छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की 25 जुलाई से हड़ताल

छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सभी सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 25 से 29 जुलाई तक हड़ताल पर रहेंगे। सरकारी कर्मचारियों के 28 संगठन संयुक्त रूप से हड़ताल की अगुवाई कर रहे हैं।

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Kisan_Mahapanchayat


हनुमानगढ़ की नोहर तहसील क्षेत्र में सिंचाई के पानी के लिये किसानों का संघर्ष जारी

जुलाई के दूसरे सप्ताह में किसानों ने नोहर में महापंचायत आयोजित की जिसमें 3000 से भी अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। जून, 2022 के अखिरी सप्ताह से हनुमानगढ़ की नोहर तहसील क्षेत्र में सिंचाई के पानी के लिये किसानअनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

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Chandigarh_Dharna

बिजली वितरण का निजीकरण – झूठे दावे और वास्तविक उद्देश्य

भारत में बिजली पर वर्ग संघर्ष पर लेखों की श्रृंखला में यह पांचवां लेख है

यदि सरकार बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को संसद में पेश करती है तो लगभग 27 लाख बिजली मज़दूर देश भर में हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार बिजली वितरण के निजीकरण की अपनी योजना को लागू न करे।

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विश्व व्यापार संगठन का 12वां मंत्री स्तरीय सम्मेलन :
सबसे बड़ी साम्राज्यवादी शक्तियां विश्व व्यापार के नियम निर्धारित करती हैं


विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) का 12वां मंत्री स्तरीय सम्मेलन 12-17 जून, 2022 को संपन्न हुआ। विश्व व्यापार संगठन का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय मंत्री स्तरीय सम्मेलन है और यह सम्मेलन आमतौर पर हर दो साल में एक बार होता है।

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इंडिगो एयरलाइंस के कर्मचारियों का अपनी मांगों के लिए संघर्ष

इंडिगो एयरलाइंस के कर्मचारियों के सभी तबकों – फ्लाइट क्रू, तकनीशियन और अन्य ग्राउंड स्टाफ़ – ने अपने अधिकारों का दावा करने के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाया है।

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कोल इंडिया के मज़दूर संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं

हिन्दोस्तान की सरकार ने प्रस्ताव किया है कि 160 भूमिगत ख़दानों को राष्ट्रीय मुद्रीकरण नीति के तहत, निजी कंपनियों को सौंप दिया जायेगा।

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बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 के विरोध में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री को पत्र लिखकर यह मांग की है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 के मसौदे पर, बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों से विस्तृत बात किए बिना, इस बिल को संसद के मानसून सत्र में पेश न किया जाये।

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बिजली उत्पादन का निजीकरण – झूठे दावे और असली उद्देश्य

यह हिन्दोस्तान में बिजलीक्षेत्र में वर्ग संघर्ष पर लेखों की एक श्रृंखला में चौथा लेख है

1992 में स्वतंत्र बिजली उत्पादक (आई.पी.पी.) नीति की शुरुआत के साथ, बिजली का उत्पादन हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीपतियों के लिए खोल दिया गया था। 1992 से पहले, बिजली का उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र में ही किया जाता था ।

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हिन्दोस्तान में बिजली आपूर्ति का ऐतिहासिक विकास – 1947 से 1992

यह हिन्दोस्तान में बिजली पर वर्ग संघर्ष के लेखों की श्रृंखला में तीसरा लेख है

आज हमारे देश में बिजली के उत्पादन और वितरण के संबंध में आधिकारिक स्थिति, हिन्दोस्तानी सरकार द्वारा 1947 में घोषित की गई स्थिति के विपरीत है। उस समय यह घोषणा की गई थी कि राज्य को सभी को और पूरे देश में सस्ती कीमत पर बिजली प्रदान करने की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बिजली क्षेत्र के लिए नीति को पूरी तरह से पलट क्यों दिया गया है? इस प्रश्न का हल ढूंढने के लिए, हमारे देश में पूंजीपति वर्ग और पूंजीवादी व्यवस्था के विकास के संदर्भ में बिजली क्षेत्र के विकास के इतिहास का अध्ययन करना आवश्यक है।

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