घरों से बेदख़ल किये जाने के खि़लाफ़ हल्द्वानी के लोगों का विशाल विरोध प्रदर्शन

अपने घरों से बेदख़ली के खि़लाफ़ हल्द्वानी के लोगों का संघर्ष, देशभर के लाखों मेहनतकशों के उसी संघर्ष का हिस्सा है, जिसने सिर पर विध्वंस की तलवार लटक रही है। विभिन्न शहरों में मेट्रो लाइनों के पास रहने वाले, रेलवे स्टेशनों के पास रहने वाले और रेलवे लाइनों के पास रहने वाले लोगों को विध्वंस का सामना करना पड़ता है। पूंजीपतियों को रेलवे स्टेशनों और अन्य संपत्तियों को बेचने के हिन्दोस्तानी राज्य के अभियान का लोगों को डटकर विरोध करने की ज़रूरत है।

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पेट्रोलियम और गैस मज़दूरों ने संघर्ष तेज़ किया

पेट्रोलियम और गैस मज़दूरों ने निजीकरण के समाज-विरोधी, देश-विरोधी और मज़दूर-विरोधी कार्यक्रम के ख़िलाफ़ और मज़दूर बतौर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए, संघर्ष को तेज़ करने का फ़ैसला किया है। निकट भविष्य में वे ऊर्जा क्षेत्र के मज़दूरों की सर्व हिन्द संयुक्त हड़ताल का आयोजन करने के लिए बिजली व कोयला क्षेत्र के मज़दूरों से समन्वय करेंगे। यह निर्णय दिसंबर 2022 में असम के दुलियाजान में आयोजित पांचवें त्रैवार्षिक सम्मेलन में पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (पी.जी.डब्ल्यू.एफ.आई.) द्वारा लिया गया था।

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ब्रिटेन के मज़दूरों ने अपना संघर्ष तेज़ किया

ब्रिटेन में सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा सहित कई प्रमुख उद्योगों और सेवाओं में श्रमिकों के संघर्षं बढ़ते जा रहे हैं।

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मज़दूर एकता कमेटी द्वारा आयोजित मीटिंग :
काम की जगह पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की हालतों पर संहिता : मज़दूरों के अधिकारों का क्रूर हनन

काम की जगह पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की हालतों पर संहिता (ओ.एस.एच.) उन चार श्रम संहिताओं में से एक है, जिसे हिन्दोस्तानी राज्य ने सितंबर 2020 में लागू किया था। इस संहिता ने इन्हीं मुद्दों से संबंधित, मौजूदा श्रम क़ानूनों को बदल दिया। हमारे देश के मज़दूरों के कई दशकों के संघर्ष और बलिदान के बाद राज्य ऐसे क़ानूनों को पारित करने के लिए मजबूर हुआ, जो क़ानून मज़दूरों के कुछ हिस्सों को कुछ हद तक सामाजिक सुरक्षा देने का वादा करते हैं। मज़दूरों का कहना है कि ओ.एस.एच. संहिता इन सभी उपलब्धियों पर हमला है।

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हमारे पाठकों से
बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 30वी बरसी पर ज्ञानवर्धक लेख

संपादक महोदय, मज़दूर एकता लहर

मैं आपका आभारी हूं कि आपने पिछले अंक में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 30वीं बरसी पर एक बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख छापा। इस लेख में, जिसका शीर्षक था, ”सांप्रदायिक हिंसा के खि़लाफ़ और ज़मीर के अधिकार की हिफ़ाज़त के लिये अपनी राजनीतिक एकता को और मजबूत करें“, एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदू है जिस पर मैं प्रकाश डालना चाहता हूं।

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सोवियत संघ के गठन की शताब्दी पर :
एक बहुराष्ट्रीय श्रमजीवी लोकतांत्रिक राज्य जिसने सभी लोगों के राष्ट्रीय अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की

इस साल 30 दिसंबर को सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यू.एस.एस.आर.) के गठन के 100 साल पूरे हो गए। उसे रूसी, यूक्रेनी, बेलारूसी और ट्रांसकाकेशियाई सोवियत गणराज्यों द्वारा, स्वेच्छा के आधार पर एक साथ आने के परिणामस्वरूप, गठित किया गया था। वे गणराज्य राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय राज्य थे जिनके राष्ट्रों और लोगों को 1917 की महान अक्तूबर क्रांति के कारण सरमायदारों के शासन से मुक्ति मिली थी।

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2022 में देशभर में मज़दूरों और किसानों का संघर्ष :
अधिकारों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष में मज़दूरों और किसानों की बढ़ती एकता

पिछले साल 2022 में, पूरे साल निजीकरण के समाज-विरोधी और मज़दूर-विरोधी कार्यक्रम के ख़िलाफ़, अनेक क्षेत्रों के मज़दूर सड़कों पर संघर्ष में दिखाई दिए। सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न उद्यमों के मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करने वाली ट्रेड यूनियनें एक सांझे मंच पर एक साथ आ रही हैं और निजीकरण के ख़िलाफ़ संघर्ष में एक-दूसरे को समर्थन दे रही हैं।

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साल 2022 में दुनियाभर के मज़दूर वर्ग और लोगों के संघर्ष

सभी पूंजीवादी देश एक ऐसे आर्थिक संकट में घिरे हुए हैं जो लगातार गहरा होता जा रहा है। साम्राज्यवादी पूंजीपति वर्ग संकट का बोझ मज़दूर वर्ग और जनता की पीठ पर लाद रहा है। अमरीका और कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों में पिछले दो वर्षों में कोविड महामारी के नाम पर मज़दूरों की आजीविका और अधिकारों पर किए गए हमले, अब यूक्रेन में युद्ध के नाम पर 2022 में और तेज हो गए हैं।

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हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 42वीं सालगिरह के अवसर पर, केंद्रीय समिति की ओर से पार्टी के महासचिव कॉमरेड लाल सिंह का भाषण

“हम कम्युनिस्टों का काम है करोड़ों शोषितों और उत्पीड़ितों को एकजुट करना और लाखों शोषकों को हराना।”

“मज़दूरों और किसानों की हुकूमत को स्थापित करने और समाज को संकट से बाहर निकालने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द लोगों की क्रांतिकारी राजनीतिक एकता बनाते हुए, हमें कम्युनिस्ट आंदोलन की एकता को पुनः स्थापित करने की ज़रूरत है।”

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 42वीं सालगिरह पर उत्साहपूर्ण समारोह

25 दिसंबर को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना की 42वीं सालगिरह थी। इस खुशी के अवसर पर आयोजित सभाओं में पार्टी के सैकड़ों सदस्यों और समर्थकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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