तेल कर्मचारियों को कुचलने की कोशिश की निंदा करें!

सार्वजनिक तेल क्षेत्र के कर्मचारियों की 3दिन की लगभग संपूर्ण हड़ताल की वजह से पूरे देशभर का सड़क परिवहन ठप्प होने वाला था। सरकार ने कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया या बर्खास्त किया तथा सभी को नौकरी से निकालने की धमकी दे कर, 9जनवरी की शाम तक कर्मचारियों को अपना आंदोलन खत्म करने पर मजबूर किया।

सार्वजनिक तेल क्षेत्र के कर्मचारियों की 3दिन की लगभग संपूर्ण हड़ताल की वजह से पूरे देशभर का सड़क परिवहन ठप्प होने वाला था। सरकार ने कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया या बर्खास्त किया तथा सभी को नौकरी से निकालने की धमकी दे कर, 9जनवरी की शाम तक कर्मचारियों को अपना आंदोलन खत्म करने पर मजबूर किया।

अपने वेतन में वृध्दि की मांग को लेकर, 7जनवरी से सार्वजनिक क्षेत्र की 13तेल कंपनियों के कर्मचारी अनिश्चित हड़ताल पर उतरे थे। ऑयल सेक्टर ऑफिसर्स एसोसिएशन (ओ.एस.ओ.ए.) के नेतृत्व में, उच्च न्यायालय द्वारा हड़ताल 'गैर कानूनी' घोषित किये जाने को ठुकराते हुये, कर्मचारियों ने हड़ताल की। इससे पहले कई महिनों से पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने कर्मचारियों ने वेतनवृध्दि की मांग रखी तथा छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से अपना असंतोष जाहिर किया क्योंकि इसमें उनको अपने प्रति नाइंसाफी लगी। उन कर्मचारियों की इन मागों को पूरा करने के बजाय, केन्द्र सरकार ने एक तरफ उन्हें डराना धमकाना जारी किया तथा दूसरी तरफ सारे प्रसार माध्यमों में उन्हें, 'गैर जिम्मेदार' तथा 'पूरे देश को फिरौती पर रखने वाले', इस तरह के लांछन लगाना शुरु किये। सरमायदारों की सरकार हमेशा अलग-अलग मेहनतकश तबको को एक दूसरे के खिलाफ़ भड़का कर, सभी के संघर्षों को कुचलने का तरीका अपनाती है। मेहनतकश वर्ग के सभी तबकों के मज़दूरों को सरमायदारी सरकार के इस दांव-पेच को समझना चाहिये और अपनी लड़ाकू एकता को और भी मज़बूत करना चाहिये।

गृहमंत्री चिदंबरम ने 9जनवरी को ही प्रसार-माध्यमों को बताया था कि केन्द्र सरकार तेल कर्मियों के साथ 'सख्ती से पेश आयेगी' ।

केन्द्र सरकार ने आवश्यक सेवा कानून (एस्मा) का उपयोग करके, 200से ज्यादा हड़ताली कर्मचारियों को हिरासत में लिया और उन्हें लिखित माफी देने के लिये मजबूर किया। हरियाणा, महाराष्ट्र, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, तथा गोवा राज्यों में ज्यादातर तेल-शोधन तथा पंपिंग डिपो हैं। उन राज्यों में एस्मा जारी करके सरकार ने दमन शुरू किया। सभी 45हजार हड़ताली कर्मचारियों को जेल में डाला जायेगा तथा नौकरी से निकाला जायेगा, ऐसा केन्द्र सरकार ने घोषित किया।

ओ.एन.जी.सी. ने 64, इंडियन ऑयल तथा गेल ने तीन-तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। हड़ताली कर्मचारियों को डराने के लिये, रिफायनरीज और पंपिंग स्टेशनों में फौज तैनात की गई।

ऑयल सेक्टर ऑफिसर्स एसोसिएशन के दो पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में लाया गया। फिर उन पर यह दबाव डाला गया कि उन्हें तभी जमानत पर छोड़ा जायेगा, जब वे सभी कर्मचारियों को ई-मेल द्वारा हड़ताल में सहभागी न होने को सलाह देंगे। फिर पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव आर.एस. पांडे ने चेतावनी दी की 'सभी हड़ताली कर्मचारी तुरंत काम पर आ जायें अन्यथा एस्मा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उन्हें कैद किया जायेगा' ।

'पाकिस्तान से जब बाहरी शक्तियों का दबाव है, ऐसे वक्त पर हड़ताल घोषित करना गैर जिम्मेदारी बर्ताव है' ऐसा पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवरा ने कहा। सरकार ने ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया है कि नौकरी से निकाले गये या निलम्बित किये गये कर्मचारियों को फिर काम पर लिया जायेगा या 'एस्मा' के तहत हिरासत में लिये कर्मचारियों को रिहा किया जायेगा।

सार्वजनिक तेल क्षेत्र के कर्मचारियों के संघर्ष को जिस तरह डरा धमकाकर सरकार ने तोड़ा है, उसकी मज़दूर एकता लहर भर्त्सना करती है। मेहनतकश लोगों के किसी भी संघर्ष को कुचलने के लिये, बड़े सरमायदारों की सरकार किस हद तक कड़े कदम उठा सकती है, यह सभी मज़दूरों को इससे स्पष्ट होना चाहिये। मज़दूर एकता लहर सभी ट्रेड यूनियनों तथा मज़दूर वर्ग संगठनों से आह्वान करती है कि तेल क्षेत्र के कर्मचारियों का समर्थन करे तथा सभी कैद कर्मचारियों को रिहा करने के लिये, काम से निकाले गये कर्मचारियों को फिर काम पर लेने के लिये, तथा उनकी सभी मांगों को मंजूर करने के लिये, सरकार पर जबर्दस्त दबाव डालें और उसे बाध्य करें।

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