होटल कर्मचारी अधिकारों के लिये संगठित हुये

सात प्रांतों के 46 यूनियनों के प्रतिनिधि होटल कर्मचारी, मार्च के महीने में, होटल इम्प्लॉईज फेडरेशन ऑफ इंडिया (एच.इ.एफ.ओ.आई.) के सम्मेलन में गोवा में मिले। पार्टियों में बंटे इस उद्योग के मज़दूरों को एकजुट करने के लिये एच.इ.एफ.ओ.आई. का गठन 2007 में होटल व खानपान मज़दूरों के ट्रेड यूनियन के रूप में हुआ था।

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मीजोरम के मज़दूरों ने न्यूनतम वेतन की मांग की

नेशनल ट्रेड यूनियन ऑफ मीजोरम (एन.टी.यू.एम.) ने सरकार से वेतन बोर्ड की न्यूनतम वेतन सिफारिशों को लागू करने के लिये एक संघर्ष शुरू किया है। इस संघर्ष को सरकार के अलग-अलग इलाकों और विभागों का समर्थन प्राप्त है।

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महाराष्ट्र के रेजिडेंट डाक्टर्स बेहतर परिस्थिति के लिये संघर्ष पर

महाराष्ट्र के रेजिडेंट डाक्टर्स ने 25 मार्च, 2011 के दिन महाराष्ट्र एसोसियेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) के झंडे तले एक-दिवसीय हड़ताल की। मार्ड के 3500 सदस्य हैं। रेजिडेंट डाक्टर्स के साथ-साथ इंटर्नस् ने भी कार्यवाई में हिस्सा लिया।

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फोर्ड इंडिया के मज़दूरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी

तामिलनाडु के मरियामाली नगर कारखाने में फोर्ड इंडिया इम्प्लॉईज़ यूनियन (एफ.आई.इ.यू.) हड़ताल की तैयारी कर रही है। कार बनाने के इस कारखाने से 50 मीटर दूर, प्रदर्शन करने की योजना यूनियन ने बनाई है। मज़दूरों की मुख्य मांग है कि प्रबंधन यूनियन को मान्यता दे।

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पंजाब में विरोध प्रदर्शन

पंजाब ड्राफ्टस्मैन्स यूनियन, पंचायत सेक्रेटरी यूनियन, जिला परिषद चौथी श्रेणी कर्मचारी यूनियन, ई.टी.टी. टीचर्स यूनियन, महानगर पालिका कर्मचारी यूनियन और पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया।

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मेघालय के मज़दूरों का महंगाई विरोधी प्रदर्शन

ऑल गारो हिल्स मस्टररोल वर्कर्स यूनियन तथा ऑल गारो हिल्स आंगनवाड़ी वर्कर्स एसोसियेशन ने तुरा में एक सभा में सरकार का जरूरी वस्तुओं की महंगाई की समस्या पर ध्यान आकर्षित किया है।

गारो पहाड़ियों में करीब 5000 मस्टररोल मज़दूर हैं जबकि आंगनवाड़ी मज़दूरों की संख्या करीब 1300 है, जिन्हें मात्र 1500 रु. मासिक मानदेय दिया जाता है।

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दिल्ली सरकार की जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोगों के अधिकारों पर हो रहे हमलों तथा दिल्ली में गिरते हुए जीवन स्तर के खिलाफ़ लोगों के बीच एक लंबा आंदोलन विकसित करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार की इन जन विरोधी नीतियों के खिलाफ़ एकजुट हों ताकि पूंजीवादी सरकार को इन नीतियों को वापस लेने पर मजबूर किया जा सके।

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परमाणु संयंत्र के लिये उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण का विरोध

किसान संघर्ष समिति की अगुवाई में 19 मार्च, 2011 को हरियाणा के फतेहाबाद शहर में, गोरखपुर परमाणु संयंत्र के खिलाफ़ एक रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर शहर के बीचों-बीच से प्रदर्शन और रैली निकाली, इस रैली में, 20 से 25 ग्राम पंचायतों के सैकड़ों किसानों, नौजवानों, महिलाओं ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया।

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वर्तमान व्यवस्था का विकल्प मुमकिन है!

यह बयान पार्टी की सैध्दान्तिकस्पष्टता को दिखाता है। हिन्दोस्तान के राजनीतिक जीवन की लगातार बदलती जटिलताओं से जूझती हुई, पार्टी हमेशा मार्क्सवाद – लेनिनवाद के वैज्ञानिक असूलों से मार्गदर्शित रही है। वर्ग संघर्ष और भौतिक द्वंद्ववाद के आधार पर विश्लेषण करके पार्टी ने आसान तरीके से वह बात समझाई है जो इतने सारे अखबारों और इतने घंटों के टीवी कार्यक्रमों से स्पष्ट नहीं हो सका है।

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देश के मजदूरों की विशाल रैली

23 फरवरी, 2011 को देश के सभी राज्यों और अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों से मजदूरों ने एकजुट होकर, देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन किया। संसद पर यह प्रदर्शन सरकार, संसद और पूरे देश की जनता को यह बताने के लिये किया गया, कि देश के मजदूरों ने, चाहे किसी भी पार्टी या ट्रेड यूनियन के हों, एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करने का फैसला किया है। मजदूरों ने अपने प्रदर्शन के जरिये यह

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