साम्राज्यवादियों, लिबिया से दूर रहो!

उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में जनता की बगावत के चलते, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी लिबिया में चल रहे गृह युध्द को बहाना बनाकर, वहां सैनिक हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने लिबिया की स्थिति के बारे में धोखाधड़ी और बढ़ा-चढ़ाकर बातें फैलाने की मुहिम छेड़ रखी है, ताकि अपने सैनिक हस्तक्षेप को उचित ठहरा सकें।

उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में जनता की बगावत के चलते, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी लिबिया में चल रहे गृह युध्द को बहाना बनाकर, वहां सैनिक हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने लिबिया की स्थिति के बारे में धोखाधड़ी और बढ़ा-चढ़ाकर बातें फैलाने की मुहिम छेड़ रखी है, ताकि अपने सैनिक हस्तक्षेप को उचित ठहरा सकें।

सैनिक हस्तक्षेप को जायज़ ठहराने के प्रयास बतौर, अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने लिबिया में हिंसा को ''अस्वीकार्य'' बताया है। अमरीकी साम्राज्यवाद ने युगोस्लाविया, अफगानिस्तान, इराक और अन्य देशों में दसों-हजारों लोगों का कत्लेआम किया है। जब उसी अमरीकी साम्राज्यवाद का नेता ऐसा कहता है तो यह अपने दुष्ट इरादों को छिपाने के लिये छल-कपट के अलावा कुछ और नहीं हो सकता। अमरीका के दबाव में आकर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लिबिया पर प्रतिबंध लगाये हैं। लिबिया के नेता करनल गद्दाफी पर युध्द अपराधों के लिये हेग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत में मुकदमा चलाने का एक प्रस्ताव अमरीका ने सुरक्षा परिषद द्वारा आगे करवाया है। ''मानवीय सहायता'' की आड़ में अमरीका लिबिया पर हमला करने की योजना बना रहा है। जटिल विमानों तथा अस्त्रों से लैस नाटो युध्दपोत लिबिया की वायुसेना का पीछा कर रहे हैं, उसे नष्ट करने की योजना बना रहे हैं और ''उड़ान निषेध क्षेत्र'' बनाने की आड़ में, लिबिया के उड़ान क्षेत्र पर कब्जा करने की तैयारी कर रहे हैं।

बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों का इरादा है लिबिया के तेल संसाधनों पर कब्जा करना और उत्तरी अमरीका में अपना सैनिक अड्डा स्थापित करना। 2003 से लिबियाई नेता गद्दाफी ने बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ संबंध बनाया है, परंतु लिबिया के तेल उद्योग पर, ऐतिहासिक तौर पर, भूतपूर्व उपनिवेशवादी ताकत इतालवी साम्राज्यवादियों का नियंत्रण रहा है। तेल पर नियंत्रण के मुद्दे को लेकर, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और यूरोपीय ताकतों के आपस में स्पर्धा चल रही है। साथ ही साथ, इन सभी साम्राज्यवादियों का एक सांझा इरादा यह है कि उस इलाके के लोगों की अपनी दुर्दशा के खिलाफ़ उठ रही बगावत को सैनिक हस्तक्षेप के जरिये कुचल दिया जाये।

आठ बर्तानवी गुप्त खुफिया एजेंटों ने ''बागियों की मदद'' करने के बहाने, बागियों के कब्ज़े में पूर्वी शहर बेंगाजी के अंदर प्रवेश किया और वहां उन्हीं बागियों ने बर्तानवी खुफिया एजेंटों को गिरफ्तार कर लिया। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ये खुफिया एजेंट बागियों से संपर्क करने और सैनिक हथियार व दूसरी सहायता देने के लिये बेंगाजी में घुसे थे। पर बागियों ने बड़ी सख्ती के साथ ऐलान किया है कि वे विदेशी सैनिक हस्तक्षेप के खिलाफ़ हैं और वे खुद अपनी लड़ाई लडेंग़े।

