यूरोप में आर्थिक संकट

यूरोज़ोन के चार देषों – ग्रीस, स्पेन, पुर्तगाल और इताली – की अर्थव्यवस्थायें घोर संकट में हैं। बाकी यूरोपीय देशों पर भी इस संकट का असर होने की आशंका है। यूरो का मूल्य डालर की तुलना में गिर गया है। सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों से जाना जाता है कि 2009के आखिरी तीन महीनों में इन चारों देषों की अर्थव्यवस्थाओं में षून्य या नकारात्मक संवर्धन हुआ है।

यूरोज़ोन के चार देषों – ग्रीस, स्पेन, पुर्तगाल और इताली – की अर्थव्यवस्थायें घोर संकट में हैं। बाकी यूरोपीय देशों पर भी इस संकट का असर होने की आशंका है। यूरो का मूल्य डालर की तुलना में गिर गया है। सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों से जाना जाता है कि 2009के आखिरी तीन महीनों में इन चारों देषों की अर्थव्यवस्थाओं में षून्य या नकारात्मक संवर्धन हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार, ग्रीस में बजट का घाटा 12.7प्रतिशत है, जो कि मान्य यूरो सीमा के चार गुना से भी ज्यादा है। 2001में यूरोज़ोन में प्रवेश करने के बाद, ग्रीस के लोगों को नये-नये घर, मोटर गाड़ी और दूसरी चीजें उधार पर खरीदने को प्रोत्साहित किया गया, जब कि इससे पहले उधार पर खरीदने का उनका रिवाज़ ही नहीं था। ग्रीस की सरकार ने भी अंतर्राष्ट्रीय वित्त पूंजी से भारी उधार लिया। उनकी अर्थव्यवस्था में खूब तरक्की हुई, जो 2004के ओलिंपिक खेल तक चली। ओलिंपिक खेल की वजह से ग्रीस की सरकार दिवालिया हो गई। उसके बाद, कुछ वर्षों तक पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था के संवर्धन के कारण, ग्रीस की खराब आर्थिक स्थिति दुनिया की नज़रों से छिपी रही। अब यूरोपीय संघ ग्रीस की सरकार से नौकरियों की कटौती, वेतन की कटौती, टैक्सों में वृद्धि, इत्यादि जैसे कदमों की मांग कर रहा है।

यूरोपीय आयोग, यूरोपीय केन्द्रीय बैंक और जर्मन नेता एंजेला मरकेल ने ग्रीस की आर्थिक दुर्दशा की हालत में ग्रीस की नवनिर्वाचित समाजवादी सरकार को आदेश दिया है कि मजदूर वर्ग और बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों पर भारी आर्थिक हमले किये जाएं। ग्रीस के प्रधान मंत्री जोर्ज पापांड्रू के पास इन आदेशों का पालन करने के सिवाय कोई और चारा नहीं है।

पापांड्रू ने यह शिकायत की कि यूरोपीय संघ उनके देश को संकट से निकालने में कोई मदद नहीं कर रहा है। “ग्रीस कोई आर्थिक या राजनीतिक महाशक्ति नहीं है, जो अकेली ही इस हालत से निपट सकती है”, पापांड्रू ने कहा। उन्होंने कहा कि यूरोज़ोन की पहली बड़ी परीक्षा में “ग्रीस को यूरोप और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों के बीच की लड़ाई में बलि का बकरा बनाया जा रहा है।” उन्होंने यूरोपीय संघ के दूसरे सदस्यों की आलोचना की, कि वे “ हमारे देश के बारे में मिले-जुले संदेश भेज रहे हैं … कि यह मनोभावना पैदा की जा रही है कि हमारी अर्थव्यवस्था तबाह होने जा रही है, जिसकी वजह से यह खुद ही तबाह हो सकती है।”

स्पेन में, यूरोज़ोन में शामिल होने के बाद के वर्षों में अर्थव्यवस्था खूब तेज़ी से बढ़ी। परन्तु हाल के वैश्विक वित्त संकट के बाद से वहां जो संकट आया है, उससे स्पेन की जनता हैरान है। स्पेन में बेरोजगारी की दर 19.5प्रतिशत हो गई है, जो कि यूरोपीय संघ की औसतन बेरोजगारी दर का दुगुना है। आज वहां 40लाख लोग बेरोजगार हैं। दस लाख से अधिक घरों में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है। स्पेन की अर्थव्यवस्था एकमात्र मुख्य वैश्विक अर्थव्यवस्था है जहां अभी भी मंदी जारी है, जहां लगातार पिछले 21महिनों से नकारात्मक संवर्धन रहा है। वहां की सरकार भी अनुमान लगा रही है कि इस वर्ष में अर्थव्यवस्था और घटेगी।

यूरोज़ोन के सबसे गरीब देश, पुर्तगाल का राष्ट्रीय कर्जा हाल में अप्रत्याशित स्तर तक बढ़ा। यह आशंका है कि 2010में पुर्तगाल का बजट घाटा उसके सकल घरेलू उत्पाद का 9.3प्रतिशत होगा, जो कि उस देश के लिये अभूतपूर्व है और यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार सीमा से तीन गुना ज्यादा है। अब तक वहां सरकार ने यूरोपीय संघ के आदेश के अनुसार सरकारी नौकरियों में कटौती और सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पर रोक नहीं लगाई है।

