कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड से अमोनिया गैस का रिसाव :
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई

26 दिसंबर को उर्वरक निर्माता कंपनी, कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (सीआईएल) से अमोनिया गैस के रिसाव के कारण चेन्नई के बाहरी इलाके एन्नोर और आसपास के 32 गांवों के निवासियों को सांस लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ा। हजारों लोग दोपहिया वाहनों और ऑटो रिक्शा सहित, परिवहन के लिये उपलब्ध किसी भी साधन का उपयोग करके सुरक्षा के लिए अपने घरों से भाग गए। लगभग सौ लोग बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा तथा 11 लोगों को आई़सीयू में भर्ती कराया गया।

उत्तरी चेन्नई के एन्नोर इलाके में मछुआरों की बस्तियों के निवासी सीआईएल के परिचालन को बंद करने की मांग को लेकर, 27 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अपनी जायज़ मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने क्रूर हमला किया।

एन्नोर पुलिस ने इस क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 18 प्रदर्शनकारियों पर धारा 294 (बी), (किसी भी सार्वजनिक स्थान पर या उसके निकट कोई अश्लील गीत, गीत या शब्द, गाना सुनाना या बोलना), 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना), और 506 (2) (आपराधिक धमकी), भारतीय दंड संहिता की इन सभी धारा के तहत मामले दर्ज़ किए हैं। पुलिस ने उन लोगों के ख़िलाफ़ भी मामले दर्ज़ किए हैं जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को भोजन और पानी उपलब्ध कराया था! गैस लीक के लिए कंपनी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बजाय, पुलिस उन लोगों को निशाना बना रही है जो ऐसी घटनाओं के शिकार हुये हैं।

सी.आई.एल. कई प्रकार के उर्वरक बनाती है। रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि कंपनी अमोनियम फॉस्फेट पोटाश सल्फेट (एपीपीएस) का उत्पादन करने के लिए अमोनिया का इस्तेमाल कर रही है। अमोनिया को ज़रूरत के अनुसार, समुद्र तट से 500 से 1500 मीटर की दूरी पर खडे़ जहाज से पानी के नीचे बिछाए गए पाइपों के माध्यम से अमोनिया को भंडारण टैंक में पहुंचाया जाता है। इनमें से एक पाइप से गैस लीक हो गई, जिससे 26 दिसंबर की दुर्घटना हुई।

कंपनी ने दावा किया है कि अमोनिया का मामूली रिसाव हुआ था। लेकिन इस रिसाव का असर वहां से क़रीब 15 किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों पर भी पड़ा। एन्नोर शहर तथा आसपास के कई गांवों के लोग सी.आई.एल. की उर्वरक निर्माण इकाई से लगातार जहरीली गैस लीक होने की शिकायत कर रहे हैं। लोगों का यह अनुभव कंपनी द्वारा किए गए सुरक्षा नियमों के पालन के दावे पर सवाल उठाता है।

अभी तक कंपनी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

हमारे देश में इस तरह की औद्योगिक दुर्घटनायें बार-बार होती रहती हैं, लेकिन लोगों के प्रति जवाबदेही का पूर्णतया अभाव है। सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं। लाइसेंसिंग और निरीक्षण अधिकारी सभी सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पूंजीपति मालिकों के साथ सक्रिय रूप से मिलीभगत करते हैं। भोपाल की घातक गैस त्रासदी के उन्तालिस साल बाद, पूंजीपतियों की संवेदनहीनता से प्रभावित लोगों के प्रति राज्य और उसके अधिकारियों की जवाबदेही की कमी हमें परेशान करती रहती है।

लोगों पर पुलिस का हमला पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। कंपनी में ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को सज़ा दी जानी चाहिए और सरकार को प्लांट के मज़दूरों और प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

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