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मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में मज़दूरों के जीवन और स्वास्थ्य की कोई क़ीमत नहीं है

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मार्च के महीने के सिर्फ एक सप्ताह, 16 मार्च-22 मार्च, में देशभर के विभिन्न कार्य स्थलों पर, निर्माण स्थलों पर या सीवर की सफाई में लगे, 30 से अधिक मज़दूरों ने अपनी जान गंवा दी। मौतों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक होने की संभावना है, क्योंकि अधिकांश ऐसे मामले कभी रिपोर्ट ही नहीं किए जाते। समाचार रिपोर्टों में इन कार्यस्थलों पर घायल हुए मज़दूरों की संख्या शामिल नहीं होती है, जो अक्सर इतने गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं कि वे काम में अक्षम हो जाते हैं।

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स्टेशन मास्टरों, लोको-पायलटों एवं अन्य रेल मज़दूरों की जायज़ मांग का समर्थन करें!

रेलवे कर्मचारियों की अन्यायपूर्ण बर्ख़ास्तगी को तुरंत रद्द करो!

मार्च, 2024 के दौरान भारतीय रेल के विभिन्न विभागों के मज़दूरों द्वारा – भारतीय रेल के निजीकरण को तत्काल रोकने, ओ.पी.एस. लागू करने, सभी रिक्तियों को भरने, हिदोस्तान की सरकार के श्रम और रोज़गार मंत्रालय के काम और आराम की अवधि (एच.ओ.ई.आर.) नियमों के समय के अनुसार ड्यूटी करने, कामकाजी परिस्थितियों में सुधार, कुछ कर्मचारियों को अन्यायपूर्ण अनुशासनात्मक प्राधिकरण द्वारा लगाए गए दंड को तत्काल वापस लेने, आदि विभिन्न मांगों को लेकर देश के सभी क्षेत्रों में कई आंदोलन किए गये।

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एम.एस.ई.डब्ल्यू.एफ. ने स्मार्ट मीटर का विरोध करने का निर्णय लिया

कामगार एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

13 मार्च, 2024 को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन (एम.एस.ई.डब्ल्यू.एफ.) ने “स्मार्ट मीटर – मिथक और वास्तविकता” विषय पर एक ज़ूम मीटिंग आयोजित की। उन्होंने प्रस्तुति करने के लिए कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) को आमंत्रित किया। ज़ूम मीटिंग में पूरे महाराष्ट्र से एम.एस.ई.डब्ल्यू.एफ. के 75 से अधिक पदाधिकारियों ने भाग लिया।

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गाज़ा में जनसंहार – मानवता के ख़िलाफ़ एक गंभीर अपराध!

अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके सहयोगियों के समर्थन के साथ, इज़राइल द्वारा गाज़ा में लगातार जारी अपराधी हमलों की वजह से, वहां पर लोग तबाही, अकाल और मौत से जूझने के लिये मजबूर हैं।

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18वीं लोकसभा चुनाव :
मौजूदा व्यवस्था अति-धनवान अल्पसंख्यकों की क्रूर हुक्मशाही है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 30 मार्च 2024


2024 के लोकसभा चुनावों की तारीख़ों की घोषणा के बाद, पूरे देश में लोगों पर हुक्मरान वर्ग की प्रतिस्पर्धी पार्टियों के झूठे प्रचार बरसाए जा रहे हैं।

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उत्तरी बंगाल के चाय बागानों के मज़दूर अपनी ज़मीन पर अधिकार की मांग कर रहे हैं

उत्तरी बंगाल में चाय बगानों के मज़दूर राज्य सरकार द्वारा उन्हें उनकी ज़मीन के अधिकार से वंचित करने के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं। उनके संघर्ष के लिए समर्थन जुटाने के लिए ग्राम संसद की बैठकों का ज़ोरदार अभियान चलाया जा रहा है।

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जोमैटो डिलीवरी मज़दूर भेदभाव का कड़ा विरोध किया

डिलीवरी मज़दूरों की “रंग-कोडिंग” से उन्हें “भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है और यहां तक कि अपने ख़िलाफ़ हिंसा के होने की संभावानाएं पैदा हो जायेंगी… मज़दूरों के बीच इस आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिये कि वे किस प्रकार की डिलीवरी कर रहे हैं”।

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दिल्ली के होम गार्ड्स का आन्दोलन


दिल्ली के होम गार्ड्स इन दिनों अपनी नौकरियों को बचाने के लिए आन्दोलन कर रहे हैं। हाल में दिल्ली होम गार्ड महानिदेशालय द्वारा जारी की गयी एक अधिसूचना से होम गार्ड बहुत चिंतित हैं। यह अधिसूचना दिल्ली में 10,285 होम गार्डों की भर्तियों के लिये निकाली गयी है। ऑन-लाइन आवेदन देने की अंतिम तारीख 13 फरवरी थी और नयी भर्तियां 31 मार्च तक होनी हैं। मौजूदा होम गार्ड, जो संख्या में 8,624 हैं, को इस बात की शंका है कि इस बड़े पैमाने पर नयी भर्तियां किये जाने के बाद, उनकी अब तक चल रही नौकरियां ख़त्म हो जायेंगी।

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दिल्ली में किसान-मज़दूर महापंचायत

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट


14 मार्च, 2024 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में विशाल किसान-मज़दूर महापंचायत आयोजित की गई। अनुमान है कि इसमें 40 हजार से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया।

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पूरे यूरोप में किसानों के शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन

यूरोपीय आयोग लगातार किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर रहा है। ऊर्जा की बढ़ती लागत और बढ़ते ख़र्चों के साथ-साथ कृषि के लिए राज्य द्वारा दी जा रही सब्सिडी में कटौती, किसानों और कृषि मज़दूरों की आय को कम से कम कर रही है।

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