हमारे इलाके के देशों की संप्रभुता का घोर हनन करने के लिये अमरीका की कड़ी निन्दा करें!

बर्तानवी-अमरीकी सेना व खुफिया एजेंट दक्षिण एशिया से बाहर निकलो!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 5 मई, 2011

अमरीकी खुफिया दलों और सेनाओं द्वारा पाकिस्तान की धरती पर की गई सैनिक कार्यवाही, जिसमें समाचार सू़त्रों के अनुसार, ओसामा बिन लादेन को घेर कर मार डाला गया, यह हमारे पड़ौसी देश की संप्रभुता का घोर हनन है। पर बड़ी-बड़ी इजारेदार कंपनियों द्वारा नियंत्रित अंतर्राष्ट्रीय मीडिया यह हकीकत नहीं बता रही है कि ओसामा को तथाकथित मार गिराने वाली इस कार्यवाही के लगभग एक हफ्ते पहले से, पाकिस्तान में अमरीकी साम्राज्यवादियों द्वारा उस देश की संप्रभुता के हनन के खिलाफ़ जनसामूहिक विरोध बहुत ज्यादा बढ़ गया था।

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राज्य द्वारा किसानों के दमन की निंदा करें!

ग्रेटर नोएडा के भट्टा-परसौल गाँव और दिल्ली नोएडा होते हुए आगरा और अलीगढ़ जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे से लगे हुए कई अन्य गांवों के किसानों के खिलाफ राज्य द्वारा चलाये जा रहे वहशी दमन का हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी कड़ी निंदा करती है।

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एयर इंडिया के विमान-चालकों ने महत्वपूर्ण संघर्ष जीता

एयर इंडिया के 800 से अधिक विमान-चालकों की हड़ताल, जिसकी अगुवाई उनके जुझारू यूनियन इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसियेशन (आई.सी.पी.ए.) ने की, 6 मई, 2011 को रात 10 बजे समाप्त हुई। तीन दिन तक नागरिक उड्डयन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार वार्ता करने के बाद विमान चालकों ने अपनी 10 दिन की हड़ताल को समाप्त किया।

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फैक्ट्री के गुंडों को मजदूरों ने मुंहतोड़ जवाब दिया

3मई, 2011 को गोरखपुर के बरगदवा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अंकुर उद्योग लिमिटेड के मजदूरों पर मैनेजमेंट ने किराए के गुंडों से हमला कराया। हमला करके फैक्ट्री मालिक मजदूरों को सबक सिखाना चाहते थे क्योंकि उन्होंने मई दिवस की रैली में हिस्सा लिया था। गोरखपुर के पूंजीपतियों का असोसियेशन इस बात से बहुत गुस्सा था कि पूंजीपतियों के आदेश का उल्लंघन करते हुए मजदूरों ने मई दिवस की रैली में बड़े पैमाने प

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एयर इंडिया के विमान चालकों द्वारा कंपनी के निजीकरण और उसे दिवालिया बनाने के कदमों का विरोध

एयर इंडिया के 800 विमान-चालकों की प्रभावशाली हड़ताल ने फिर एक बार साफ दिखाया है कि संप्रग सरकार एक व्यवस्थित तरीके से एयर इंडिया को बरबाद करने और उसका निजीकरण करने की नीति लागू करती आयी है। एयर इंडिया की इस बरबादी और निजीकरण के विरोध के संघर्ष का नेतृत्व, ऑल  इंडिया कैबिन क्रू एसोसियेशन व स्थल कर्मचारियों और इंजीनीयर्स की यूनियन और एयर इंडिया मज़दूरों की दूसरी यूनियनों से साथ, इंडि

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पश्चिम बंगाल में माकपा नीत वाम मोर्चा शासन:

वर्तमान लोकतंत्र के अंदर जो पार्टी खुद सत्ता में आना चाहती है, वह अनिवार्यतः इजारेदार पूंजीपतियों के हितों की सेवा करेगी

पश्चिम बंगाल में चल रहे विधान सभा चुनावों के परिणाम चाहे कुछ भी हों, सच्चाई तो यह है कि वहां की तथाकथित मार्क्सवादी सरकार जो दावा करती रही है, उसका बिलकुल उल्टा साबित हो चुकी है।

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लिबिया पर साम्राज्यवादी हमले को फौरन रोको!

पिछले 6 हफ्तों से अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन के युद्ध विमान लिबिया के लोगों पर मौत और तबाही बरसा रहे हैं। उन्होंने यह बहाना देकर लिबिया में हस्तक्षेप शुरु किया था, कि वहां की सरकार विद्रोही लोगों पर ”वहशी दमन“ छेड़ रही है और साम्राज्यवादी ताकतें मानवीय आधार पर ”खून-खराबा रोकना चाहती हैं“।

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हिन्दोस्तान भर में मज़दूरों ने जोश के साथ मई दिवस मनाया

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के साथियों और समर्थकों ने 2011का मई दिवस दिल्ली स्थित पार्टी ऑफिस में जोशीले उत्साह के साथ मनाया। सुबह-सुबह जोशीले नारों के बीच पार्टी के एक साथी द्वारा लाल झंडा फहराने के साथ जश्न शुरू हुआ। पार्टी के मज़द

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May Day 2011 in Berlin, Germany

दुनिया भर में करोड़ों मजदूरों ने मई दिवस मनाया

1 मई, 2011 को दुनिया भर में करोड़ों मजदूर पूंजीवादी व्यवस्था की नाइंसाफ़ी के खिलाफ़ सड़कों पर उतर आये और एक नयी दुनिया बनाने का फैसला लिया, जहाँ मानव द्वारा मानव का शोषण नहीं होगा।

लंदन (ब्रिटेन) में दसों हज़ारों मजदूरों ने कलेरकेनवेल्ल ग्रीन पर स्थित मार्क्स की समाधि से ट्राफलगर चैराहे तक एक रैली निकाली। यह एक अन्तर्राष्ट्रीय रैली थी जिसमें ईरानी, तुर्की, हिन्दोस्तानी, श्रीलंका

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अधिकतम लूट-खसौट की पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ एकजुट हों!

मजदूर वर्ग को शासक वर्ग बनने के लिये संघर्ष करना होगा!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा मई दिवस 2011पर आह्वान

मौजूदे पूंजीवादी लोकतंत्र में एक पार्टी या गठबंधन की जगह पर दूसरी पार्टी या गठबंधन को बिठाकर, मेहनतकशों की हालतों में कोई उन्नति नहीं होती। इससे अर्थव्यवस्था की पूंजीवादी दिशा नहीं बदलती। इससे हमारी भूमि व श्रम की लूट नहीं खत्म होती, न हमारे अधिकारों पर हमले। हालत तभी बदल सकती है जब हम, जो देश की दौलत को पैदा करते हैं, खुद इसके मालिक बन जाते हैं। तब और सिर्फ तब ही हम अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाकर, सभी को खुशहाली और सुरक्षा दिला सकते हैं।

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