राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की 47वीं बरसी पर:
जब हिन्दोस्तान के लोकतंत्र का असली चेहरा सामने आया

26 जून, 1975 वह दिन था जब देश के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। वह घोषणा “अंदरूनी अशांति” पर काबू पाने के नाम पर, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उपदेश के अनुसार की गयी थी।

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पूंजीवादी लालच बनाम सामाजिक आवश्यकता


सभी मज़दूर, राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह समाज के सामूहिक हितों के खि़लाफ़ है। निजीकरण का यह कार्यक्रम लोगों की सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करने के बजाय, इजारेदार पूंजीपतियों के अधिकतम मुनाफ़े बनाने के सभी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए, उनके संकीर्ण हितों की सेवा करता है।

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ऑपरेशन ब्लूस्टार की 38वीं बरसी पर:
स्वर्ण मंदिर पर सैनिक हमले से सबक


हुक्मरान वर्ग को बहुत डर है कि हिन्दोस्तान के लोग अपने धार्मिक और अन्य भेदभावों को एक तरफ करके, अपने सांझे दुश्मन के खि़लाफ़, अपने सांझे लक्ष्य के लिए, एकजुट हो जाएंगे। इसे रोकने के लिए हुक्मरान वर्ग ने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद को फैलाने के तौर-तरीक़ों में कुशलता हासिल कर ली है। अलग-अलग समय पर राज्य अलग-अलग समुदायों को निशाना बनाता है। पहले तो निशाना बनाए गए समुदाय के खि़लाफ़ राज्य बहुत ही जहरीला प्रचार फैलाता है और उसके बाद, बड़े सुनियोजित तरीक़े से उस समुदाय पर हमले करवाता है। उसके बाद राज्य यह झूठा प्रचार फैलाता है कि अलग-अलग धर्मों के लोग एक दूसरे का क़त्ल कर रहे हैं।

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नाज़ी जर्मनी की पराजय की 77वीं वर्षगाँठ के अवसर पर :
दूसरे विश्व युद्ध से सबक


स्थायी शांति क़ायम करने के लिए साम्राज्यवादी जंग के स्रोत, साम्राज्यवादी व्यवस्था, को उखाड़ फेंकना होगा और उसकी जगह पर समाजवाद की स्थापना करनी होगी
77 वर्ष पहले, 9 मई, 1945 को नाज़ी जर्मनी ने जर्मनी की राजधानी, बर्लिन में सोवियत संघ की लाल सेना के प्रतिनिधियों के सामने, आत्म-समर्पण किया था। इसके साथ, यूरोप में दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ।

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हिन्दोस्तान की आज़ादी का महान युद्ध – 1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह के अवसर पर


हमें बांटने वालों और हमारी ज़मीन व श्रम का शोषण और लूट करने वालों के खि़लाफ़ संघर्ष आज भी जारी है

आज से 165 वर्ष पहले, 10 मई को मेरठ में तैनात किये गये ईस्ट इंडिया कंपनी के सिपाहियों ने दिल्ली पर कब्ज़ा करने के लिए कूच किया था। वह महान ग़दर की शुरुआत थी। वह हिन्दोस्तान की आज़ादी का जंग था, हिन्दोस्तानी उपमहाद्वीप के व्यापक क्षेत्र पर कब्ज़ा किये हुए, उस अंग्रेज़ व्यापारी कंपनी के अन्यायपूर्ण, दमनकारी और खुदगर्ज़ शासन से आज़ादी के लिए जंग था।

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मई दिवस 2022 :
मज़दूरों और किसानों के शोषण को ख़त्म करने के लिए संघर्ष को आगे बढाएं!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, मई दिवस, 2022

आज मई दिवस है, सभी देशों के मज़दूरों के लिए जश्न मनाने का दिवस है। हमारे देश के कोने-कोने में मज़दूर जुझारू रैलियों, मीटिगों और जुलूसों में हिस्सा ले रहे हैं। हम अब तक हासिल हुई जीतों पर खुशियां मना रहे हैं और अपनी असफलताओं से सबक लेकर, उन पर चर्चा कर रहे हैं।

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इराक पर बेरहम हमले और कब्ज़े की 19वीं सालगिरह :
अमरीकी साम्राज्यवाद की हुक्मशाही के तले एक-ध्रुवीय दुनिया स्थापित करने के अजेंडे को परास्त करना होगा


20 मार्च, 2003 को अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इराक पर कब्ज़ा करने और उसे नष्ट करने का दूसरा जंग शुरू किया था। इसकी शुरुआत उन्होंने “अचानक चौकानेवाले” (शॉक एंड आव),  बम बरसाने के अभियान के साथ की थी।

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