साम्राज्यवादी मंसूबों को हासिल करने की दिशा में फौजीकरण

संपादक महोदय,

संपादक महोदय,

मजदूर एकता लहर के 1-15 फरवरी, 2010 के अंक में “विश्व स्तरीय साम्राज्यवादी ताकत का दर्जा हासिल करने के लिये फौजीकरण” इस जानकारी से परिपूर्ण और सामयिक लेख छापने के लिये मैं हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आभार प्रकट करता हूँ। इस लेख में कई महत्वपूर्ण और रोचक मसलों पर प्रकाश डाला गया है। सबसे पहला मसला यह है कि हिन्दोस्तान एक उभरती हुई साम्राज्यवादी ताकत है और हर दूसरी साम्राज्यवादी शक्ति और घृणित ताकत की तरह अपनी ताकत की नुमाईश कर रहा है। बाहरी ताकत से खतरा होने के बहाने वह खुद को हथियारों से लैस कर रहा है, जिससे वह देश के भीतर लोगों की हर तरह की मांग को दबा सकता है, वह चाहे आदिवासी हो या फिर तमाम राष्ट्रों के मेहनतकश लोगों की मांग हो। इस बहाने से राष्ट्रीय संसाधनों का बड़ा हिस्सा सरमायदारों के तबकों के हितों के लिये लूटा जाता है। पूंजीपतियों की आर्थिक गतिविधियों का निरंतर विस्तार करना तभी संभव है जब देश साम्राज्यवादी ताकत है।

अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को हासिल करने के लिये, उसके लिये एक फौजीकृत राजनीति चलाना जरूरी हो जाता है जिसके लिये मेहनतकश लोगों के खून पसीने का पैसा इस्तेमाल किया जाता है। लोगों को लूट कर ही सरमायदार अपने इस रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे हालातों के चलते इस इलाके के लोगों को कई विनाशकारी जंग का सामना करना पड़ा है और यदि सरमायदारों का रास्ता नहीं रोका गया तो ऐसा और कई बार हो सकता है।

सभी जिम्मेदार कम्युनिस्टों को इस क्षेत्र के तमाम लोगों के साथ एकता बनानी होगी, जो शांति और इज्जत की जिन्दगी के लिये तरस रहे हैं। गहरे शोधकार्य पर आधारित इस लेख में इस मसले को केन्द्र बिंदु में ला दिया है। इस इलाके के सभी लोगों को शांति के लिये जंग के विरोध में एकता बनानी होगी।

आपका

एस. नायर, कोच्ची

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