रेलवे मोटरमैन की जायज माँगों का समर्थन करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, मुंबई समिति तथा मज़दूर एकता चलवल द्वारा प्रकाशित, 22 जनवरी 2010

वर्षों से अपनी मांगों पर जोर देने के बाद मुंबई के मोटरमैनों के पास काम रोकने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचा था। पहली बार पश्चिम रेलवे व मध्य रेलवे के मज़दूरों ने एक समन्वय समिति बना कर घोषित किया कि 26 जनवरी को वे काम रोकेंगे।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, मुंबई समिति तथा मज़दूर एकता चलवल द्वारा प्रकाशित, 22 जनवरी 2010

वर्षों से अपनी मांगों पर जोर देने के बाद मुंबई के मोटरमैनों के पास काम रोकने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचा था। पहली बार पश्चिम रेलवे व मध्य रेलवे के मज़दूरों ने एक समन्वय समिति बना कर घोषित किया कि 26 जनवरी को वे काम रोकेंगे।

सरकार ने प्रसार माध्यमों के ज़रिये भ्रम फैलाने वाला झूठा प्रचार करना शुरु किया कि मोटरमैन लाख-लाख रुÛ वेतन पाते हैं और फिर भी अपनी मांगें लेकर अड़े हैं। साथ ही प्रचार किया गया कि गणतंत्र दिवस पर मोटरमैनों को काम नहीं रोकना चाहिये। सच्चाई तो यह है कि अगर किसी मोटरमैन को एक लाख रुÛ का किसी महीने में वेतन मिला तो वह पुराना बकाया वेतन था। मोटरमैन का वेतन ज़बरदस्ती ओवरटाईम के बावजूद इससे बहुत कम होता है।

मोटरमैनों ने गणतंत्र दिवस का दिन सोच-समझकर चुना था ताकि लोगों को काम पर जाने में कम से कम बाधा हो और मेहनतकशों की रोजी-रोटी पर असर न हो। मोटरमैनों की दृढ़ एकता के सामने आखिर सरकार को झुकना पड़ा और 25 जनवरी की रात को मोटरमैनों की मांगों को देखने के लिये एक फास्ट ट्रेक समिति बनाने की घोषणा करनी पड़ी और हड़ताल को टालना पड़ा।

मज़दूर एकता लहर मोटरमैनों के एकताबद्ध संघर्ष को सलाम करता है और आगे भी दृढ़ता से लड़ कर अपनी ज़ायज मांगें पाने के लिये शुभकामनायें देता है। हम हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, मुंबई समिति तथा मज़दूर एकता चलवल द्वारा निकाले गये बयान को नीचे छाप रहे हैं, जो बड़ी संख्या में मुंबई के रेलवे व अन्य मज़दूरों के बीच में 23-25 जनवरी को बांटा गया था।

देष के सबसे बड़े महानगर को चलाते रहने का श्रेय यहां की दो लोकल लाइनों के चालकों को, यानि कि पश्चिम और मध्य रेल की लोकलों के मोटरमैन को जाता है। लेकिन इन मोटरमैनों के काम की परिस्थिति बहुत ही बुरी है। इसका मुख्य कारण है कि केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त संख्या में इनकी भर्ती नहीं की जा रही है। और न ही उन्हें सहायक चालक दिये गये हैं। अति श्रम और कम विश्राम की वजह से उन्हें तो ख़तरा है ही। उसके साथ-साथ, लाखों लोकल सवारियों को भी ख़तरा है।

मुंबई लोकल रेलगाडि़यों को चलाने के लिये मोटरमैनों की संख्या इतनी कम है कि उन्हें हफ्ते में एक सुनिश्चित दिन भी अवकाश नहीं मिलता है। यहां तक कि राष्ट्रीय छुट्टी के दिन भी, 250 रुÛ से भी कम मामूली भत्ते के साथ, उन्हें आम दिनों की तरह ही काम पर जाना पड़ता है। माना कि रेलवे का काम समाज के लिये हर दिन ज़रूरी होता है। परन्तु अगर पर्याप्त संख्या में मोटरमैन होते तो अवश्य ही उन्हें सप्ताह के किसी एक निश्चित दिन अवकाश मिल सकता है ताकि वे अपने बच्चों व परिजनों के साथ योजनाबद्ध तरीके से कुछ समय बिता सकते हैं।

मोटरमैन अपनी परिस्थिति पर ध्यान दिलाने के लिये कितने ज्ञापन दे चुके हैं परन्तु सरकार के कान पर मानों जूं तक नहीं रेंगी है। आपको याद होगा की पिछले डेढ़ वर्षों में लोकल के मोटरमैनों को तीन बार संघर्ष के रास्ते पर उतरना पड़ा है। एक वर्ष पहले, 18 दिसम्बर, 2008 को पश्चिम रेलवे के मोटरमैनों ने अपनी समस्याओं पर ध्यान दिलाने के लिये भूखे पेट गाडि़यां चलाई थीं और शाम तक उनकी तबियत बिगड़ने की वजह से लोकल गाडि़यों की सेवा अस्तव्यस्त हो गई थी। उसके पहले और बाद में सेन्ट्रल रेलवे के मोटरमैनों ने भी अपनी मांगों पर ध्यान दिलाने के लिये कुछ घंटों की हड़तालें की थीं। परन्तु फिर एक वर्ष हो गया और सरकार ने उनकी समस्याओं को हल करने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

अतः अब मोटरमैनों को फिर संघर्ष के रास्ते पर उतरने के सिवाय और कोई चारा नहीं है। उन्होंने 26 जनवरी, 2010 के दिन अपनी मांगों पर ध्यान दिलाने के लिये कार्यवाई करने का निर्णय लिया। यह दिन उन्होंने इस लिये चुना क्योंकि इस दिन ज्यादातर सभी लोगों की छुट्टी होती है और लोगों को कम से कम परेशानी झेलनी पड़ेगी।

उनकी मांगों में मानवीय काम की परिस्थिति के साथ-साथ छठे वेतन आयोग के वेतन में असंगति से जुड़ी मांगें भी हैं। अन्य रेलवे कर्मचारियों के मुकाबले मोटरमैनों के साथ, किलोमीटर एलाउन्स व ग्रेड वेतन के मुद्दों पर नाइंसाफी की गयी है। उदाहरण के लिये उनका किलोमीटर एलाउन्स पुराने टी.ए.एलाउन्स पर आधारित है जबकि इसके कुछ ही दिन बाद टी.ए.एलाउन्स में वृद्धि की गयी थी। यह उनके साथ एक छल नहीं तो और क्या है?

हमारा मानना है कि समाज में जिम्मेदारी के साथ इतना आवश्यक काम करने वाले मज़दूर वर्ग के इस हिस्से की मांगें एकदम ज़ायज हैं। हम मांग करते हैं कि सरकार तुरन्त मोटरमैनों की मांगों को पूरा करे और उनकी समस्याओं का जल्द ही समाधान निकाले। सभी लोगों से हम अपील करते हैं कि वे मोटरमैनों के संघर्ष का सक्रियता से समर्थन करें।

 

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.