11 सितंबर के आतंकवादी हमले की 21वीं बरसी पर :
दुनिया पर अपनी दादागिरी क़ायम रखने के लिए अमरीकी-साम्राज्यवाद की अपराधी योजना

ऐसे समय पर, जब अमरीकी नेता ‘‘नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था’’ को बनाए रखने का दिखावा कर रहे हैं, यह बहुत ज़रूरी है कि सर्व सम्मति से स्थापित किये गए नियमों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के मानदंडों का उल्लंघन करने के अमरीका के कारनामों के इतिहास को फिर से देखा जाए। यह भी जानना ज़रूरी है कि अमरीका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन अत्यधिक आक्रामक और सुनियोजित तरीके से, विशेष रूप से 2001 के बाद से, लगातार जारी है।

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अमरीकी साम्राज्यवाद की रणनीति में हिन्दोस्तान की भूमिका

पिछले दो दशकों में, अमरीकी साम्राज्यवादी क्रमशः हिन्दोस्तानी शासक वर्ग के साथ सैन्य-रणनीतिक गठबंधन बनाते जा रहे हैं और उसे मजबूत कर रहे हैं। अमरीका पूरे एशिया को अपने प्रभुत्व में लाने के अपने उद्देश्य को साकार करने के लिए, हिन्दोस्तान के क्षेत्र और लोगों को एशिया के अन्य देशों के लोगों के खि़लाफ़ इस्तेमाल करना चाहता है।

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हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अमरीकी साम्राज्यवाद का बढ़ता सैन्यीकरण

अमरीकी नौसेना ने 29 जून से 4 अगस्त, 2022 के बीच, प्रशांत महासागर में स्थित हवाई द्वीप के तट पर दुनिया के सबसे बड़े समुद्री युद्ध अभ्यास की मेज़बानी की।

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बंटवारे के बाद के पचहत्तर साल :
हिन्दोस्तान के विभाजन के पीछे ब्रिटिश साम्राज्यवादी रणनीति

हिन्दोस्तानी शासक वर्ग ने 1947 में ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा किए गए विभाजन से कोई सबक नहीं सीखा है। अपने संकीर्ण खुदगर्ज़ साम्राज्यवादी उद्देश्यों को हासिल करने के लिए, हमारे देश का शासक वर्ग हिन्दोस्तान की संप्रभुता और इस पूरे क्षेत्र में शांति को ख़तरे में डाल रहा है।

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पंजाब रोडवेज़ के ठेका मज़दूरों ने हड़ताल की

पंजाब रोडवेज़ के ठेका मज़दूर, जिनमें पनबस सेवा और पेप्सू रोड ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन के मज़दूर भी शामिल हैं, उन्होंने नियमित रोज़गार और समान काम के लिये समान वेतन की मांगों को लेकर 14 अगस्त से तीन दिनों की हड़ताल आयोजित की।

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बिहार में सफ़ाई मज़दूर संघर्ष की राह पर

बिहार के सफ़ाई मज़दूर 27 अगस्त, 2022 से राज्यव्यापी हड़ताल पर हैं। इसमें सभी नगरपालिकाओं के मज़दूर हिस्सा ले रहे हैं। पटना नगर निगम में ही करीब 40,000 मज़दूर हड़ताल में शामिल हैं।

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बिलकीस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के खि़लाफ़:
पूरे हिन्दोस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

2002 में बिलकीस बानो के सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों को 15 अगस्त को रिहा कर दिया गया और तभी से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए, देश के सभी क्षेत्रों से महिलाएं और पुरुष विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं।

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बिलकीस बानो मामले के मुजरिमों की रिहाई :
हिन्दोस्तानी राज्य पूरी तरह से सांप्रदायिक है – आइए हम सब मिलकर इंसाफ हासिल करने के अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं!


15 अगस्त को आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर, 2002 के गुजरात जनसंहार के दौरान सामूहिक बलात्कार और हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार अपराधियों में से 11 लोगों को रिहा कर दिया गया। 2008 में उन सभी को एक गर्भवती महिला बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या के जघन्य अपराध के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। उन्होंने उसके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी बलात्कार किया था और उसके तीन साल के बच्चे का सिर पत्थर पर पटककर उसकी हत्या कर दी थी।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी एक छलावा

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर में प्रकाषित “हिन्दोस्तान को उपनिवेषावादी विरासत से आज़ादी की सख़्त जरूरत है” विषयर पर जो लेख अगस्त के अंक में प्रकाषित किया गया है उसके बारे में मैं अपने विचार सांझा करना चाहती हूं।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी के 75 वर्ष पत्र-1

प्रिय संपादक

हिन्दोस्तान में हर साल की तरह इस साल भी स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां ज़ोर-षोर की गयीं। आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आज़ादी के अमृत महोत्सव को मनाया गया और हर घर तिरंगा लहराने की अभियान किया गया।

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