अमरीकी-बर्तानवी साम्राज्यवाद जानबूझकर लिबिया में चल रहे गृहयुध्द की आग में घी डाल रहा है। वह लिबिया में विपक्ष के अंदर अपने एजेंटों को विदेशी हस्तक्षेप की मांग करने के लिये खुलेआम व गुप्त रूप से भड़का रहा है। सैनिक हस्तक्षेप को किसी भी तरह उचित ठहराना उनका मकसद है। जो ताकतें यह ऐलान कर रही हैं कि लिबिया के लोग, किसी विदेशी दखलंदाजी के बिना, खुद फैसला करेंगे कि उन्हें कैसी राजनीतिक व्यवस्था और सरकार चाहिए, उनकी आवाज़ को जानबूझकर दबाया जा रहा है। इसी प्रकार, पूरी दुनिया की वे ताकतें, जो विदेशी दखलंदाजी से मुक्त, लिबिया की जनता के पक्ष में गृह युध्द का समाधान चाहती हैं, उनकी आवाज़ को भी दबाने की कोशिश की जा रही है।

पूरे पूर्वी अफ्रीका और पश्चिम एशिया में, टयूनिशिया, मिस्र, बाहरैन, इत्यादि में लोग अपनी हालतों के खिलाफ़ बगावत कर रहे हैं और अपने हाथों में सत्ता लेने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। इन बगावतों में लाखों-लाखों लोग भाग ले रहे हैं। लोग पूंजीवाद और साम्राज्यवाद द्वारा शोषण के खिलाफ़, अपनी रोजी-रोटी और अधिकारों की हिफाजत में संघर्ष कर रहे हैं। लोग अपने भविष्य को खुद तय करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। इन बगावतों ने उस इलाके में अमरीकी साम्राज्यवाद की अगुवाई में बर्तानवी-अमरीकी-जाउनवादी धुर्री के हितों को भारी चोट पहुंचाई है।

इन हालतों में, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी और जाउनवादी इन बगावतों को रोकने, गुमराह करने और खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे लिबिया की स्थिति का इस्तेमाल करके, उस इलाके के लोगों की प्रगतियों को पीछे खींचने की कोशिश कर रहे हैं। साम्राज्यवादी ''लोकतंत्र'' और ''सत्ता परिवर्तन'' की बहुत बातें कर रहे हैं। वे इस बात को इंकार कर रहे हैं कि उत्तारी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के लोग असली सत्ता के लिये संघर्ष कर रहे हैं, न कि बहुपार्टीवादी लोकतंत्र के बर्तानवी-अमरीकी नुस्खों के लिये। वे इस बात को छिपा रहे हैं कि उस इलाके के संसाधनों का शोषण करने तथा वहां के लोगों को पिछड़े व शोषित रखने के इरादे से, अब तक साम्राज्यवादी खुद ही उस इलाके की जन-विरोधी सत्ताओं को समर्थन देते आये हैं।

उस इलाके के लोगों के संघर्ष बिल्कुल जायज़ हैं और ऐसी राजनीतिक तब्दीली के लिये यह संघर्ष है, जिससे लोग सत्ता को खुद चला सकेंगे। यह संघर्ष साम्राज्यवाद और उसके दलाल, जाउनवाद तथा जनता के इन दुश्मनों के साथ समझौता करने वाले स्थानीय पूंजीपतियों के खिलाफ़ है।

विदेशी साम्राज्यवादी दखलंदाजी का लगातार विरोध करते हुये, लिबिया के लोग पूरी बुध्दिमत्ता के साथ अपनी अंदरूनी समस्याओं का समाधान करेंगे। हमारे देश और दूसरे देशों के मजदूर मेहनतकश लिबिया के लोगों के संघर्ष का समर्थन करते हैं। हम बर्तानवी – अमरीकी साम्राज्यवादियों तथा दूसरे साम्राज्यवादियों द्वारा, किसी भी बहाने, लिबिया में की जा रही विदेशी दखलंदाजी का पूरा-पूरा विरोध करते हैं।

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