राजनीतिक व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव की ज़रूरत

संसदीय लोकतंत्र की पुरानी और अन्यायपूर्ण व्यवस्था जो केवल पूंजीपतियों के लिए लोकतंत्र है, को सर्वहारा लोकतंत्र की एक बेहतर व्यवस्था में बदल दिया जाना चाहिए, जो मेहनतकश लोगों का लोकतंत्र होगा।

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युवाओं के सामने गंभीर संकट

देशभर में लाखों युवाओं का गुस्सा और हताशा सड़कों पर उतर आई है। देश के कई हिस्सों में युवा बड़ी संख्या में आंदोलन कर रहे हैं, क्योंकि शिक्षा और सुरक्षित आजीविका की उनकी तमन्नाओं को सुनियोजित तरीके़ से कुचला जा रहा है।

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भारी रिक्तियों के कारण भारतीय रेलवे के ट्रैक मेंटेनर्स की अमानवीय कार्य स्थिति

कामगार एकता कमेटी संवाददाता की रिपोर्ट

दक्षिण रेलवे के लोको-पायलटों के आंदोलन के चलते, लोको-पायलटों की बड़ी संख्या में रिक्तियां एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। आंदोलन ने भारतीय रेलवे पर भारी दबाव बनाया है, जिसके परिणामस्वरूप अभी हाल ही में रेलवे बोर्ड ने घोषणा की है कि सहायक लोको-पायलटों के 16,000 से अधिक रिक्त पदों को भरा जाएगा।

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आईटी क्षेत्र के 20 लाख मज़दूरों का शोषण लगातार जारी है

10 जून को कर्नाटक सरकार ने एक बार फिर आईटी और आईटीईएस कंपनियों को औद्योगिक स्थायी आदेश अधिनियम 1946 से अगले पांच साल के लिए छूट दे दी है। यह अधिनियम मज़दूरों को मनमाने तरीके से छटनी, काम के घंटे बढ़ाने, यौन उत्पीड़न आदि से सुरक्षा प्रदान करने के साथ शिकायत निवारण के लिए तंत्र प्रदान करता है।

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हाथरस त्रासदी

कम्युनिस्ट गदर पार्टी इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। हम नहीं मान सकते कि ऐसी त्रासदियों से बचा नहीं जा सकता है। इसके लिये जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए।

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अमरीका और उसके सहयोगी यूरोप में चल रहे युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं

अमरीका और उसके नाटो सहयोगी लगातार यह प्रचार कर रहे हैं कि यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया जाए। सच्चाई तो यह है कि यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के लिए अमरीका और उसके नाटो सहयोगी ही ज़िम्मेदार हैं।

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फ़र्ज़ी मुक़दमे के आधार पर मज़दूरों के खि़लाफ़ कार्यवाही का ज़ोरदार विरोध

25 जून, 2024 को नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड रेजिडेंट कमीश्नर के कार्यालय पर मज़दूरों का एक ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।

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राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की 49वीं बरसी

49 साल पहले 25 जून को, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के पीछे असली उद्देश्य और उससे हिन्दोस्तानी राज्य तथा उसके लोकतंत्र के वास्तविक चरित्र के बारे में जो स्पष्ट हुआ, उसे आज समझने की ज़रूरत है, ताकि अपने अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष को आगे बढ़ाया जा सके।

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लोको पायलटों का जुझारू संघर्ष

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) की अगुवाई में दक्षिण रेलवे के लोको पायलट अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। उनका यह संघर्ष पिछले 26 दिनों से लगातार जारी है।

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