आग ने ईरान के सबसे बड़े युद्धपोत और बड़ी तेल रिफाइनरी को तबाह कर दिया

2 जून को ईरान के खर्ग नामक सबसे बड़े युद्धपोत और ईरान की राजधानी तेहरान में राज्य की मालिकी वाले एक बड़ी पेट्रो-केमिकल रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। अभी तक आग लगने के कारण की घोषणा सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। लेकिन ईरान और अन्य देशों के कई लोगों को शक है कि, युद्धपोत और पेट्रो-केमिकल रिफाइनरी में लगी आग के पीछे अमरीका के समर्थन वाले देश इस्राइल का हाथ है।

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स्वर्ण मंदिर पर हमले की 37वीं वर्षगांठ पर :

ज़मीर के अधिकार पर राज्य द्वारा आपराधिक हमला

यह भ्रम कि हिन्दोस्तानी राज्य एक धर्म-निरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य है, जो सभी के ज़मीर के अधिकार की रक्षा करता है, यह भ्रम 37 साल पहले, 6 जून, 1984 को चकनाचूर हो गया था। उस दिन हिन्दोस्तानी सरकार ने भारतीय सेना के 70,000 से अधिक सैनिकों को सिखों के सबसे पवित्र तीर्थस्थल, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने का आदेश दिया था।

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कृषि विरोधी अध्यादेशों के एक साल बाद :

कृषि विरोधी कानूनों को रद्द करने के लिए किसानों का संघर्ष जारी है!

5 जून, 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर तथा देश के अनेक स्थानों पर आंदोलित किसानों ने अपने एक साल भर के संघर्षों को याद किया और अपने संकल्प को दोहराया कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक तीनों किसान-विरोधी क़ानून रद्द नहीं किये जायंगे। किसानों ने इस दिन को “सम्पूर्ण क्रांति दिवस” के रूप में मनाया। विदित है कि ठीक एक साल पहले, 5 जून, 2020 को केंद्र सरकार ने किसान-विरोधी अध्यादेश पारित किये थे, जिन्हें आगे चलकर, देशभर के किसानों के भारी विरोध के बावजूद, सितम्बर में क़ानून बना दिया गया था।

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विदेश मंत्री जयशंकर की अमरीका यात्राः

अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ सहयोग, हिन्दोस्तानी लोगों और इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं

विदेश मंत्री जयशंकर ने 24-28 मई के बीच, न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डीसी का दौरा किया। जनवरी में, राष्ट्रपति जो-बाइडेन की सरकार के सत्ता में आने के बाद, हिन्दोस्तानी सरकार की ओर से, अमरीका में यह पहली उच्च स्तरीय वार्ता और यात्रा थी।

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मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं

चल रही महामारी ने हमारे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दशकों की उपेक्षा को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। जहां लाखों लोगों ने इस बीमारी के कारण दम तोड़ दिया है, हम सभी जानते हैं कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के पूर्ण समर्पण के बिना यह संख्या इससे भी बहुत ज्यादा होती। लेकिन समय-समय पर हमें रिपोर्ट मिलती है कि इन स्वास्थ्य कर्मियों के साथ किस तरह से भयावह व्यवहार किया जा रहा है और उनके पास लड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

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रेल मजदूरों की कार्य परिस्थिति : ऑल इंडिया पॉइंट्समेन एसोसिएशन (ए.आई.पी.एम.ए.) के केंद्रीय अध्यक्ष और मीडिया सेंटर के केंद्रीय आयोजन सचिव के साथ वार्तालाप

इस श्रृंखला के छठे भाग में यहाँ पर हम हमारे संवाददाता को ए.आई.पी.एम.ए. के कॉम. अमजद बेग, केंद्रीय अध्यक्ष, और कॉम. एन.आर. साई प्रसाद, केंद्रीय आयोजन सचिव, मीडिया सेंटर से मिली जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के निलंबन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

दिल्ली विश्वविद्यालय (डी.यू.) के एक कॉलेज से 12 कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के निलंबन के विरोध में, विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने, इतनी भयानक महामारी के बीच, 27 मई को एक दिवसीय हड़ताल की। प्रदर्शनकारी शिक्षकों के हाथों में तख्तियां थीं, जिनमें उन्होंने अपने साथियों के निलंबन के विरोध और निलंबन आदेश को रद्द करने की मांग के नारे लिखे हुए थे।

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मजदूरों के काम करने की हालातों पर कोविड-19 लॉकडाउन का असर

देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड-19 लॉकडाउन के कारण, मज़दूर वर्ग के कई तबकों के लिए, कुछ नई और गंभीर समस्याएं पैदा हो गयी हैं।

कई क्षेत्रों में, कंपनियों ने, अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा है। “वर्क फ्रॉम होम” (डब्ल्यू.एफ.एच.) वास्तव में एक नया मानदंड बन गया है, ऐसी स्थिति में, जहां, महामारी और लॉकडाउन के कारण, मज़दूरों के लिए शारीरिक रूप से यात्रा करना और निर्धारित घंटों के दौरान, कार्यस्थल पर मौजूद रहना, संभव नहीं है।

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6 महीने से चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में रामगढ़ में प्रदर्शन

26 मई को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की अगुवाई में, तीनों कृषि-विरोधी कानून व बिजली बिल वापस लेने और एम.एस.पी. लागू करने की मांग को लेकर, दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के 6 माह पूरे हुए। इस अवसर पर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के उप तहसील रामगढ़ में लोक राज संगठन के झंडे तले, काला दिवस मनाया गया। रामगढ़ निवासियों ने अपने घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध प्रकट किया।

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दिल्ली की सरहदों पर किसानों का 6 महीनों से अनवरत आन्दोलन

26 मई, 2021 को, दिल्ली की सरहदों पर किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे की अगुवाई में लगातार चल रहे अन्दोलन के 6 महीने पूरे होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने उस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है।

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