मुम्बई में कम्युनिस्ट पाठशाला

हमारी पार्टी के केन्द्रीय समिति के आह्वान पर महाराष्ट्र इलाका समीति ने 12-13 फरवरी को एक कम्युनिस्ट पाठशाला आयोजित की। पार्टी के सदस्यों तथा मित्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बीते अक्तूबर में हुये, पार्टी के चौथे महाअधिवेशन के कुछ अहम विषयों का अध्ययन किया व उन पर चर्चा की।

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आंगनवाड़ी मज़दूरों का जोशीला प्रदर्शन

हजारों आंगनवाड़ी मज़दूरों ने दिल्ली में 24 फरवरी, 2011 को एक जोशीला प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पूरे देश से महिलायें आयी थीं। आंगनवाड़ी मज़दूरों को वेतन के नाम पर बहुत ही कम पैसे मिलते हैं। महिलाओं ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी को इतने कम पैसे में परिवार चलाकर दिखाने की चुनौती दी है। कंगाली की कगार पर रहने को मजबूर करने के लिये आंगनवाड़ी मज़दूरों ने सरकार की निंदा

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आशा और सहिया मज़दूरों ने नियमित होने की मांग रखी

ऑल इंडिया हेल्थ एम्प्लाईज एण्ड वर्कर्स कन्फेडरेशन के झंडे तले देश भर के आशा और सहिया मज़दूर संसद के बाहर 24 फरवरी, 2011 से जमा हैं।

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मजदूरों से साक्षात्कार – 23फरवरी, 2011को संसद पर मजदूरों की रैली में मजदूर एकता लहर के संवाददाता ने साक्षात्कार किया

श्री सौरीबंधु कर, महासचिव, एटक, भुवनेश्वर, ओडिसा

प्र. – इस रैली में क्यों आए हैं?

उ. – ट्रेड यूनियन के संयुक्त बुलावे पर आये हैं।

प्र. – किस तरह के मजदूर ओडिसा से यहां आये हैं?

उ. – आशा मजदूर, एमडीएम वाचिका, आंगनवाड़ी मजदूर, मिड डे मील वर्कर, बीड़ी बनाने वाले मजदूर इत्यादि।

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साम्राज्यवादियों, लिबिया से दूर रहो!

उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में जनता की बगावत के चलते, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी लिबिया में चल रहे गृह युध्द को बहाना बनाकर, वहां सैनिक हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने लिबिया की स्थिति के बारे में धोखाधड़ी और बढ़ा-चढ़ाकर बातें फैलाने की मुहिम छेड़ रखी है, ताकि अपने सैनिक हस्तक्षेप को उचित ठहरा सकें।

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भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 80वें शहादत दिवस पर

नौजवानों के लिए शहीदों का पैगाम – नए हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष करो!

23 मार्च शहीद भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव की बर्तानवी बस्तीवादियों के हाथों शहादत की बरसी का दिन है। हमारे शहीदों का पैगाम कि – हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कुछ मुट्ठीभर शोषक, विदेशी या हिन्दोस्तानी, मेहनतकश लोगों का शोषण करते रहेंगे – हमारे देश के नौजवानों के दिलों में आज भी गूंजता है।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर एन.ए.सी. का नोट

सार्वजनिक खाद्य वितरण को सर्वव्यापी बनाने की मांग से कोई समझौता नहीं!

एन.ए.सी. के कथित उद्देश्य और ठोस प्रस्ताव के बीच में बहुत चौड़ी खाई है। कथित उद्देश्य सभी नागरिकों को खाद्य के अभाव से रक्षा देना है। ठोस प्रस्ताव सिर्फ कुछ ''नाजुक हालत वाले परिवारों'' को रक्षा देने और वह भी सीमित मात्रा में सिर्फ गेहूं, चावल या मोटे अनाज़ देने का है। बाकी आबादी, जिसमें 50 प्रतिशत शहरी आबादी शामिल है, अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा कर पायेगी या नहीं, इस पर खाद्य सुरक्षा कानून कुछ भी नहीं कहता।

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अधिकारों पर हमलों के विरोध में अमरीकी मज़दूरों के प्रदर्शन

आज जब, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के लोगों की बगावत ने मेहनतकश लोगों के दिलों को छू लिया है और साम्राज्यवादी व्यवस्था के संकट को अधिक गहरा बनाया है, और जब लिबिया में गृहयुध्द से पैदा हुये मौकों का फायदा उठा कर साम्राज्यवाद इस इलाके में सम्भलने की कोशिश कर रहा है, अमरीका के मज़दूर अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरोध में बहादुरी से लड़ रहे हैं। अपने संघर्ष से वे अमली तौर पर अमरीका के प्र

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