आशा और सहिया मज़दूरों ने नियमित होने की मांग रखी

ऑल इंडिया हेल्थ एम्प्लाईज एण्ड वर्कर्स कन्फेडरेशन के झंडे तले देश भर के आशा और सहिया मज़दूर संसद के बाहर 24 फरवरी, 2011 से जमा हैं।

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मजदूरों से साक्षात्कार – 23फरवरी, 2011को संसद पर मजदूरों की रैली में मजदूर एकता लहर के संवाददाता ने साक्षात्कार किया

श्री सौरीबंधु कर, महासचिव, एटक, भुवनेश्वर, ओडिसा

प्र. – इस रैली में क्यों आए हैं?

उ. – ट्रेड यूनियन के संयुक्त बुलावे पर आये हैं।

प्र. – किस तरह के मजदूर ओडिसा से यहां आये हैं?

उ. – आशा मजदूर, एमडीएम वाचिका, आंगनवाड़ी मजदूर, मिड डे मील वर्कर, बीड़ी बनाने वाले मजदूर इत्यादि।

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साम्राज्यवादियों, लिबिया से दूर रहो!

उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में जनता की बगावत के चलते, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी लिबिया में चल रहे गृह युध्द को बहाना बनाकर, वहां सैनिक हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने लिबिया की स्थिति के बारे में धोखाधड़ी और बढ़ा-चढ़ाकर बातें फैलाने की मुहिम छेड़ रखी है, ताकि अपने सैनिक हस्तक्षेप को उचित ठहरा सकें।

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भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 80वें शहादत दिवस पर

नौजवानों के लिए शहीदों का पैगाम – नए हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष करो!

23 मार्च शहीद भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव की बर्तानवी बस्तीवादियों के हाथों शहादत की बरसी का दिन है। हमारे शहीदों का पैगाम कि – हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कुछ मुट्ठीभर शोषक, विदेशी या हिन्दोस्तानी, मेहनतकश लोगों का शोषण करते रहेंगे – हमारे देश के नौजवानों के दिलों में आज भी गूंजता है।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर एन.ए.सी. का नोट

सार्वजनिक खाद्य वितरण को सर्वव्यापी बनाने की मांग से कोई समझौता नहीं!

एन.ए.सी. के कथित उद्देश्य और ठोस प्रस्ताव के बीच में बहुत चौड़ी खाई है। कथित उद्देश्य सभी नागरिकों को खाद्य के अभाव से रक्षा देना है। ठोस प्रस्ताव सिर्फ कुछ ''नाजुक हालत वाले परिवारों'' को रक्षा देने और वह भी सीमित मात्रा में सिर्फ गेहूं, चावल या मोटे अनाज़ देने का है। बाकी आबादी, जिसमें 50 प्रतिशत शहरी आबादी शामिल है, अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा कर पायेगी या नहीं, इस पर खाद्य सुरक्षा कानून कुछ भी नहीं कहता।

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अधिकारों पर हमलों के विरोध में अमरीकी मज़दूरों के प्रदर्शन

आज जब, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के लोगों की बगावत ने मेहनतकश लोगों के दिलों को छू लिया है और साम्राज्यवादी व्यवस्था के संकट को अधिक गहरा बनाया है, और जब लिबिया में गृहयुध्द से पैदा हुये मौकों का फायदा उठा कर साम्राज्यवाद इस इलाके में सम्भलने की कोशिश कर रहा है, अमरीका के मज़दूर अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरोध में बहादुरी से लड़ रहे हैं। अपने संघर्ष से वे अमली तौर पर अमरीका के प्र

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जर्मनी के ट्रेन चालकों की हड़ताल

22 फरवरी, 2011 को ट्रेन चालकों द्वारा 2 घण्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की वजह से जर्मनी में सुबह की भीड़ वाले समय की रेल की यातायात ठप्प हो गयी है। राईन-मेन इलाका और स्टट्टगार्ट खास रूप से प्रभावित हुये। पूर्वी जर्मनी के ड्रेस्डेन और बर्लिन शहर की टे्रन व्यवस्था भी इस हड़ताल से प्रभावित हुयी।

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फ्रांस में गोदी मजदूरों की हड़ताल

फ्रांस के तटवर्ती शहर मार्से में गोदी मजदूर आमदनी की कटौती के विरोध में एक महीने से हड़ताल पर थे। प्रदर्शनकारियों ने समुद्री यातायात रोकने के लिये बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर लाईफ बोट और रस्से व जालियां टांग रखी थी। हाल में उन पर पुलिस की बड़ी फौज़ ने बेरहमी से उन पर हमला किया। 10 मार्च, 2011 को हड़ताल को खत्म करने के लिये कम से कम 700 पुलिस अफसर तैनात किये गये। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिये प

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राशन की गारंटी के लिये दिल्ली सरकार के खिलाफ़ धरना

4 मार्च, 2011 को दिल्ली के तमाम जन संगठनों ने सभी लोगों के लिए राशन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर और पीडीएस को बंद करने तथा नगद भुगतान व्यवस्था लागू करने के दिल्ली सरकार के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ़ धरना दिया। इस धरने में अलग-अलग इलाकों की विभिन्न मजदूर कालोनियों में रहने वाली मेहनतकश महिलाओं व पुरुषों ने सैकड़ों की संख्या में भाग लिया।

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