प्रसार भारती में अनिश्चितकालीन हड़ताल की योजना

23 नवम्बर की सुबह से दूरदर्शन केन्द्र और ऑल इंडिया रेडियो के देशभर के 23 नवम्बर की सुबह से दूरदर्शन केन्द्र और ऑल इंडिया रेडियो के देशभर के 38,000 मजदूरों ने 48 घंटे की हड़ताल की, जिसके कारण इन दोनों सरकारी दूरसंचार केन्द्रों की सेवायें पूरी तरह ठप्प रहीं।

हड़ताल के अंत में जब यह पता चला कि सरकार मजदूरों के यूनियनों के साथ उनकी मांगों को लेकर चर्चा न करने पर अड़ी हुई है, तब यूनियनों ने अपने संघर्ष को तेज़ करने की योजनायें घोषित कीं।

13 दिसम्बर से यूनियन फिर से 72 घंटे की हड़ताल करेंगे और उसके अंत में अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो दूरदर्शन केन्द्रों और ऑलइंडिया रेडियो की पूरी नेटवर्क ठप्प हो जायेगी, जो कि प्रसार भारती के अफसरों के अनुसार इससे पहले दुनिया में कहीं भी नहीं हुआ है।

वर्तमान हड़ताल का आह्वान नेशनल फैडरेशन ऑफ आकशवाणी एण्ड दूरदर्शन एम्प्लाईज ने किया है। इस हड़ताल के कारण पूरे देश में ऑलइंडिया रेडियो तथा दूरदर्शन के सभी 1,800 स्टेशनों की सेवाएं प्रभावित हुईं और इनके नियमित प्रोग्राम बंद हो गये। कई राज्यों में दूरदर्शन के ऊंचे और कम पावर वाले ट्रांसमीटर बंद रहे, ऐसा एक यूनियन कार्यकर्ता ने बताया।

इस हड़ताल के कारण पूर्वोत्तार राज्यों, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्यप्रदेश, केरल इत्यादि में ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन की सेवायें ठप्प रहीं। दिल्ली में कर्मचारियों ने अपने कार्यालयों में प्रवेश नहीं किया। सिर्फ पहले से रिकार्ड किये गये कार्यक्रम ही दिखाये गये। कई राज्यों में ऑल इंडिया रेडिया के स्टेशन बंद रहे, जो कि स्वतंत्र हिन्दोस्तान में पहली बार हुआ है।

मजदूरों की मुख्य मांग यह है कि प्रसार भारती अधिनियम को वापस लिया जाये। यूनियन के अनुसार, इस अधिनियम और उसके प्रावधानों की वजह से ऑलइंडिया रेडियो व दूरदर्शन के कर्मचारियों के काम पर बहुत बुरा असर पड़ा है। कर्मचारियों को वेतन देने में देर की जाती है, तकनीकी यंत्रों की देख-रेख ठीक से नहीं होती और कर्मचारियों की काम की हालतें भी बहुत बिगड़ गयी हैं, इनके कारण इस सरकारी रेडियो और टीवी चैनल के लिये ज्यादा समस्यायें पैदा हुई हैं, न कि कोई समाधान। 1997 में पास किया गया प्रसार भारती अधिनियम दूरदर्शन और ऑलइंडिया रेडियो के मजदूरों के गुस्से का शिकार बना हुआ है।

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