Kisan_mahapanchayat


दिल्ली में किसान-मज़दूर महापंचायत

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट


14 मार्च, 2024 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में विशाल किसान-मज़दूर महापंचायत आयोजित की गई। अनुमान है कि इसमें 40 हजार से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया।

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Italy_Rome


पूरे यूरोप में किसानों के शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन

यूरोपीय आयोग लगातार किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर रहा है। ऊर्जा की बढ़ती लागत और बढ़ते ख़र्चों के साथ-साथ कृषि के लिए राज्य द्वारा दी जा रही सब्सिडी में कटौती, किसानों और कृषि मज़दूरों की आय को कम से कम कर रही है।

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UN_Relief_and_Works_Agency


फ़िलिस्तीनी लोगों के जनसंहार को उचित ठहराने के लिए झूठे प्रचारों की मुहिम

गाज़ा में जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में सच्चाई को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध पत्रकारों द्वारा की गई जांच ने, फ़िलिस्तीनी मुक्ति सेनानियों के बारे में झूठ फैलाकर, फ़िलिस्तीनी लोगों के जनसंहार को उचित ठहराने की इज़रायल और अमरीकी साम्राज्यवादियों की पैशाचिक योजनाओं का पर्दाफ़ाश किया है।

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महाराष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया

8 मार्च, 2024 को भिवंडी जन संघर्ष समिति (बीजेएसएस) ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए एक सभा का आयोजन किया। … ठाणे में पुरोगामी महिला संगठन (पीएमएस), भारतीय महिला फेडरेशन (बीएमएफ), जमात-ए-इस्लामी हिंद, और फातिमा शेख स्टडी सर्कल (एफएसएससी, मुंब्रा) ने संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए एक सभा की। कार्यक्रम रविवार 10 मार्च को आयोजित किया गया था।

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गाज़ा जनसंहार में ब्रिटिश विश्वविद्यालयों की मिलीभगत के खि़लाफ़ प्रदर्शन

ब्रिटेन के छात्रों ने गाज़ा में हजारों फ़िलिस्तीनी लोगों को मारने के लिये जारी जनसंहार में  उनके विश्वविद्यालयों की भागीदारी पर ध्यान आकर्षित करने के लिए, हाल के हफ़्तों में, तीन विश्वविद्यालयों में क़ब्ज़ा किया। ”विश्वविद्यालय तत्काल युद्धविराम का आह्वान करें“, ”हथियार कंपनियों के साथ संबंध तोड़ दें“ और ”विस्थापित फ़िलिस्तीनी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करें“ – इन मांगों को लेकर, दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में स्थित ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के छात्रों ने शहर के केंद्र में विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित भवन, विक्टोरिया रूम्स, पर क़ब्ज़ा किया था।

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पूर्वाेत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के चार साल बाद:
गुनहगार खुले घूम रहे हैं, जबकि बेगुनाह जेल में पीड़ित हैं!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मांग करती है कि पीड़ितों और लोगों की एकता की रक्षा के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं के खि़लाफ़ झूठे आपराधिक मामले तुरंत वापस लिए जाने चाहिए। जेल में बंद लोगों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह बेहद अन्याय है कि अपराध के वास्तविक आयोजक खुले घूम रहे हैं, जबकि पीड़ितों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और जेल में बन्द रखा जा रहा है।

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पैरिस कम्यून की सालगिरह:
श्रमजीवी लोकतंत्र ही असली लोकतंत्र है

इस महीने में एक ऐसी घटना की 153वीं सालगिरह है, जिसमें मज़दूर वर्ग ने पहली बार शोषक वर्गों की हुकूमत के खि़लाफ़ उठ खड़ा होकर, अपनी खुद की, पूरी तरह से नई, राज्य सत्ता स्थापित की थी। पैरिस कम्यून के नाम से मशहूर, 1871 में फ्रांस में मज़दूर वर्ग की इस उपलब्धि की दुनियाभर में सराहना की जाती है, क्योंकि इसने मानव जाति के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत की थी।

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केंद्र सरकार के खि़लाफ़ राज्यों का विरोध प्रदर्शन

कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, दिल्ली और पंजाब के वरिष्ठ मंत्रियों सहित कई राज्य सरकारों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने 7 और 8 फरवरी को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक  विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। वे केंद्र सरकार द्वारा की गई उन विभिन्न कार्रवाइयों का विरोध कर रहे थे, जिनकी वजह से राज्य सरकारों के अधिकारों में कटौती हुई है और उनकी वित्तीय समस्याएं और भी गंभीर हो गई हैं।

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पूरे हिन्दोस्तान में मज़दूरों के घरों का विध्वंस:
मेहनतकश जनता पर क्रूर हमला

कुख्यात “बुलडोज़र राज” के तहत पूरे देश में मज़दूरों के घरों को ध्वस्त किया जा रहा है और मेहनतकश लोगों को बेरहमी से अपने घरों से बेदखल किया जा रहा है।

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फ़िलिस्तीनी लोगों का क़त्लेआम फ़ौरन बंद होना चाहिए!

फ़िलिस्तीनी लोगों ने 75 वर्षों से अधिक के अपने बहादुर और अदम्य संघर्ष से दिखाया है कि उन्हें कुचला नहीं जा सकता। दुनिया के लोगों ने पिछले पांच महीनों में दिखाया है कि वे फ़िलिस्तीनी लोगों के इंसाफ हासिल करने के संघर्ष में, उनके साथ खड़े हैं।

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