राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की 47 वीं बरसी पर :
जब हिन्दोस्तान के लोकतंत्र का असली चेहरा सामने आया

26 जून, 1975 वह दिन था जब देश के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। वह घोषणा “अंदरूनी अशांति” पर काबू पाने के नाम पर, तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी के उपदेश के अनुसार, की गयी थी।  

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पुणे में निजीकरण के ख़िलाफ़ सभा

निजीकरण की मज़दूर-विरोधी, जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीति का संयुक्त रूप से विरोध करने के लिए, विभिन्न क्षेत्रों की यूनियनों और जन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुणे में एक बहुत ही सफल सभा का आयोजन किया।

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श्रीलंका की गंभीर स्थिति के लिए ज़िम्मेदार कारक

हिन्दोस्तान के दक्षिण में पड़ोसी देश श्रीलंका राष्ट्र द्वीप अभी तक के अपने चौतरफा और सबसे ख़राब संकट से गुजर रहा है। हाल के महीनों में वहां पर भोजन, ईंधन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहुत कम हो गई है।

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वर्तमान परिस्थिति और हमारे कार्यभार पर दिल्ली में पार्टी का सम्मेलन

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की दिल्ली इलाका कमेटी ने 5 जून, 2022 को एक सम्मेलन आयोजित किया। वर्तमान परिस्थिति और हमाारे कार्यभार पर प्रस्तुति के बाद एक जीवंत चर्चा हुई जो कई घंटे तक चली।

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टोक्यो में क्वाड शिखर सम्मेलन :
एशिया में अमरीकी साम्राज्यवाद के नेतृत्व वाले समूह का और सुदृढ़ीकरण

मई के अंत में क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) के रूप में पहचाने जाने वाले देशों के समूह ने जापान के टोक्यो में अपना चौथा शिखर सम्मेलन आयोजित किया। क्वाड के चार सदस्य देश हैं – संयुक्त राज्य अमरीका, हिन्दोस्तान, जापान और ऑस्ट्रेलिया।

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कामगार एकता कमेटी ने रेल मज़दूरों की यूनियनों की जनसभा आयोजित की:
भारतीय रेल के स्टेशन मास्टरों के संघर्ष के समर्थन में

29 मई, 2022 को कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) ने भारतीय रेल के स्टेशन मास्टरों के संघर्ष के समर्थन में एक जनसभा का आयोजन किया। रेल मज़दूरों की यूनियनों, फेडरेशनों तथा रेलवे में विभागों के अनुसार बने संगठनों को बड़ी संख्या में मीटिंग में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। के.ई.सी. के महासचिव कामरेड मैथ्यू ने वहां उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया और के.ई.सी. के संयुक्त सचिव, कामरेड अशोक कुमार से इस जनसभा का संचालन करने के लिए अनुरोध किया।

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पूंजीवादी लालच बनाम सामाजिक आवश्यकता

सभी मज़दूर, राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह समाज के सामूहिक हितों के ख़िलाफ़ है। यह निजीकरण का कार्यक्रम लोगों की सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करने के बजाय इजारेदार पूंजीपतियों के अधिकतम मुनाफ़े बनाने के सभी उपाय सुनिश्चित करने के लिए, उनके संकीर्ण हितों की सेवा करता है।

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ऑपरेशन ब्लूस्टार की 38वीं बरसी पर :
स्वर्ण मंदिर पर सैनिक हमले से सबक

हुक्मरान वर्ग को बहुत डर है कि हिन्दोस्तान के लोग अपने धार्मिक और अन्य भेदभावों को एक तरफ करके, अपने सांझे दुश्मन के खिलाफ, अपने सांझे लक्ष्य के लिए, एकजुट हो जाएंगे। इसे रोकने के लिए हुक्मरान वर्ग ने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद को फैलाने के तौर-तरीकों में कुशलता हासिल कर ली है। अलग-अलग समय पर राज्य अलग-अलग समुदायों को निशाना बनाता है। पहले तो निशाना बनाए गए समुदाय के खि़लाफ़ राज्य बहुत ही जहरीला प्रचार फैलाता है और उसके बाद, बड़े सुनियोजित तरीके से उस समुदाय पर हमले करवाता है। उसके बाद राज्य यह झूठा प्रचार फैलाता है कि अलग-अलग धर्मों के लोग एक दूसरे का कत्ल कर रहे हैं।

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मुंडका फैक्ट्री अग्निकांड के खि़लाफ़ दिल्ली के मज़दूरों ने मुख्य मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया

2 जून, 2022 को दिल्ली के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की अगुवाई में, दिल्ली के मुख्य मंत्री के आवास पर एक ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।

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महंगाई का विरोध करने वाले कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं पर हमले की कड़ी निंदा करें!

30 मई को कम्युनिस्ट पार्टियों – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी लिबरेशन (भाकपा माले-लिबरेशन) और कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी के खि़लाफ़, ओखला के शाहीन बाग़ पर एक प्रदर्शन आयोजित किया था।

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