बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की हिन्दोस्तान यात्रा

बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने जनवरी में हिन्दोस्तान की चार दिन की सरकारी यात्रा की।

बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने जनवरी में हिन्दोस्तान की चार दिन की सरकारी यात्रा की।

बांग्लादेश की एक मुख्य चिंता यह रही है कि वस्त्र जैसे अपने ज्यादा स्पर्धाकारी निर्यायतों के लिये विशाल हिन्दोस्तानी बाज़ार में कैसे आसानी से प्रवेश किया जाये। परंतु हिन्दोस्तानी राज्य ने हमेशा ही इसे हिन्दोस्तान के पूर्वोत्तर क्षेत्र तक पहुँचने के लिये बांग्लादेश के भीतर से रास्ता पाने के अधिकार के साथ जोड़ा है – जिसे बांग्लादेश में बड़े शक की नज़र से देखा गया है।

इस यात्रा के दौरान, बांग्लादेश से हिन्दोस्तान द्वारा आयात की जाने वाली चीजों की सूची में से 47ऐसी सामग्रियों के आयात की अनुमति दी गई, जिन पर पहले रोक लगाई गई थी। परंतु इसके बदले में हिन्दोस्तान को पहली बार बांग्लादेश में स्थित चटगांव और मोंगला बंदरगाह में प्रवेश करने की इज़ाज़त मिली। बांग्लादेश को हिन्दोस्तानी इलाके से गुज़र कर नेपाल और भूटान तक पहुंचने की इज़ाज़त मिली। बांग्लादेश ने अपने इलाके के अंदर से हिन्दोस्तान को त्रिपुरा में आगरतला तक रेल लाईन बनाने की इज़ाज़त दी।

हिन्दोस्तान को पूर्वोत्तर क्षेत्र के बाकी देश के साथ जोड़ने के लिये बांग्लादेश के अंदर से गुजरने की ज़रूरत है। पूर्वोत्तर क्षेत्र और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के लोगों के लिये, दोनों देशों के बीच व्यापार के खुलने और दूसरी रुकावटों के हटने से काफी आपसी फ़ायदा हो सकता है। हिन्दोस्तान के पूंजीपतियों के लिये, पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ बढ़कर व्यापार आदि करने के लिये, यह ज़रूरी है कि आर्थिक और राजनीतिक मोर्चों पर हिन्दोस्तान और बांग्लादेश के बीच बेहतर संबंध हों।

बांग्लादेश के बारे में हिन्दोस्तानी राज्य की मुख्य चिंता सुरक्षा के मामले में है – यानि पूर्वोत्तर हिन्दोस्तान में बग़ावती ताकतों द्वारा बांग्लादेश के इलाके का इस्तेमाल। शेख हसीना की सरकार ने उल्फा के मुख्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिन्दोस्तानी सरकार के हवाले कर देने के कदम उठाये हैं। सुरक्षा के मामले में इस सहयोग को और आगे बढ़ाते हुये, तीन संधियों पर हस्ताक्षर किये गये – अपराधी मामलों में आपसी कानूनी मदद पर, दोषी करार किये गये व्यक्तियों के हस्तांतरण पर और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, आयोजित अपराध तथा अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने पर।

आपसी असहमति का एक मुख्य विषय – बांग्लादेश के नदी के निचले हिस्से में स्थित होने के कारण, वर्षा के समय बार-बार बांग्लादेश में बाढ़ आ जाना और दूसरे समय पर पानी के प्रवाह को हिन्दोस्तान द्वारा रोक दिया जाना – इस पर कोई समझौता नहीं हो पाया। हिन्दोस्तानी राज्य ने बांग्लादेश के साथ पानी की लेन-देन के मुद्दे को कभी हल नहीं किया है। समय-समय पर हिन्दोस्तान अतिरिक्त पानी को छोड़ देता है, जिससे बांग्लादेश में बाढ़ आ जाती है। बांग्लादेश की प्रधान मंत्री के आने से पहले इस पर कुछ सरकारी स्तर की वार्ता हुई थी, परंतु कोई समझौता नहीं हो पाया। हाल में दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर बढ़ता विवाद पैदा हुआ है, परंतु इस पर भी कोई समझौता नहीं हो पाया।

