सरकार द्वारा ख़रीद में कटौती के कारण गेहूं की खुदरा क़ीमतों में तेज़ी आई

देशभर के क़स्बों और शहरों में काम करने वाले लोग जून 2022 से गेहूं की बढ़ती क़ीमतों का सामना कर रहे हैं। गेहूं जैसे ज़रूरी खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि ने लोगों पर और बोझ डाल दिया है, जो पहले से ही एल.पी.जी., पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी हुई क़ीमतों का सामना कर रहे हैं।

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आलू और प्याज के उत्पादकों का बार-बार होने वाला संकट :
एकमात्र समाधान-लाभकारी क़ीमतों पर राज्य द्वारा ख़रीद की गारंटी

हिन्दोस्तान में थोक प्याज के सबसे बड़े बाज़ार, महाराष्ट्र के नाशिक में प्याज की क़ीमतें पिछले दो महीनों में लगभग 70 प्रतिशत गिर गई हैं। महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक अपनी फ़सल को एक रुपये से दो रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में आलू के किसानों को इसी तरह के संकट का सामना करना पड़ा है। आलू की क़ीमतें 4 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गईं, जो उनकी उत्पादन लागत से काफी कम हैं।

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पेरिस कम्यून और श्रमजीवी लोकतंत्र की श्रेष्ठता

सरमायदार शासक वर्गों का दावा है कि बहुपार्टीवादी प्रतिनिधित्ववादी लोकतंत्र से बेहतर कोई विकल्प नहीं है
18 मार्च, 1871 को स्थापित हुए पेरिस कम्यून ने दिखाया था कि उससे बेहतर एक विकल्प है – श्रमजीवी लोकतंत्र

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महिलाओं की मुक्ति के संघर्ष को आगे बढ़ाएं!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 8 मार्च, 2023

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, 2023 के अवसर पर लाखों-लाखों संघर्षरत महिलाओं को सलाम करती है। हम उन मेहनतकश महिलाओं को सलाम करते हैं जो हमारे देश में निजीकरण और उदारीकरण के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे आगे हैं। हम उन सभी को सलाम करते हैं जो राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा, राजकीय आतंकवाद और महिलाओं के खि़लाफ़ सभी प्रकार की हिंसा के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं।

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हिन्दोस्तानी गणतंत्र की 73वीं सालगिरह  पर :
इस गणतंत्र का मक़सद है मेहनतकश लोगों को सत्ता से बाहर रखना 

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 18 जनवरी, 2023

लोगों को क़ानूनों को प्रस्तावित करने और क़ानूनों को ख़ारिज करने का अधिकार होना चाहिए। उन्हें संविधान में संशोधन करने या उसे दोबारा लिखने का अधिकार होना चाहिए। हमें चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करने, चुने गए लोगों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें किसी भी समय वापस बुलाने और क़ानून प्रस्तावित करने का अधिकार होना चाहिए। लोगों के नाम पर फै़सले लेने के बजाय, राजनीतिक पार्टियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कर्तव्यबद्ध होना चाहिए, कि फ़ैसले लेने की शक्ति लोगों के हाथों में रहे।

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हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 42वीं सालगिरह के अवसर पर, केंद्रीय समिति की ओर से पार्टी के महासचिव कॉमरेड लाल सिंह का भाषण

“हम कम्युनिस्टों का काम है करोड़ों शोषितों और उत्पीड़ितों को एकजुट करना और लाखों शोषकों को हराना।”

“मज़दूरों और किसानों की हुकूमत को स्थापित करने और समाज को संकट से बाहर निकालने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द लोगों की क्रांतिकारी राजनीतिक एकता बनाते हुए, हमें कम्युनिस्ट आंदोलन की एकता को पुनः स्थापित करने की ज़रूरत है।”

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बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 30 वीं बरसी पर :
साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ और ज़मीर के अधिकार की हिफ़ाज़त के लिए अपनी राजनीतिक एकता को और मजबूत करें!


जब हुक्मरान वर्ग मज़हब के आधार पर जनता के किसी विशेष तबके को निशाना बनाता है, तो यह वास्तव में पूरी जनता पर हमला है। यह लोगों की एकता और भाईचारे पर हमला है।

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दिल्ली की सरहदों पर चले किसानों के विरोध धरने की दूसरी वर्षगांठ


दिल्ली की सीमाओं पर लाखों किसानों के धरने को शुरू करने के पूरे दो साल हो गये हैं। देशभर के किसानों ने राजधानी दिल्ली के आसपास 26 नवंबर, 2020 को शुरू किये गये अपने ऐतिहासिक विरोध की दूसरी वर्षगांठ के अवसर को चिन्हित करने का फ़ैसला किया है। इस दिन हर राज्य की किसान यूनियनें राजभवन के सामने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगी। राज्य के राज्यपाल का ऐसा पद होता है जो केंद्र सरकार के आदेश का पालन करता है।

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मुंबई में 26 नवंबर के आतंकी हमले की 14वीं बरसी पर :
मक़सद क्या था और असली मास्टरमाइंड कौन था?


26 नवंबर, 2022 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की 14वीं बरसी है। भारी हथियारों से लैस दस आतंकवादियों ने लगातार तीन रात और दिन तक शहर में जबरदस्त तबाही मचाई। उनके निशाने पर थे – छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट, ताज होटल, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, नरीमन हाउस और मेट्रो सिनेमा। इस हमले में 25 विदेशियों सहित 168 लोगों की जानें चली गईं।

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एक पैशाचिक अपराध की 38वीं बरसी पर :
1984 के जनसंहार के सबक


राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक को हमेशा के लिए तभी समाप्त किया जा सकता है, जब सरमायदारों की हुकूमत को मज़दूरों और किसानों की हुकूमत में बदल दिया जाएगा। वर्तमान राज्य की जगह पर एक ऐसे नए राज्य की स्थापना करनी होगी, जो सभी नागरिकों को जीने का अधिकार, ज़मीर का अधिकार और अन्य सभी मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी देगा।

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