भारतीय खाद्य निगम के मज़दूरों का संघर्ष

पूरे देश की आर्थिक सहायता प्राप्त सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये खाद्यान्नों के भंडारन व वितरण के लिये जिम्मेदार, भारतीय खाद्य निगम, के 2000 मज़दूर प्रबंधन के खिलाफ़ हड़ताल पर उतर रहे हैं। ये मज़दूर इस कंपनी के गोदामों व भंडारों में माल लादने, निकालने, चढ़ाने, साफ करने और झाडू लगाने का काम करते हैं। करीब दो सप्ताह पहले उन्होंने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की जिसमें हर एक व्यक्ति एक-एक दिन के लिये उपवा

पूरे देश की आर्थिक सहायता प्राप्त सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये खाद्यान्नों के भंडारन व वितरण के लिये जिम्मेदार, भारतीय खाद्य निगम, के 2000 मज़दूर प्रबंधन के खिलाफ़ हड़ताल पर उतर रहे हैं। ये मज़दूर इस कंपनी के गोदामों व भंडारों में माल लादने, निकालने, चढ़ाने, साफ करने और झाडू लगाने का काम करते हैं। करीब दो सप्ताह पहले उन्होंने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की जिसमें हर एक व्यक्ति एक-एक दिन के लिये उपवास रखता है। उनकी मांग है कि नौकरी स्थायी होनी चाहिये और वेतन में बढ़ोतरी होनी चाहिये। वर्तमान में उन्हें ठेकेदार नौकरी दिलाता है और उनकी नौकरी की कोई सुनिश्चिती नहीं होती है और न ही उन्हें कोई लाभकारी भत्ता मिलता है। उनका वेतन मासिक 5000 से 10000 रु. है। मज़दूरों को यह मंजूर नहीं है कि उनके परिवार भूखे सोयें जबकि वे पूरे देश के लिये खाद्यान्नों का इंतजाम करते हैं।

मज़दूरों को इस बात पर भी रोष है कि प्रबंधन बहुत बड़ी मात्रा में खाद्यान्नों को नष्ट होने देता है जिससे सैकड़ों-करोड़ रुपयों का नुकसान होता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती तो वे अपना आंदोलन देशव्यापी बनायेंगे और खाद्य निगम के पूरे 80,000 मज़दूर इसमें शामिल हो जायेंगे।

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