एक देश के इलाके के अंदर दूसरे देश के बहुत सारे “गलियारों” के विषय पर लंबे समय से, देश के बंटवारे के समय से, दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है। परंतु इस पर भी कोई समझौता नहीं हुआ। हाल की वार्ताओं में हिन्दोस्तान ने “असूल के तौर पर” यह माना है कि इस त्रुटि को दूर करने के लिये 17,000एकड़ ज़मीन हिन्दोस्तान से बांग्लादेश को दिया जायेगा और 7,000एकड़ बांग्लादेश से हिन्दोस्तान को दिया जायेगा। परंतु ज़मीनी तौर पर ऐसा करने से पहले हिन्दोस्तान में संसद की सहमति पानी होगी और कई लम्बी-चैड़ी कार्यवाहियां पूरी करनी होगी।

यात्रा के दौरान वातावरण में मिठास लाने के लिये, हिन्दोस्तानी सरकार ने बांग्लादेश में सड़क और रेल के आधारभूत ढांचे के विकास के लिये एक अरब डालर का उधार घोषित किया और बिजली की लेन-देन पर एक समझौता किया, जिसके तहत बांग्लादेश हिन्दोस्तान से 250मेगावाॅट बिजली ले सकेगा।

यह जानी-मानी बात है कि बांग्लादेश के साथ हिन्दोस्तानी राज्य का संबंध काफी तनावपूर्ण रहा है। जब से इंदिरा गांधी की सरकार ने 1971में पाकिस्तान की पूर्वी शाखा को काटकर बांग्लादेश की स्थापना करने का निर्णायक कदम उठाया था, तब से हिन्दोस्तानी राज्य ने इस पड़ोसी देश में हस्तक्षेप किया है और इसकी तरफ दादागिरी का रवैया अपनाया है। इसीलिये बांग्लादेश में लोग हिन्दोस्तान से काफी नफ़रत करते हैं।

साथ ही साथ, बांग्लादेश की दो मुख्य स्पर्धाकारी राजनीतिक पार्टियां, खालिदा जि़या की अगुवाई में बी.एन.पी. और शेख हसीना की अगुवाई में आवामी लीग – इनमें से शेख हसीना की आवामी लीग के साथ हिन्दोस्तानी राज्य के ज्यादा निकट संबंध हैं। चूंकि बीते चुनावों में आवामी लीग भारी बहुमत से जीती थी और उसके बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की यह प्रथम सरकारी यात्रा थी, अतः इस यात्रा में दोनों पक्षों की बहुत रुचि थी, इस उम्मीद से कि हिन्दोस्तान-बांग्लादेश के आपसी संबंध में कुछ विवादित मुद्दों को हल करने के मुख्य कदम लिये जायेंगे।

शेख हसीना का शानदार स्वागत और किये गये समझौतों से यह स्पष्ट होता है कि हिन्दोस्तानी राज्य बांग्लादेश और म्यांमार के साथ बढ़ते आर्थिक संबंधों के अपने रणनैतिक मंसूबों को हासिल करने के लिये, बांग्लादेश के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की दिशा में कुछ प्राथमिक कदम लेने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश किस हद तक सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर है कि हिन्दोस्तानी राज्य नदी के जल की समस्या, समुद्री सीमा के विवाद, हिन्दोस्तान में प्रवासी बांग्लादेशी मज़दूरों पर घोर अत्याचार आदि को हल करने के लिये क्या कदम उठायेगा और व्यापार तथा पूंजी निवेश से बांग्लादेश को लाभ उठाने में कितनी सहायता देगा।

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