हमारे पाठकों से
आज़ादी एक छलावा

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर में प्रकाषित “हिन्दोस्तान को उपनिवेषावादी विरासत से आज़ादी की सख़्त जरूरत है” विषयर पर जो लेख अगस्त के अंक में प्रकाषित किया गया है उसके बारे में मैं अपने विचार सांझा करना चाहती हूं।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी के 75 वर्ष पत्र-1

प्रिय संपादक

हिन्दोस्तान में हर साल की तरह इस साल भी स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां ज़ोर-षोर की गयीं। आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आज़ादी के अमृत महोत्सव को मनाया गया और हर घर तिरंगा लहराने की अभियान किया गया।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी के 75 वर्ष पत्र-2

संपादक महोदय,

आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ, लेख को पढ़ने के बाद अगर पीछे मुड़कर देखें तो मन थोड़ा उदास हो जाता है कि शायद 75 वर्ष पहले और उसके बाद भी कई बार देश में ऐसे हालात बने जब देश में कम्युनिस्टों के द्वारा मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित किया जा सकता था।

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हमारे पाठकों से
बिजली एक आवश्यक सामाजिक ज़रूरत

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर को धन्यवाद करता हूं कि आपने बिजली के विषण पर छः भागों में जो लेखों की श्रृंखला प्रस्तुत की है इसमें बहुत की तर्कपूर्ण तरीके से समझाया गया है कि बिजली एक आवश्यक सामाजिक ज़रूरत है।

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कामरेड गुरमीत कौर नन्नर को लाल सलाम

21 अगस्त को, हमारी प्रिय कॉमरेड गुरमीत कौर नन्नर का लंबी बीमारी के बाद, शांतिपूर्वक निधन हो गया। उनकी बेटी इंदिरा और दामाद मैनुएल उनके निधन के समय उनके साथ थे। वे 94 वर्ष की थीं। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति इस अडिग कम्युनिस्ट सेनानी की याद को सलाम करती है।

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आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ :
हिन्दोस्तान को उपनिवेशवादी विरासत से आज़ादी की ज़रूरत है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 15 अगस्त, 2022

हिन्दोस्तान आज से 75 साल पहले, उपनिवेशवादी शासन से आज़ाद हुआ था। लेकिन, देश के आर्थिक संबंधों, राज्य के संस्थानों और राजनीतिक प्रक्रिया पर आज भी ब्रिटिश राज की छाप है।

आज़ादी के 75 साल बाद भी हिन्दोस्तानी समाज उपनिवेशवादी शासन की विरासत के बोझ के तले क्यों दबा हुआ है? इस सवाल का जवाब देने के लिए, 1947 में हिन्दोस्तान में और विश्व स्तर पर जो स्थिति थी, उसका तथा उस वर्ष के अगस्त में हुये सत्ता के हस्तांतरण के असली चरित्र का अध्ययन करना आवश्यक है।

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बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों का बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को 8 अगस्त, 2022 को लोकसभा में पेश किया गया। इस विधेयक को संसद के मानसून सत्र के लिए, पहले सूचीबद्ध नहीं किया गया था, इसे अंतिम समय पर जल्दबाजी में पेश किया गया। संसद में कई विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया। इसके बाद और अधिक परामर्श के लिए, इसे ऊर्जा से संबंधित संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया।

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डाक मज़दूरों ने डाक सेवा के निजीकरण का विरोध किया

10 अगस्त, 2022 को तीन लाख से भी अधिक डाक मज़दूरों ने एक दिन की हड़ताल की। डाक मज़दूरों के साथ-साथ, हड़ताल में रेलवे मेल सर्विस (आर.एम.एस.), मेल मोटर सर्विस (एम.एम.एस.) व पोस्ट ऑफिस बैंक सर्विस (पी.ओ.बी.एस.) के मज़दूर, तथा ग्रामीण डाक सेवक भी शामिल थे। हड़ताल पोस्टल ज्वाइंट कौंसिल ऑफ एक्शन (पी.जे.सी.ए.) के झंडे तले आयोजित की गयी थी जो डाक मज़दूरों की अनेक फेडरेशनों का एक संयुक्त मंच है। सभी केन्द्रीय टेªड यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया।

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भारतीय रेल के चालकों ने निजीकरण का विरोध किया

4 अगस्त, 2022 को भारतीय रेल के चालकों ने जंतर-मंतर पर धरना दिया और पूरे दिन का अनशन किया। यह अनशन सरकार की रेल-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के खि़लाफ़ किया गया था। धरने का आयोजन आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) की अगुवाई में किया गया था। भारी बारिश के बावजूद रेल चालकों का धरना चलता रहा और पूरे जोश के साथ निजीकरण के विरोध में नारे बुलंद किये गए।

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रामगढ़ रेलवे स्टेशन पर जन सुविधाओं की मांग को लेकर संघर्ष

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की उप-तहसील रामगढ़ के अंर्तगत आने वाले  रामगढ़ हाल्ट स्टेशन पर अत्यावश्यक जन सुविधाओं की कमी है। स्टेशन पर सुविधाओं को सुनिश्चित करवाने के लिये वहां के आप-पास के गांवों के निवासी  संघर्ष लगातार चल रहे हैं।

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