दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया

दिल्ली नगर निगम ने कई महीनों से अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। जिनको इस वर्ष जनवरी से वेतन नहीं मिला है उनमें डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य सेवा मज़दूर, सफाई मज़दूर, पेरा-मेडिकल मज़दूर, इंजीनियरिंग मज़दूर और शिक्षक शामिल हैं।

इस वर्ष जनवरी से लेकर 7 मई तक, अकेले उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 58,000 कर्मचारियों को वेतन तथा 24,000 पेंशन भोगियों को पेंशन नहीं मिले हैं। केवल सफाई कर्मचारियों को फरवरी में वेतन दिया गया था लेकिन उसके बाद वेतन उन्हें भी नहीं मिला है।

इस दौरान हर एक क्षेत्र के मज़दूर, जिनमें शिक्षक और इंजीनियरिंग मज़दूर भी शामिल हैं, कोविड-19 से जुड़ी किसी न किसी ड्यूटी में जुटे हुए हैं। इंसेंटिव की तो बात ही छोड़ो, बिना वेतन के ही ये मज़दूर चैबीसों घंटे काम कर रहे हैं ताकि समाज के बाकी लोग इस महामारी के दौरान सुरक्षित रहें।

सफाई मज़दूर संगठन और एमसीडी टीचर्स एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के सामने मांग रखी है कि वे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान हो।

यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली नगर निगम के मज़दूरों को उनके वेतन के अधिकार से वंचित रखा गया है। जून 2015, फिर मई 2017 और फिर से मई 2019 में लगातार 2-3 महीनों के लिए  मज़दूरों को उनका वेतन नहीं दिया गया था। हर बार मज़दूरों के संघर्ष और आंदोलनों के बाद ही इन समस्याओं से छुटकारा पाया गया, लेकिन ऐसा अब हर साल होता है। जब भी यह समस्या खड़ी होती है तब नगर निगम चलाने वाली राजनीतिक पार्टी तथा दिल्ली की राज्य सरकार की सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी एक दूसरे पर आरोप लगाने का खेल शुरू कर देते हैं।

सफाई मज़दूर और शिक्षक समाज में ज़रूरी सेवाओं का काम करते हैं। और इसी बात का फ़ायदा उठाकर सरकार उन पर दबाव डालती है कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखने के लिए आंदोलन न करें। किसी भी हालत में इन मज़दूरों को उनके वेतन से वंचित रखना मान्य नहीं है। दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार को तुरंत एक दूसरे पर आरोप लगाने के खेल को बंद करके तथा एक साथ बैठकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

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