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महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति

105 साल पहले, 7 नवंबर 1917 को, बोल्शेविक पार्टी के नेतृत्व में रूस के मज़दूरों ने क्रांति में जीत हासिल की थी और पूंजीपतियों व जमींदारों के शासन के स्थान पर अपना शासन स्थापित किया था । उस क्रांति ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था ।

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गुजरात में पुल गिरने से सैकड़ों लोगों की मौत
राज्य की आपराधिक लापरवाही

सस्पेंशन पुल का गिरना उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही और पुल के रखरखाव और संचालन के लिए जिम्मेदार निजी पूंजीपतियों के साथ उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

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एक पैशाचिक अपराध की 38वीं बरसी पर :
1984 के जनसंहार के सबक


राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक को हमेशा के लिए तभी समाप्त किया जा सकता है, जब सरमायदारों की हुकूमत को मज़दूरों और किसानों की हुकूमत में बदल दिया जाएगा। वर्तमान राज्य की जगह पर एक ऐसे नए राज्य की स्थापना करनी होगी, जो सभी नागरिकों को जीने का अधिकार, ज़मीर का अधिकार और अन्य सभी मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी देगा।

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यूरोप में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

आर्थिक संकट और अपनी रोज़ी-रोटी पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ पूरे यूरोप में मज़दूर बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये मेहनतकशों के जीवन को नरक बना रही ऊर्जा की क़ीमतों में भारी वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।

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“कृषि संकट और उसका समाधान” विषय पर आयोजित तीसरी मीटिंग

“भोजन समाज की एक आवश्यक ज़रूरत है, इसलिए जो लोग खाद्य-सामग्री का उत्पादन करते हैं उन्हें समाज में सुरक्षित आजीविका की गारंटी मिलनी चाहिए। लेकिन अगर समाज के एक बड़े हिस्से को ज़िन्दा रहने के लिए ज़रूरी भोजन भी नसीब नहीं होता। जो लोग खाद्य-सामग्री का उत्पादन करते हैं वे सुरक्षित आजीविका न होने के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर होते हैं, तो यह समाज के सामने एक गहरे संकट का, एक निश्चित संकेत है।”

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पुदुचेरी के बिजली मज़दूरों का निजीकरण के ख़िलाफ़ संघर्ष

पुदुचेरी के बिजली विभाग के मज़दूरों ने निजीकरण के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई में अस्थायी सफलता हासिल की है। उन्हें केंद्र शासित प्रदेश के बिजली मंत्री से आश्वासन मिला है कि बिजली वितरण के निजीकरण की प्रक्रिया को फ़िलहाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

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हिन्दोस्तानी अर्थव्यवस्था की स्थिति

महज चार हफ्ते पहले, सितंबर के पहले सप्ताह में सरकार, कॉरपोरेट जगत और मीडिया में इस बात का खास उत्साह था कि हिन्दोस्तान ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इस ख़बर ने इस बात पर चर्चा को जन्म दिया कि हिन्दोस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में कैसे बढ़ी है।

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दिल्ली नगर निगम के सफाई मज़दूरों का संघर्ष

दिल्ली के सफाई मज़दूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 14 अक्तूबर से हड़ताल शुरू की। यह हड़ताल ‘एमसीडी समस्त यूनियन कोर कमेटी’ के बैनर तले आयोजित की गई थी। इस कोर कमेटी में दिल्ली के सफाई मज़दूरों की 8 यूनियनें शामिल हैं ।

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राजनीतिक और सामाजिक संगठनों पर प्रतिबंध लगाये जाने के विषय पर

पिछले 75 वर्षों के अनुभव से स्पष्ट है कि इस या उस राजनीतिक या सामाजिक संगठन पर प्रतिबंध लगाने से समाज को कोई फायदा नहीं हुआ है। न ही लोगों को उनके राजनीतिक विचारों या कार्यों के लिए जेल में डालने से कोई फायदा हुआ है। लोगों को समाज के बारे में अपना-अपना नज़रिया रखने और उसका प्रचार करने का अधिकार है। राजनीति में बदले की भावना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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कृषि का संकट और उसके समाधान पर दूसरी मीटिंग

क्रांतिकारी किसान यूनियन, पंजाब के डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि “हरित क्रांति, जिसके कारण कृषि में पूंजीवाद का प्रसार हुआ, हमारे देश में कृषि के वर्तमान संकट के लिए ज़िम्मेदार है।” वे 30 सितंबर को मज़दूर एकता कमेटी (एम.ई.सी.) द्वारा आयोजित दूसरी मीटिंग को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था: कृषि का संकट और समाधान।

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