महिलायें एक नई राज्य सत्ता एक नये संविधान और एक नई राजनीतिक व्यवस्था व प्रक्रिया की मांग करती हैं!

8 मार्च 2010 पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शताब्दी वर्ष की शुरुआत में, 8 मार्च 2010 के अवसर पर, कांग्रेस पार्टी नीत संप्रग सरकार हिन्दोस्तान की महिलाओं को तोहफा बतौर, महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पेश करने जा रही है। इस विधेयक का मकसद है प्रत्येक लोक सभा व विधान सभा चुनाव में महिलाओं के लिये आरक्षित निर्वाचन

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मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

बहुत ही उत्साह और जोश से सैकड़ों स्त्री और पुरुषों ने मुंबई के मज़दूर वर्ग इलाके में एक जन रैली में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया।

7 मार्च 2010 के दिन यह जन रैली अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के सौवें वर्षगांठ की शुरुआत को मनाने के लिये वरली की बी.डी.डी. चाल के मैदान में की गयी।

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पैरिस कम्यून की 139वीं सालगिरह: जब मजदूर वर्ग ने आसमान को हिला दिया!

इस वर्ष के 18 मार्च को पैरिस कम्यून की 139वीं सालगिरह होगी। मजदूर वर्ग के इतिहास में यह एक बहुत ही महान और प्रेरक घटना थी। बहादुर क्रान्तिकारी ब़गावत के जरिये, पैरिस के मेहनतकशों ने राज्य सत्ता को अपने हाथ में ले लिया और पैरिस कम्यून के रूप में अपना शासन स्थापित किया। 26 मार्च से 30 मई, 1871 तक उन्होंने अपनी राज्य सत्ता को कायम रखा, पर अंत में उन्हें बेरहमी से कुचल डाला गया। उन्होंने पूंजीवा

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शताब्दी सालगिरह पर दिल्ली में जोशीली रैली

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के सौ साल मनाने के लिये इस वर्ष 8 मार्च के दिन तकरीबन 30 संगठनों से जुड़े एक हजार से भी अधिक महिलायें व पुरुष दिल्ली के केन्द्र में, मंडी हाऊस से जंतर-मंतर तक, एक जोशीली रैली में शामिल हुये। इस प्रदर्शन का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिये गठित शताब्दी समिति ने किया था।

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अफ्रीका में हिन्दोस्तान की बढ़ती मौजूदगी

अपने मुनाफे को निरंतर बढ़ाने के प्रयास के एक हिस्सा बतौर हिन्दोस्तानी पूंजीपति देश में और विदेशों में भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। पूंजी के लिये लाभकारी क्षेत्रों में निवेश के साथ-साथ, वे नये बाजारों, उर्जा के स्रोतों व कच्चे माल की खोज में रहते हैं। हाल के वर्षों में ऐसे क्षेत्रों में एक क्षेत्र, जिसमें उनकी मौजूदगी तेजी से बढ़ी है, नाना संसाधन संपन्न अफ्रीका है।

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निजीकरण विरोधी-संघर्ष में एक मील पत्थर

संपादक महोदय,

माडर्न फूड्स संघर्ष की 10वीं सालगिरह के अवसर पर मजदूर एकता लहर की फरवरी 16-28, 2010 के अंक में लेख छापने पर मैं आपका आभारी हूं। माडर्न फूड्स का संघर्ष हमारे देश में चल रहे वर्ग संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मील पत्थर है जिसे याद करना जरूरी है।

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संप्रग सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ़, 5 मार्च 2010 को देश के कोने-कोने में लाखों-लाखों मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किये।

अलग-अलग पार्टियों के ट्रेड यूनियनों ने एकजुट होकर, खाद्य की आसमान छूती महंगाई और मेहनतकशों पर अन्य हमलों का विरोध किया। उन्होंने खाद्य की बढ़ती महंगाई को फौरन रोकने के कदम मांगे, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण का विरोध किया, श्रम कानूनों के उल्लंघन की कड़ी सज़ा मांगी, कृषि मजदूरों तथा मौजूदे श्रम कानूनों के तहत सुरक्षा से वंचित अन्य क्षेत्रों के मजदूरों के लिए सुरक्षा मांगी और एक रा

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खाद्य पदार्थों के प्रापण और वितरण का राष्ट्रीकरण और समाजीकरण किया जाए!

आधुनिक सर्वव्यापक सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के लिये खाद्य सबसिडी बढ़ाया जाए!

हथियारों पर खर्च घटाया जाए और ब्याज भुगतान रोका जाए!

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी 26 फरवरी को केन्द्रीय बजट पेश करने जा रहे हैं, ऐसे समय पर जब मजदूर वर्ग अप्रत्याशित खाद्य पदार्थों की महंगाई के बोझ के तले कराह रहा है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने, बजट सत्र के आरंभिक दिन पर संसद को संबोधित करते

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5 मार्च को मज़दूर वर्ग के प्रदर्शन को सफल बनायें!

भारी मंहगाई तथा मेहनतकशों व लोगों पर दूसरे हमलों का सामना करने के लिये अपने देश के ट्रेड यूनियनों व मज़दूर वर्ग संगठनों ने 5 मार्च, 2010 को सर्व हिन्द विरोध के दिन का आयोजन किया है।

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