2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों का संघर्ष

2023 में हमारे देश के मज़दूर और किसान पूंजीपति वर्ग के समाज-विरोधी और मज़दूर-विरोधी हमले के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों में सड़कों पर उतरे। विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने न्यूनतम मज़दूरी के अपने अधिकार के लिए, पूंजीपतियों की मर्ज़ी पर छंटनी के खि़लाफ़ और श्रम संहिताओं के खि़लाफ़ एक साथ रैली की। जिन श्रम संहिताओं ने कार्य दिवस को बढ़ा दिया है और मज़दूरों के यूनियन बनाने और अपने अधिकारों के लिए हड़ताल करने के अधिकारों को प्रतिबंधित किया है।

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नागपुर में फैक्ट्री में धमाका :
मज़दूरों की सुरक्षा की घोर उपेक्षा

18 दिसंबर, 2023 को सोमवार के दिन नागपुर जिले की एक फैक्ट्री में हुए, उस विस्फोट में 9 मज़दूरों की मौत हो गई, जिनमें 6 महिलाएं थीं। बताया जा रहा है कि यह विस्फोट सोलर इंडस्ट्री नामक एक निजी कंपनी में विस्फोटक पदार्थों की पैकिंग के दौरान हुआ।

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Nirbhaya_protest

निर्भया के भयानक बलात्कार और हत्याकांड के 11 साल बाद :
महिलाएं अभी भी सबसे बुरी तरह की हिंसा और भेदभाव का शिकार होती हैं

इस साल 16 दिसंबर को उस दिन के 11 साल पूरे हो गए, जिस दिन एक मज़दूर युवती “निर्भया” के साथ दिल्ली में सामूहिक बलात्कार किया गया था और उस पर जानलेवा हमला किया गया था। उस भयानक घटना के खि़लाफ़, दिल्ली और पूरे हिन्दोस्तान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। लोगों ने दोषियों को सज़ा देने की मांग की। उन्होंने राज्य और उसकी पुलिस, जो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है, उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। लोगों ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े सुधार करने के लिए उपयुक्त प्रावधानों की मांग की।

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‌फ़िलिस्तीनी लोगों के क़त्लेआम को बंद करने और उनके लिए इंसाफ़ की मांग को लेकर इंग्लैंड में विरोध प्रदर्शन जारी है
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) के संवाददाता की रिपोर्ट

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) के संवाददाता की रिपोर्ट

फ़िलिस्तीनी लोगों के खि़लाफ़ इज़रायल द्वारा किये जा रहे जनसंहारक युद्ध का विरोध करते हुए, पूरे इंग्लैंड में लोग अपना विरोध प्रदर्शन और भी तेज़ कर रहे हैं।

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गाज़ा में युद्धविराम पर संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को अमरीका ने वीटो किया :
मानवता के ख़िलाफ़ घोर अपराध

संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों द्वारा तत्काल युद्धविराम के लिए दिया गया भारी वोट दुनिया के सभी देशों के अधिकतम लोगों की मांग को दर्शाता है। अमरीका और ब्रिटेन समेत दुनिया के तमाम देशों में लाखों लोग इस मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अमरीका द्वारा अपनाया गया रुख़ पूरी तरह से विश्व जनमत की अवमानना है। यह मानवता के ख़िलाफ़ घोर अपराध है।

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प्याज की अस्थिर क़ीमतों से किसानों व उपभोक्ताओं को नुक़सान

मज़दूरों और किसानों की यह लंबे समय से मांग रही है कि सरकार और उसकी एजेंसियों को सभी कृषि उपज की ख़रीद की गारंटी ऐसी क़ीमत पर देनी चाहिए, जिससे किसान को उसकी लागत पर उचित आमदनी मिले, बजाय इसके कि ख़रीदी की क़ीमत तय करने का काम थोक व्यापारियों पर छोड़ दिया जाए।

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BAE-workers-protest


ब्रिटेन के मज़दूर इज़रायल को हथियारों की बिक्री के ख़िलाफ़ हैं

इज़रायली बमबारी के खि़लाफ़ दुनियाभर के मज़दूरों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन दिखाते हैं कि मज़दूर वर्ग दुनियाभर में जनसंहार और अन्यायों का विरोध कर रहा है।

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2047 में हिन्दोस्तान :
मज़दूरों के अत्यधिक शोषण पर आधारित पूंजीवादी विकास की रणनीति

विज़न इंडिया@2047 नामक एक दस्तावेज़ पर नीति आयोग इन दिनों काम कर रहा है। यह एक लम्बे समय के लिए आर्थिक विकास की रणनीति है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता की 100वीं सालगिरह तक हिन्दोस्तान को एक ऊंची आमदनी वाले देश का दर्ज़ा दिलाना है।

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मानव अधिकारों की सर्वव्यापी घोषणा की 75वीं वर्षगांठ :
मानव अधिकारों की गारंटी के लिए पूंजीवादी और साम्राज्यवादी व्यवस्था को ख़त्म करना होगा

पूंजीवादी शोषण को ख़त्म करके और देश के विशाल संसाधनों को मेहनतकश लोगों के हाथों में लाकर ही, समाज अपने सभी सदस्यों की मांगों को पूरा कर सकता है। केवल ऐसे समाज में ही मानव अधिकारों की आधुनिक परिभाषा की पुष्टि की जा सकती है, जो अधिकार समाज के सभी सदस्यों के लिए सर्वव्यापी हों और जिनका उल्लंघन किसी भी बहाने या किसी भी हालत में न हो सके।

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Babari Masjid Demo-2

बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 31 साल बाद :
हुक्मरान वर्ग की सांप्रदायिक राजनीति के ख़िलाफ़ जुझारू विरोध प्रदर्शन

6 दिसंबर, 2023 को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर संसद के पास एक जुझारू विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।

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