पंजाब रोडवेज़ के ठेका मज़दूरों ने हड़ताल की

पंजाब रोडवेज़ के ठेका मज़दूर, जिनमें पनबस सेवा और पेप्सू रोड ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन के मज़दूर भी शामिल हैं, उन्होंने नियमित रोज़गार और समान काम के लिये समान वेतन की मांगों को लेकर 14 अगस्त से तीन दिनों की हड़ताल आयोजित की।

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बिहार में सफ़ाई मज़दूर संघर्ष की राह पर

बिहार के सफ़ाई मज़दूर 27 अगस्त, 2022 से राज्यव्यापी हड़ताल पर हैं। इसमें सभी नगरपालिकाओं के मज़दूर हिस्सा ले रहे हैं। पटना नगर निगम में ही करीब 40,000 मज़दूर हड़ताल में शामिल हैं।

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बिलकीस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के खि़लाफ़:
पूरे हिन्दोस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

2002 में बिलकीस बानो के सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों को 15 अगस्त को रिहा कर दिया गया और तभी से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए, देश के सभी क्षेत्रों से महिलाएं और पुरुष विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं।

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बिलकीस बानो मामले के मुजरिमों की रिहाई :
हिन्दोस्तानी राज्य पूरी तरह से सांप्रदायिक है – आइए हम सब मिलकर इंसाफ हासिल करने के अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं!


15 अगस्त को आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर, 2002 के गुजरात जनसंहार के दौरान सामूहिक बलात्कार और हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार अपराधियों में से 11 लोगों को रिहा कर दिया गया। 2008 में उन सभी को एक गर्भवती महिला बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या के जघन्य अपराध के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। उन्होंने उसके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी बलात्कार किया था और उसके तीन साल के बच्चे का सिर पत्थर पर पटककर उसकी हत्या कर दी थी।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी एक छलावा

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर में प्रकाषित “हिन्दोस्तान को उपनिवेषावादी विरासत से आज़ादी की सख़्त जरूरत है” विषयर पर जो लेख अगस्त के अंक में प्रकाषित किया गया है उसके बारे में मैं अपने विचार सांझा करना चाहती हूं।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी के 75 वर्ष पत्र-1

प्रिय संपादक

हिन्दोस्तान में हर साल की तरह इस साल भी स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां ज़ोर-षोर की गयीं। आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आज़ादी के अमृत महोत्सव को मनाया गया और हर घर तिरंगा लहराने की अभियान किया गया।

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हमारे पाठकों से
आज़ादी के 75 वर्ष पत्र-2

संपादक महोदय,

आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ, लेख को पढ़ने के बाद अगर पीछे मुड़कर देखें तो मन थोड़ा उदास हो जाता है कि शायद 75 वर्ष पहले और उसके बाद भी कई बार देश में ऐसे हालात बने जब देश में कम्युनिस्टों के द्वारा मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित किया जा सकता था।

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हमारे पाठकों से
बिजली एक आवश्यक सामाजिक ज़रूरत

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर को धन्यवाद करता हूं कि आपने बिजली के विषण पर छः भागों में जो लेखों की श्रृंखला प्रस्तुत की है इसमें बहुत की तर्कपूर्ण तरीके से समझाया गया है कि बिजली एक आवश्यक सामाजिक ज़रूरत है।

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कामरेड गुरमीत कौर नन्नर को लाल सलाम

21 अगस्त को, हमारी प्रिय कॉमरेड गुरमीत कौर नन्नर का लंबी बीमारी के बाद, शांतिपूर्वक निधन हो गया। उनकी बेटी इंदिरा और दामाद मैनुएल उनके निधन के समय उनके साथ थे। वे 94 वर्ष की थीं। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति इस अडिग कम्युनिस्ट सेनानी की याद को सलाम करती है।

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आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ :
हिन्दोस्तान को उपनिवेशवादी विरासत से आज़ादी की ज़रूरत है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 15 अगस्त, 2022

हिन्दोस्तान आज से 75 साल पहले, उपनिवेशवादी शासन से आज़ाद हुआ था। लेकिन, देश के आर्थिक संबंधों, राज्य के संस्थानों और राजनीतिक प्रक्रिया पर आज भी ब्रिटिश राज की छाप है।

आज़ादी के 75 साल बाद भी हिन्दोस्तानी समाज उपनिवेशवादी शासन की विरासत के बोझ के तले क्यों दबा हुआ है? इस सवाल का जवाब देने के लिए, 1947 में हिन्दोस्तान में और विश्व स्तर पर जो स्थिति थी, उसका तथा उस वर्ष के अगस्त में हुये सत्ता के हस्तांतरण के असली चरित्र का अध्ययन करना आवश्यक है।

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