इताली में औद्योगिक उत्पादन 2009में 17.4प्रतिशत गिरा और कई छोटे निर्यातक जिन्दा रहने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। काॅनफेसेरसेंटी नामक व्यवसायिक संगठन की एक हाल की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वहां के दुकानदार 10प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज देकर पुराने उधारों को चुकाने के लिये, साहूकारों को प्रतिवर्ष अरबों-अरबों यूरो का भुगतान करने को मजबूर हैं। अक्सर दुकानदारों से पैसा वसूलने के लिये माफिया गुंडों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। 2010के आरंभ में, अमरीका और जापान के बाद, इताली में सरकारी कर्जा तीसरे स्थान पर था और आगे यह आषंका है कि यह सकल घरेलू उत्पाद का 115प्रतिशत हो जायेगा।

ग्रीस, स्पेन, पुर्तगाल और इताली की सरकारें अपनी जनता पर और आर्थिक कटौती थोपने से झिझक रही हैं, क्योंकि मेहनतकश जनसमुदाय पहले से ही संकट की भारी मार को झेल रहे हैं। मैड्रिड, लिस्बन, रोम और एथेन्स की सड़कों पर लोगों का गुस्सा और इतनी मुष्किल से मिली नौकरियों व सुविधाओं को बनाये रखने के लिये संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रीस के मजदूर यूनियन यूरोप में सबसे शक्तिषाली हैं। उन्होंने इन आर्थिक हमलों का विरोध करने का वादा किया है। फरवरी के आरंभ से वहां लगातार हड़तालें षुरु हो गई हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी 24घंटे के लिये सड़कों पर निकले, इस ऐलान के साथ कि “आर्थिक हमलों का जवाब हम हड़तालों और धरनों से देंगे”।

ग्रीस के सबसे बड़े टेªड यूनियन के अध्यक्ष ने यह कहा है कि “हर देश की तरह, ग्रीस में भी कुछ लोगों के पास सब कुछ है तो बाकि के पास कुछ भी नहीं। आज जिनके पास कुछ नहीं है, उनसे और कुरबानी करने को कहा जा रहा है। हमारा यह मानना है कि जिन्होंने बीते वर्षों में खूब मुनाफे कमाये हैं और अर्थव्यवस्था को बचाने ंके लिये कोई योगदान नहीं देना चाहते, उन पर शिकंजा कसा जाना चाहिये”।

स्पेन में यूनियनों ने सरकार के प्रस्तावित आर्थिक हमलों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन का आह्वान दिया है। 23फरवरी से, लगभग 10शहरों में, दो हफ्तों तक देशव्यापी रैलियों की घोषणा की गई है। स्पेन के मेहनतकशों के आधे हिस्से के पास काम का स्थायी ठेका है, इसलिये उन्हें काम से निकालना मुश्किल और महंगा हो सकता है। बाकि आधे स्व-रोज़गार पर हैं, बेरोजगार हैं या अस्थायी ठेकों पर काम की नाजुक स्थिति में हैं।

लिस्बन में जन प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। 5फरवरी को 50,000से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि पर रोक के खिलाफ़ आवाज उठाई। पुर्तगाल की सरकार ने कहा है कि सेवानिवृत्त होने वाले हर दो सरकारी कर्मचारियों की जगह पर सिर्फ एक नया कर्मचारी रखा जाएगा, जिसकी वजह से सरकारी नौकरियों में भारी कटौती होगी।

इताली में 12मार्च को बढ़ती संख्या में छंटनी के खिलाफ़ आम हड़ताल की घोषणा की गई है। कैसा इंटेग्राज्य़ोन नामक राष्ट्रीय कोष, जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों योगदान देते हैं, उसके इस्तेमाल पर एक मुख्य राजनीतिक संघर्ष शुरु हो सकता है। इस कोष के धन से आर्थिक मंदी के समय फैक्टरियों में तालाबंदी होने पर या कम घंटे काम होने पर, कर्मचारियों को आंशिक वेतन दिया जाता रहा है। सरकार कह रही है कि इस कोष से धन कंपनियों को दिया जाए ताकि वे आर्थिक मंदी के दौरान बंद होने को मजबूर न हों। इस समय यह कोष 800,000निकाले गये मजदूरों को वेतन दे रहा है।

एक यूनियन नेता के अनुसार, 2008से 2009के बीच, इस कोष से वेतन पाने वाले मजदूरों की संख्या दुगुनी से ज्यादा हो गई है। बढ़ती बेरोजगारी के चलते सरकार इस कोष को और विस्तृत करने की कोशिश कर रही है; 2009-10के लिये 8अरब यूरो इसके लिये निर्धारित किया गया है। पर टेªड यूनियन असली नौकरी और असली वेतन मांग रहे हैं।

अगर धन खत्म हो जाता है, या अगर कुछ और कंपनियां बंद हो जाती हैं, यह सोच कर कि मंदी के खत्म होने और अर्थव्यवस्था के पुनर्जागृत होने तक इंतजार करना व्यर्थ है, जैसा कि कई कंपनी कर चुके हैं, तो बेरोजगारी बहुत बढ़ जाएगी और सामाजिक असंतोष भी खूब बढ़ेगा।

अक्टूबर में, रोम की सड़कों पर 40,000पुलिस अफसरों ने, बेहतर वेतन और नई गाडि़यों की मांग को लेकर, प्रदर्शन किया। इताली में पुलिस में भर्ती रोक दी गई है, जिसकी वजह से वहां पुलिस कर्मियों की औसतन उम्र 45वर्ष है।

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