परमाणु संयंत्र के लिये उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण का विरोध

किसान संघर्ष समिति की अगुवाई में 19 मार्च, 2011 को हरियाणा के फतेहाबाद शहर में, गोरखपुर परमाणु संयंत्र के खिलाफ़ एक रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर शहर के बीचों-बीच से प्रदर्शन और रैली निकाली, इस रैली में, 20 से 25 ग्राम पंचायतों के सैकड़ों किसानों, नौजवानों, महिलाओं ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया।

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वर्तमान व्यवस्था का विकल्प मुमकिन है!

यह बयान पार्टी की सैध्दान्तिकस्पष्टता को दिखाता है। हिन्दोस्तान के राजनीतिक जीवन की लगातार बदलती जटिलताओं से जूझती हुई, पार्टी हमेशा मार्क्सवाद – लेनिनवाद के वैज्ञानिक असूलों से मार्गदर्शित रही है। वर्ग संघर्ष और भौतिक द्वंद्ववाद के आधार पर विश्लेषण करके पार्टी ने आसान तरीके से वह बात समझाई है जो इतने सारे अखबारों और इतने घंटों के टीवी कार्यक्रमों से स्पष्ट नहीं हो सका है।

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देश के मजदूरों की विशाल रैली

23 फरवरी, 2011 को देश के सभी राज्यों और अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों से मजदूरों ने एकजुट होकर, देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन किया। संसद पर यह प्रदर्शन सरकार, संसद और पूरे देश की जनता को यह बताने के लिये किया गया, कि देश के मजदूरों ने, चाहे किसी भी पार्टी या ट्रेड यूनियन के हों, एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करने का फैसला किया है। मजदूरों ने अपने प्रदर्शन के जरिये यह

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महिलाओं के संपूर्ण उध्दार के लिये संघर्ष जिंदाबाद!

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, 8 मार्च, 2011 के अवसर पर मजदूर एकता लहर हमारे देश की लाखों-लाखों संघर्षरत महिलाओं को सलाम करती है। हम उन मेहनतकश महिलाओं को सलाम करते हैं, जो मजदूर वर्ग की रोजी-रोटी और अधिकारों पर हमलों के खिलाफ़ संघर्ष में आगे हैं। हम छात्रों और मजदूरों के अधिकारों के लिये संघर्ष कर रही विश्वविद्यालयों व स्कूलों की छात्राओं को सलाम करते हैं। हम टयूनीशिया, मिस्र, लिबिया, यमन, एल्जी

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विदेश में बसे हिन्दोस्तानियों के राजनीतिक उत्पीड़न की निंदा करें! हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 16 फरवरी, 2011

विदेश में बसे हिन्दोस्तानियों के राजनीतिक उत्पीड़न और अपनी मातृभूमि को वापस जाने के उनके अधिकार पर हमला करने के लिए हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मनमोहन सिंह सरकार की निंदा करती है।

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उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में विस्तृत जन आन्दोलन

पूरी अरब दुनिया में, उत्तरी अफ्रीका में मोर्रोको से लेकर, एल्जीरिया, लिबिया, सूडान, यमन और बहरीन तक, लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकलकर अपनी जन-विरोधी सरकारों के खिलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं। टयूनिशिया और मिस्र में जन बगावत, जिसकी वजह से बेन अली और हुस्नी मुबारक की अलोकप्रिय सरकारें गिरायी गयीं, उससे प्रोत्साहित होकर इन देशों में लोग संघर्ष कर रहे हैं। इस जन आन्दोलन को कुचलने के लिये बरबर दमन का

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ग़दर इंटरनेशनल से ली गयी रिपोर्ट : ब्रिटेन में फासीवादी विरोधी लहर

5 फरवरी, 2011 को नस्लवादी और फासीवादी संगठन इ.डी.एल. ने मुसलमान धर्म के लोगों को निशाना बनाते हुए लूटन में एक भड़काऊ कार्यक्रम आयोजित किया। लूटन में मुसलमान समुदाय के काफी लोग रहते हैं। यूनाइट अगेंस्ट फासिज्म (यू.ए.एफ.) ने इस भड़काऊ कार्यक्रम का विरोध करते हुए इसके खिलाफ़ प्रदर्शन आयोजित किया।

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मुम्बई में कम्युनिस्ट पाठशाला

हमारी पार्टी के केन्द्रीय समिति के आह्वान पर महाराष्ट्र इलाका समीति ने 12-13 फरवरी को एक कम्युनिस्ट पाठशाला आयोजित की। पार्टी के सदस्यों तथा मित्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बीते अक्तूबर में हुये, पार्टी के चौथे महाअधिवेशन के कुछ अहम विषयों का अध्ययन किया व उन पर चर्चा की।

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आंगनवाड़ी मज़दूरों का जोशीला प्रदर्शन

हजारों आंगनवाड़ी मज़दूरों ने दिल्ली में 24 फरवरी, 2011 को एक जोशीला प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पूरे देश से महिलायें आयी थीं। आंगनवाड़ी मज़दूरों को वेतन के नाम पर बहुत ही कम पैसे मिलते हैं। महिलाओं ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी को इतने कम पैसे में परिवार चलाकर दिखाने की चुनौती दी है। कंगाली की कगार पर रहने को मजबूर करने के लिये आंगनवाड़ी मज़दूरों ने सरकार की निंदा

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