क्रांति कहती सीना तान! (कविता)

हिन्दोस्तानी मजदूरों, महिलाओं और किसानों,
बेकारी से दबे हुए, नौजवानों कहना मानों

आज तुम्हारे सामने सबसे पवित्र काम,
देश में अपने मजदूर क्रांति को देना अंजाम।

पर कुछ मजदूरों का भ्रम है कि मालिकों की पूंजी उनकी है,
काफी है रोजी देते हैं, ए भी उनकी मरजी है।

हिन्दोस्तानी मजदूरों, महिलाओं और किसानों,
बेकारी से दबे हुए, नौजवानों कहना मानों

आज तुम्हारे सामने सबसे पवित्र काम,
देश में अपने मजदूर क्रांति को देना अंजाम।

पर कुछ मजदूरों का भ्रम है कि मालिकों की पूंजी उनकी है,
काफी है रोजी देते हैं, ए भी उनकी मरजी है।

क्या होगा जब काम न दंेगे, हम भूखे मर जायेंगे,
मैं कहता हूं क्या होगा, जब इनका गला दवायेंगे।

क्रांति द्वारा एक जगह जब उनकी कबर सजायेंगे,
मक्कारी का सही नतीजा, उनको हम सिखलाये।

कुछ मजदूरों का भ्रम है कि , ओ भी मेहनत करते हैं,
ज्यादा हिस्सा उन्हें चाहिए, इसी लिए तो मरते हैं।

मैं कहता हूं पाकिट मार भी, दिन भर मेहनत करता है,
बड़े तजुर्बे से पाकिट पर, वार हमेशा करता है।

पर हाथ में मिलते ही उसकी तो, जान आप ले लेते है हो,
हाथ पांव को तोड़ डालते, साफ वहीं कर देते हो।

डाकू भी डाका डाले तो वो भी मेहनत करता है,
लूटमार के ले जाता, फिर वो भी मेहनत करता है।

पर हाथ में मिलते ही उसकी तो, फांसी ही हो जाती है,
तुरंत उसकी लाश लटकती, तख्ते पर दिखलाती है।

खूनी भी एक खून के खातिर, काफी मेहनत करता है,
देख ना लेवै कोई मुझे, ओ भी बिचारा डरता है।

पर माफ किया ना जाता उसको, सजा सुनाई जाती है,
उसके भी शरीर को क्यों, शूली लटकाई जाती है।

ओ भी मेहनत करता हैं, क्यों माफ किया ना जाता है,
समाज का कानून उसे तो, फांसी पर लटकाता है।

खटमल भी मेहनत करता है चोरी से खूं पीता है,
छुप-छुप के ही रहता है तकिए के अंदर जीता है।

पर हाथ में मिलते ही उसकी तो, जान आप ले लेतो हो,
क्यों ना जीने देते हो, ना चैन से रहले देते हो।

कभी-कभी खोसा काटे, उसको कहते फांसी देना है,
मालिक हर दिन खोसा काटे, कहते माफी कर देना हैं।

सोचो ऐ मजदूर साथियों, कितनी भूल तुम्हारी है,
सारे मालिकों की सम्पत्ती, प्यारे दोस्त तुम्हारी है।

उसे छीनने में ना कोई दोष तुम्हें लग जायेगा,
ना ही अल्ला रुठेगा, ना बिष्णू सजा सुनायेगा।

पूंजीवाद ही समाज अंदर कैंसर की बीमारी है,
इसी के कारण समाज अंदर, भूख गरीबी सारी है।

समाज को जिंदा रखना तो, इन्हें खतम करना ही होगा,
भारत के सरमायदार की, छाती पर चढ़ना ही होगा।

इनको मार लाश के ऊपर, नाचेंगे हम गयेंगे,
सच्चा समाजबाद बनेगा, पूंजीवाद मिटायेंगे।

दूसरे बिना मजदूर साथियों, कभी भी हम आजाद न होंगे,
भूखे गरीब और बीमारी, इसके सही इलाजत होंगें।

हिन्दोस्तान आजाद बनेगा, क्रांति कहती सीनातान,
देश वासियों जल्दी होगा, लाल किले पर लाल निशान।

कांग्रेस, बी.जे.पी. और मोर्चा सरकार मुर्दाबाद,
सरमायदार मुर्दाबाद, इंकलाब जिंदाबाद।

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