राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर एन.ए.सी. का नोट

सार्वजनिक खाद्य वितरण को सर्वव्यापी बनाने की मांग से कोई समझौता नहीं!

एन.ए.सी. के कथित उद्देश्य और ठोस प्रस्ताव के बीच में बहुत चौड़ी खाई है। कथित उद्देश्य सभी नागरिकों को खाद्य के अभाव से रक्षा देना है। ठोस प्रस्ताव सिर्फ कुछ ''नाजुक हालत वाले परिवारों'' को रक्षा देने और वह भी सीमित मात्रा में सिर्फ गेहूं, चावल या मोटे अनाज़ देने का है। बाकी आबादी, जिसमें 50 प्रतिशत शहरी आबादी शामिल है, अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा कर पायेगी या नहीं, इस पर खाद्य सुरक्षा कानून कुछ भी नहीं कहता।

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अधिकारों पर हमलों के विरोध में अमरीकी मज़दूरों के प्रदर्शन

आज जब, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के लोगों की बगावत ने मेहनतकश लोगों के दिलों को छू लिया है और साम्राज्यवादी व्यवस्था के संकट को अधिक गहरा बनाया है, और जब लिबिया में गृहयुध्द से पैदा हुये मौकों का फायदा उठा कर साम्राज्यवाद इस इलाके में सम्भलने की कोशिश कर रहा है, अमरीका के मज़दूर अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरोध में बहादुरी से लड़ रहे हैं। अपने संघर्ष से वे अमली तौर पर अमरीका के प्र

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जर्मनी के ट्रेन चालकों की हड़ताल

22 फरवरी, 2011 को ट्रेन चालकों द्वारा 2 घण्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की वजह से जर्मनी में सुबह की भीड़ वाले समय की रेल की यातायात ठप्प हो गयी है। राईन-मेन इलाका और स्टट्टगार्ट खास रूप से प्रभावित हुये। पूर्वी जर्मनी के ड्रेस्डेन और बर्लिन शहर की टे्रन व्यवस्था भी इस हड़ताल से प्रभावित हुयी।

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फ्रांस में गोदी मजदूरों की हड़ताल

फ्रांस के तटवर्ती शहर मार्से में गोदी मजदूर आमदनी की कटौती के विरोध में एक महीने से हड़ताल पर थे। प्रदर्शनकारियों ने समुद्री यातायात रोकने के लिये बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर लाईफ बोट और रस्से व जालियां टांग रखी थी। हाल में उन पर पुलिस की बड़ी फौज़ ने बेरहमी से उन पर हमला किया। 10 मार्च, 2011 को हड़ताल को खत्म करने के लिये कम से कम 700 पुलिस अफसर तैनात किये गये। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिये प

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राशन की गारंटी के लिये दिल्ली सरकार के खिलाफ़ धरना

4 मार्च, 2011 को दिल्ली के तमाम जन संगठनों ने सभी लोगों के लिए राशन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर और पीडीएस को बंद करने तथा नगद भुगतान व्यवस्था लागू करने के दिल्ली सरकार के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ़ धरना दिया। इस धरने में अलग-अलग इलाकों की विभिन्न मजदूर कालोनियों में रहने वाली मेहनतकश महिलाओं व पुरुषों ने सैकड़ों की संख्या में भाग लिया।

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संसद के सामने रेल चालक कर्मचारियों का प्रदर्शन

28 फरवरी, 2011 को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आइ.एल.आर.एस.ए.) के झंडे तले हजारों रेलवे इंजन चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन लंबे अरसे की कर्मचारियों की शिकयतों के प्रति रेलवे मंत्रालय की बेदर्द नामंजूरी के रवैये के खिलाफ़ किया गया था।

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

आओ महिलाओं के संपूर्ण उध्दार के लिए संघर्ष करें!

6 मार्च, 2011 को पुरोगामी महिला संगठन की अगुवाई में, दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े जोश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर, पुरोगामी महिला संगठन की कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्कूली एवम कालेज की छात्राओं, कामकाजी नौजवान लड़कियों, स्थानीय जन समितियों के कार्यकर्ताओं और अलग-अलग बस्तियों से आयी महिलाओं ने उत्साह से

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मध्यप्रदेश के नर्सो का संघर्ष

3 फरवरी, 2011 को नर्सों की हड़ताल को कुचलने के लक्ष्य से मध्यप्रदेश सरकार ने 200 से अधिक नर्सों को गिरफ्तार किया। सरकार ने आवश्यक सेवा कानून (एस्मा) का प्रावधान लागू किया। लेकिन सरकार के इस कड़े रुख के बावजूद, मध्यप्रदेश के रेवा, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और भोपाल के अस्पतालों में काम करने वाली 3,500 से ज्यादा नर्सों का संघर्ष नहीं टूटा। नर्स हड़ताल पर हैं। वे तनख्वाह

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आंगनवाड़ी मजदूरों का संघर्ष

5 फरवरी, 2011 को हरियाणा के जिला सिरसा के ब्लाक के आंगनवाड़ी मजदूर भगतसिंह पार्क में एकत्रित होकर अपने अधिकारों का हनन पर सरकारी अधिकारियों पर रोष व्यक्त किया।
मजदूरों के मुताबिक, उनका सुपरवाइजर सरकारी अफसरों और राजनीतिक नेताओं के साथ मिलकर, उन्हें अपनी तनख्वाह से वंचित करते हैं। डाबवाली रोड पर स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र में जब

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हरियाणा में अध्यापकों का संघर्ष

हरियाणा के ”अतिथि” अध्यापकों ने, उनकी परिस्थिति के बारे में सरकार की उदासीनता पर ध्यान खींचने के लिये एक नये तरीके का विरोध आयोजित किया है। इन अध्यापकों को बकाया वेतन बहुत समय से नहीं दिया गया है। अध्यापक भिखारियों का कटोरा लेकर अंबाला की सड़कों पर आये हैं और जनता से अपने वेतन के लिये चंदा मांग रहे हैं। अध्यापक हरियाणा पाठशाला लेक्चरर असोसियेशन के झंडे तले विरोध

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