पत्रकारों पर हमले की निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का बयान, 6 अक्टूबर, 2023

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इन छापों और गिरफ़्तारियों की निंदा करती है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर ज़बरदस्त हमला मानती है। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी कठोर यू.ए.पी.ए. के प्रयोग की निंदा करती है। यू.ए.पी.ए. क़ानून सिर्फ़ यह सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों को जमानत की संभावना के बिना, अनिश्चित काल तक जेल में बंद रखा जा सके। पत्रकारों के ख़िलाफ़ छापेमारी, गिरफ़्तारी और यू.ए.पी.ए. के इस्तेमाल का उद्देश्य उन सभी की आवाज़ को दबाना है, जो सत्ता से असहमति जताने की हिम्मत करते हैं।

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शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर राजस्थान में कार्यक्रम

हनुमानगढ़ में विचार गोष्ठी

27 सितम्बर, 2023 को राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की उप-तहसील रामगढ़ में भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी हुई। इसके बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय था – वर्तमान में भगतसिंह के विचारों की प्रासंगिकता। भगत सिंह मेमोरियल शिक्षण समिति की अगुवाई में इस कार्यक्रम को आयोजित किया गया था।

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रेल चालकों का द्विवार्षिक अधिवेशन :
रेल दुर्घटनाओं पर गोष्ठी

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

27 सितंबर, 2023 को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) के मुरादाबाद मंडल का द्विवार्षिक अधिवेशन आयोजित किया गया। रेलगाड़ियों के पटरियों से उतर जाने की बढ़ती दुर्घटनाओं और लाल सिग्नल को पास कर जाना (एस.पी.ए.डी.-स्पैड) को केंन्द्र में रखते हुये ए.आई.एल.आर.एस.ए. ने इस अधिवेशन का विषय रखा था – ‘सेफ्टी सेमीनार ऑन मिशन शून्य स्पैड एवं द्विवर्षीय मंडल कान्फ्रेस’।

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हमारे पाठकों से
बीमा – ‘डर’ का व्यापार

संपादक महोदय, मज़दूर एकता लहर के अंक सितंबर 1-15, 2023 में प्रकाशित लेख ‘फ़सल बीमा के ज़रिए किसानों की पूंजीवादी लूट’ को पढ़ा। यह लेख काफ़ी जानकारी भरा है। यह केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा फ़सल बीमा के ज़रिए पूंजीपतियों द्वारा किसानों की लूट की सच्चाई को सामने लाता है। जब मैं इस लेख को पढ़ रहा था, तब यह

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पंजाब और हरियाणा के किसान अपने दावे पर दृढ़ता से डटे हैं

पंजाब और हरियाणा के किसान अपने दावों पर ज़ोर देने के लिए विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं।

पंजाब के उन्नीस किसान संगठनों ने 28 सितंबर से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय रेल रोको विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। वे हाल की बाढ़ से हुए नुक़सान के लिए मुआवज़े, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) की क़ानूनी गारंटी और क़र्ज़ माफ़ी की मांग कर रहे हैं।

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टमाटर की फ़सल पर एम.एस.पी. न होने का परिणाम :
किसानों को अपनी फ़सल को नष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा

यह एक विडंबना ही है कि जब उत्पादकों को अपनी फ़सल नष्ट करनी पड़ती है क्योंकि उन्हें अपनी फ़सल की लागत को हासिल करने के लिए क़ीमतें नहीं मिल पाती हैं। आज महाराष्ट्र के टमाटर उत्पादकों को इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

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नौसेना के ठेका मज़दूरों की समस्यायें

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

नौसेना के दक्षिणी कमान के तहत भारतीय नौसेना की केरल के कोच्ची और कन्नूर में स्थित दो छावनियों में देश के अलग-अलग इलाकों से विभिन्न ठेकेदारों के ज़रिये हजारों ठेका मज़दूर काम कर रहे हैं। जिन्हें दोनों नौसैनिक छावनियों में हाउसकीपिंग, सफाई व अन्य सेवाएं देने के लिए भर्ती किया जाता है। उनमें से कई तो बीस साल तक काम करने के बाद भी ठेका मज़दूर ही बने हुये हैं!

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काम की बिगड़ती स्थितियों के खि़लाफ़ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का संघर्ष

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन (डब्ल्यू.बी.एम.एस.आर.यू.) का 19वां राज्य सम्मेलन हाल ही में 8 से 10 सितंबर 2023 के बीच सिलीगुड़ी में आयोजित किया गया था। पश्चिम बंगाल में डब्ल्यू.बी.एम.एस.आर.यू. मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स (एम.आर.) का सबसे बड़ी यूनियन है और इसके लगभग 22,000 सदस्य हैं। इस क्षेत्र में मज़दूरों की बिगड़ती कामकाजी स्थितियों पर इस सम्मेलन में चर्चा की गई।

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जे.एन.यू. में ठेका मज़दूरों ने ”सम्मान रैली“ निकाली

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जे.एन.यू.) के ठेका मज़दूरों के अधिकारों का क्रूरता से उल्लंघन हो रहा है। जैसे कि वेतन भुगतान में देरी, जाति के आधार भेदभाव सहित विभिन्न प्रकार के भेदभाव और नौकरी से निकाले जाने का लगातार ख़तरा।

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बंगाल में परिवहन मज़दूर अपनी मांगों पर एकजुट

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

हिन्दोस्तानी राज्य मज़दूर वर्ग और मेहनतकश जनता पर लगातार हमले कर रहा है। राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण करने तथा निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों में नौकरियों को ठेके पर करवाने के क़दम उठा रहा है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारें पूंजीपति मालिकों को मज़दूरों का शोषण बढ़ाने की खुली छूट देने के लिए मज़दूर-विरोधी क़ानून पारित कर रही हैं।

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