पूंजीपतियों के संकट-ग्रस्त गणतंत्र की जगह पर मजदूरों और किसानों का गणतंत्र स्थापित करना होगा

62 वर्ष पहले, 26 जनवरी, 1950 को वर्तमान हिन्दोस्तानी गणतंत्र की घोषणा की गई थी। इसके साथ ही, हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों की राज्य सत्ता को मजबूत किया गया। जब हिन्दोस्तानी लोगों के बढ़ते संघर्षों की वजह से बर्तानवी उपनिवेशवादियों को छोड़कर जाना पड़ा, तब हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों ने उनसे राज्य सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। इस नये पूंजीवादी गणतंत्र की मूल विधि या संविधान और इसके सारे संस्थान स्थापित

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लोक पाल बिल पर संसदीय वाद-विवाद का नाटक

लोक पाल और लोकायुक्त बिल, 2011 को लोकसभा में चर्चा के लिये 23 दिसंबर, 2011 को पारित किया गया। इस बिल के मसौदे को एक संविधान संशोधन बिल के साथ-साथ पारित किया गया। इनका मकसद था एक संविधानीय दर्जे वाला भ्रष्टाचार विरोधी जांचकारी आयुक्त बनाना, जिसकी जिम्मेदारी होगी कार्यकारिणी, यानि सभी सरकारी कर्मचारियों तथा प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्रियों के खिलाफ़ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करना (बेशक इसमे

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मणिपुर विधान सभा चुनाव :

मुद्दा है सशस्त्र बल (विशेष-अधिकार) अधिनियम और सैनिक शासन को स्थायी रूप से खत्म करना!

28 जनवरी को केन्द्रीय सशस्त्र बलों के फासीवादी राज की हालतों में, मणिपुर के लोगों को एक बार फिर विधान सभा के सदस्यों को चुनने के लिये कहा जा रहा है।

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साम्राज्यवाद, फासीवाद और जंग के खिलाफ़, दुनियाभर की मेहनतकश जनता की बढ़ती विरोधता का एक साल

हाल के वर्षों में, विश्व स्थिति की सबसे स्पष्ट विशेषता यह रही है कि पूंजीवादी देशों में शोषित जनसमुदाय और इजारेदार पूंजीपतियों की अगुवाई में शोषकों के बीच अन्तर्विरोध तेज़ हो रहे हैं।

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आर्थिक सुधार कार्यक्रम पर मजदूर-मेहनतकशों के विचार

मजदूर वर्ग और मेहनतकशों की हिमायत करने वाले अखबार और संगठन बतौर, हम मेहनतकशों के नेताओं से यह सवाल कर रहे हैं कि 20 वर्ष पहले शुरू किये गये सुधारों के परिणामों के बारे में हिन्दोस्तान के मेहनतकशों का क्या विचार है। क्या उन सुधारों से मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनसमुदाय को फायदा हुआ है या नुकसान?

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ऑल इंडिया रेलवे इम्प्लॉईज़ कन्फेडरेशन (ए.आई.आर.इ.सी.) के मुंबई विभाग के अध्यक्ष और वेस्टर्न रेलवे मोटरमेन्स एसोसियेशन के प्रतिनिधि, कॉमरेड बी.एस. रथ से साक्षात्कार

म.ए.ल. : 1991 में तब के वित्तमंत्री श्री मनमोहन सिंह द्वारा शुरू की गयी निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीति से पिछले बीस वर्षों में हिन्दोस्तानी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है?

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मजदूर वर्ग की मुक्ति के लिये खुद को समर्पित करें!

संपादक महोदय,

पिछले अंक में नव वर्ष के अवसर पर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा दिया गया शुभकामना संदेश प्रकाशित हुआ, जिसे मैंने ध्यानपूर्वक पढ़ा। इस पत्र में शामिल बातों का पूरा समर्थन करता हूं।

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मजदूर वर्ग के हाथ में राज्य सत्ता – वक्त की मांग!

संपादक महोदय,

कामरेड लाल सिंह की नये साल की शुभकामनाओं को हमने पढ़ा। यह हमें प्ररेणा देता है श्रमजीवी क्रांति के लिये। पूरी दुनिया में पूंजीवाद घोर संकट में फंसा हुआ है और इससे निकलने के लिये वह संकट का बोझ श्रमजीवी वर्ग पर डाल रहा है और साम्राज्यवादी जंग फैला रहा है। यह साम्राज्यवाद पूरी तरह से फासीवादी तरीका अपना रहा है और अपने साम्राज्य को फैलाने में व्यस्त है।

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पूंजीपतियों के भ्रम पर विश्वास न करें!

प्रिय संपादक महोदय,

पाक्षिक पत्रिका मजदूर एकता लहर के ग्रथ 26 अंक 1 (जनवरी 1-15, 2012) में प्रकाशित पार्टी महासचिव की कामरेडों को नव वर्ष की बधाई एवं शुभ कामनाएं मुझे काफी अच्छी लगी।

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