बंगाल के खेत मज़दूरों का संघर्ष

जनवरी के अंतिम और फरवरी के पहले सप्ताह में बंगाल के खेत मज़दूरों ने विरोध का एक नया तरीका अपनाया है। पश्चिम बंगाल खेत मज़दूर समिति (पी.बी.के.एम.एस.) के बैनर तले संगठित मज़दूरों ने 2 फरवरी, 2011 को ”शर्मनाक दिन” के रूप में मनाकर अपना विरोध का कार्यक्रम समाप्त किया। नरेगा की पांचवी सालगिरह के उपलक्ष्य में, नरेगा शर्मनाक दिवस कहलाने वाले इस विरोध में, पश्चिम बंगाल के

आगे पढ़ें

पंजाब में काले कानून के खिलाफ़ आंदोलन

20 जनवरी, 2011 को काले कानून के खिलाफ़ लुधियाना शहर में एक जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। इन काले कानूनों को पंजाब विधानसभा ने पिछले सत्र में पारित किया था। रैली में 40 जन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मिलकर हिस्सा लिया। आतंकवाद को दबाने के नाम पर पारित कानून का विरोध करते हुए मजदूर, किसान व सरकारी कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर रैली में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा, यह क

आगे पढ़ें

कोच्ची बंदरगाह में हड़ताल

1 फरवरी, 2011 की रात से कोच्ची बंदरगाह के मजदूर हड़ताल पर हैं। अन्य मांगों के अलावा वे मांग कर रहे हैं कि जब कंटेनर ऑॅपरेशन को वल्लारपदम बंदरगाह में स्थानांतरण किया जायेगा तो कोच्ची बंदरगाह को अंतर्देशीय कार्गो हब के रूप में विकसित किया जाये और उनके रोजगार की रक्षा की जाये।
11 फरवरी, 2011 को वल्लारपदम में इंटरनेशनल कंटेनर ट्

आगे पढ़ें

गुजरात के कपड़ा मज़दूरों ने वेतन वृध्दि की मांग रखी

सूरत के कपड़ा मज़दूरों का संघर्ष जारी है। मज़दूरों द्वारा 25 पैसे प्रति मीटर की वेतन वृध्दि की मांग करने के बाद जोल्वा औद्योगिक क्षेत्र की बुनाई इकाईयां बंद कर दी गयी हैं। रविवार को देर समय पर पावरलूम मशीनें बंद की गयीं जब 1000 बुनाई कारखानों के 30,000 से भी अधिक मज़दूरों ने इस मुद्दे पर विरोध शुरु किया। यानि कि 30,000 मज़दूर हड़ताल पर हैं।

मणिपुर में शिक्षकों ने हड़ताल तेज की

छठे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए मणिपुर में शिक्षकों का संघर्ष एक नए पड़ाव पर पहुँच गया है। अब तक क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे 123 शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया है। 6 फरवरी, 2011 से इन शिक्षकों ने जेल के अन्दर ही आमरण भूख हड़ताल शुरु कर दी है। जेल अधिकारियों ने उन्हें जबरदस्ती से खाना खिलाने की कोशिश की, जो कि नाकामयाब रही। इस बीच शिक्षक चुप नहीं

आगे पढ़ें

‘राडिया टेप्स और हिन्दोस्तानी लोकतंत्र के असली चेहरे’ पर गोष्ठी

देश भर में, बड़े से बड़े मंत्रियों, अफसरों, बड़े पूंजीपतियों और जानी-मानी मीडिया की हस्तियों से जुड़े विभिन्न घोटालों की खबरों ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के बारे में और भी ज्यादा लोगों की आंखें खोल दी हैं। हालांकि इसे लोकतंत्र कहा जाता है, परन्तु सच्चाई में यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कुछ मुट्ठीभर लोग अपनी सत्ता और दौलत के द्वारा देश का भविष्य तय करते हैं और सार्वज

आगे पढ़ें

काला धन निकालने का मौरिशस का रास्ता

1982 में हिन्दोस्तान-मौरिशस टैक्स बचाने की दोहरी संधि (डी.टी.ए.टी.) पर हस्ताक्षर किया गया। इस संधि के अनुसार, अगर कोई कंपनी मौरिशस में पंजीकृत होती है, तो उसे हिन्दोस्तान में टैक्स नहीं देना पड़ता है, हालांकि उनके मुनाफे का स्रोत संपूर्णतया हिन्दोस्तान के शेयर बाजार में सट्टेबाजी होता है। विदित है कि मौरिशस शेयर बाजार से, छोटे या लम्बे समय के निवेशों से बनाये गये म

आगे पढ़ें

अति-अमीर हिन्दोस्तानियों का विदेशी बैंकों में बहुत सारा गुप्त धन : इस लूट पर कब्ज़ा करके इसे मेहनतकशों के जीवन स्तर में उन्नति लाने के लिये इस्तेमाल करें!

हाल में यह पता चला है कि स्विस बैंकों समेत अनेक विदेशी बैंकों में हिन्दोस्तानियों का सबसे ज्यादा गुप्त धन जमा है।
स्विस बैंक अपने खाताधारकों के परिचय को गुप्त रखते हैं, इसीलिये ये बैंक गुप्त धन को जमा करने के लिये बहुत पसंद किये जाते हैं। दूसरे विश्व युध्द के दौरान, नाज़ियों ने अपनी लूट को गुप्त स्विस बैंक खातों में जमा किया

आगे पढ़ें

खतरनाक रास्ते पर

महोदय, मज़दूर एकता लहर के 1-15 फरवरी, 2011 के अंक में ”पी-5 देशों के प्रधानों की हाल की हिन्दोस्तान यात्राओं की समीक्षा : हिन्दोस्तान खतरनाक साम्राज्यवादी रास्ते पर” शीर्षक का लेख छापने के लिये आपको धन्यवाद। इस महत्वपूर्ण विषय पर यह लेख सरलता, विश्लेषण की गहराई और तथ्यों की सुस्पष्टता को दर्शाता है। लेख में गहराई से इस बात पर विश्लेषण किया गया है कि संयुक्त राष्ट

आगे पढ़ें

सार्वजनिक वितरण प्रणाली

महोदय, मैं हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को ”खाद्य एक मूल अधिकार है, एक सार्वजनिक दायित्व है और इस पर किसी निजी मुनाफाखोर का कोई अधिकार नहीं है!

आगे पढ़ें