ़ें

बिजली क्षेत्र के मज़दूरों का संघर्ष बिल्कुल जायज़ है! बिजली का निजीकरण जन-विरोधी है!

बिजली मानव जीवन की मूलभूत ज़रूरतों में से एक है। इसलिए, इस मूलभूत आवश्यकता के उत्पादन और वितरण का उद्देश्य निजी मुनाफ़ा कमाना नहीं हो सकता

हिन्दोस्तान में बिजली को लेकर वर्ग संघर्ष पर लेखों की श्रृंखला में यह पहला लेख है

आगे पढ़ें


अंबुर, तमिलनाडु के मज़दूरों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई

तमिलनाडु ट्रेड यूनियन सेंटर ने 7 मई, 2022 को अंबुर में एक प्रदर्शन किया। अंबुर और उसके आसपास की कंपनियों में चमड़ा, जूता और संबंधित वस्तुओं को बनाने का काम करने वाले सैकड़ों मज़दूरों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। इस मौके पर यूनियन ने मई दिवस भी मनाया। कॉमरेड दक्षिणमूर्ति ने जनसभा की अध्यक्षता और संचालन किया।

आगे पढ़ें