एयर इंडिया को बचाने के लिये एयर इंडिया की यूनियनें इकट्ठी हुयीं

एयर इंडिया के विमान चालकों, विमान मिस्त्रियों, तल कर्मचारियों व कक्षकर्मियों, विमान इंजीनियरों, रेडियो अफसरों, उड़ान अफसरों, सर्विस इंजीनियरों व अफसरों का प्रतिनिधित्व करने वाली 10 यूनियनें, 9 जून, 2011 को मुंबई में इकट्ठे हुयीं और उन्होंने “कोर कमेटी ऑफ  जोइंट्सफोरम ऑफ एयर इंडिया एंड इंडियन एयरलाईंस” का गठन करने का फैसला लिया। ये यूनियनें हैं आई.सी.पी.ए.

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साक्षात्कारः मारूती-सुजुकी के मजदूरों की जीत

17 जून, 2011 को हरियाणा के गुड़गांव के मानेसर स्थित मारूती-सुजुकी फैक्टरी के प्रबंधकों के शोषण और अत्याचार के खिलाफ़, लगातार 13दिन के संघर्ष के बाद, वहां के मजदूरों ने जीत हासिल की। प्रबंधकों द्वारा 16 जून, 2011 की रात को निलंबित 11 कर्मचारियों को वापस काम पर लेने और मजदूरों को यूनियन बनाने की इजाज़त देने के समझौते के साथ, यह हड़ताल खत्म हो गयी। हमारे संवाददाता ने देखा कि 13दिन के कड

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मुंबई में मेहनतकश लोगों के संगठनों की संयुक्त सभा

17 जून, 2011 को विभिन्न क्षेत्रों के मेहनतकश लोगों के संगठनों ने मुंबई में एक सभा की। इस सभा में विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के बारे में तथा अलग-अलग व्यवसायों और उद्योगों के मज़दूरों की आपसी एकता व सहयोग को मजबूत करने के विषय पर चर्चा हुई।

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यूनान में पूंजीवादी सरकार का संकट और गहराया

15 जून, 2011 को यूनान के प्रधान मंत्री जार्ज पापांडू ने यह घोषणा की कि वे अपने मंत्री मंडल में तब्दीलियां करने और खुद प्रधान मंत्री पद से उतरने को तैयार हैं, अगर उनके सामाजिक खर्चे में कटौती करने के कार्यक्रम को लागू करने के लिये, कनजरवेटिव विपक्ष पार्टी न्यू डेमोक्रेसी (एन.डी.) के साथ समझौता करके, राष्ट्रीय एकता की सरकार बनायी जा सके। यह घोषणा उन्होंने ऐसे समय पर की, जब दसों-हजारों लोगों ने

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पाकिस्तान में जारी अमरीकी ड्रोन विमान हमलों की कड़ी निंदा करें!

20 जून, 2011को अमरीकी ड्रोन विमानों ने उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के एक घर और गाड़ी पर मिसाइल से हमला किया जिसमें कम से कम 11व्यक्तियों की मौत हुई। उसी दिन उत्तरी वज़ीरिस्तान के प्रमुख शहर मिरन शाह पर ड्रोन विमान हमलों के खिलाफ 1000 से भी अधिक आदिवासियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “अमरीका मुर्दाबाद” के नारे लगाये और प्रण लिया कि जब तक मिसाइल हमले रोके नहीं जाते, तब तक वे अ

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भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को कौन नेतृत्व देगा?

संपादक महोदय,

पार्टी के अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट “मजदूरों और किसानों को भ्रष्टाचार खत्म करने के संघर्ष को अगुवाई देनी होगी” बेहद सटीक, शिक्षाप्रद है और इसके लिए मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूँ। बदलते हुए राजनीतिक हालातों का वर्ग संघर्ष के आधार पर विश्लेषण करना, यानि मार्क्सवाद-लेनिनवाद के सिद्धांतों का इस्तेमाल कैसे किया जाना चाहिए, इसका यह बढि़या उदाहरण है।

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मजदूरों और किसानों को भ्रष्टाचार खत्म करने के संघर्ष को अगुवाई देनी होगी

बीते कुछ महीनों से भ्रष्टाचार और उसे कैसे मिटाना है, यह राजनीतिक चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। इजारेदार पूंजीपतियों के नियंत्रण में प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ योद्धा बन गये हैं। तरह-तरह के भ्रष्टाचार-विरोधी योद्धा टपक पड़े हैं। उन पर खूब ध्यान दिया जा रहा है। अगर इजारेदार पूंजीपतियों की मीडिया और भ्रष्टाचार-विरोधी योद्धाओं की बातों पर यकीन किया जाये तो देश के

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हरियाणा के किसान भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ एकजुट हुए

संप्रग सरकार संसद के वर्षा सत्र में भूमि अधिग्रहण पर एक बिल का मसौदा पेश करने वाली है। बीते कई वर्षों से देश भर में किसान बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ लड़ाकू संघर्ष करते आ रहे हैं। किसान अच्छी तरह समझ रहे हैं कि “सार्वजनिक हित” के नाम पर उनसे छीनी गयी भूमि देशी-विदेशी बड़े-बड़े पूंजीपतियों के निजी हितों और अधिकतम मुनाफों के लिए इस्तेमाल की जा रही है। किसान यह समझ रहे हैं कि अ

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हड़ताली मारुती-सुजुकी मजदूरों के साथ भाईचारे का ज़ोरदार प्रदर्शन

हरियाणा के जिला गुड़गांव स्थित मानेसर की अलग-अलग फैक्टरियों के हज़ारों मजदूरों ने 9 जून, 2011 को मानेसर में मारुती-सुजुकी प्लांट के गेट पर हड़ताली मजदूरों के साथ भाईचारा दर्शाने के लिए एक जोशपूर्ण धरना आयोजित किया।

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