2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों का संघर्ष

2023 में हमारे देश के मज़दूर और किसान पूंजीपति वर्ग के समाज-विरोधी और मज़दूर-विरोधी हमले के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों में सड़कों पर उतरे। विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने न्यूनतम मज़दूरी के अपने अधिकार के लिए, पूंजीपतियों की मर्ज़ी पर छंटनी के खि़लाफ़ और श्रम संहिताओं के खि़लाफ़ एक साथ रैली की। जिन श्रम संहिताओं ने कार्य दिवस को बढ़ा दिया है और मज़दूरों के यूनियन बनाने और अपने अधिकारों के लिए हड़ताल करने के अधिकारों को प्रतिबंधित किया है। किसान एम.एस.पी. पर ख़रीद की गारंटी देने में राज्य की विफलता के माध्यम से अपनी आजीविका पर हमलों का विरोध करने, बिजली अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन और अपनी फ़सलों के नुक़सान के लिए मुआवजे़ की मांग करने के लिए एकजुट हुए।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष देशभर में मज़दूरों ने मई दिवस मनाने के लिए कार्यक्रम और रैलियां आयोजित कीं।

जब तमिलनाडु सरकार ने 21 अप्रैल, 2023 को 12 घंटे के कार्य दिवस की अनुमति देने वाला क़ानून पारित किया, तो मज़दूरों की यूनियनों ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर लामबंदी की और लड़ाकू विरोध प्रदर्शन किये। जिसके चलते राज्य सरकार को 24 अप्रैल को अपना निर्णय स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष 9 अगस्त को तमिलनाडु में ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों ने लंबे समय से लंबित अपनी मांगों के लिए चेन्नई और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन किया। उन मांगों में शामिल हैं – श्रम संहिता को ख़त्म करना, अस्थायी या आकस्मिक या अनुबंध पर रखे गये मज़दूरों को नियमित करना, न्यूनतम वेतन 28,000 रुपये करना, निजीकरण को ख़त्म करना और सभी मज़दूरों के लिये 10,000 रुपये की मासिक पेंशन।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष बिजली क्षेत्र के निजीकरण के पूंजीवादी हमले को बिजली क्षेत्र के मज़दूर लगातार चुनौती दे रहे हैं। बिजली क्षेत्र के मज़दूरों ने दिसंबर-2022 से जनवरी-2023 के दौरान, महाराष्ट्र में उपभोक्ताओं का समर्थन हासिल करने के लिए व्यापक रूप से अभियान चलाया। उन्होंने 4 जनवरी को, महाराष्ट्र आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम की धमकी के बावजूद बिजली के निजीकरण के खि़लाफ़ एक बड़ी हड़ताल का आयोजन किया। बिजली क्षेत्र के देशभर के मज़दूरों के संगठनों ने महाराष्ट्र में अपने भाइयों और बहनों के प्रति अपना समर्थन प्रदर्शित किया। आसपास के राज्यों की यूनियनों ने हड़ताल तोड़ने वालों के रूप में महाराष्ट्र में काम करने से इंकार कर दिया। मज़दूरों की एकता और जनता के समर्थन ने बिजली मज़दूरों की कुछ मांगों को अस्थायी तौर पर मानने के लिये महाराष्ट्र सरकार को मजबूर कर दिया।

16 मार्च, 2023 की रात को उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक बिजली कर्मचारियों ने यूपी राज्य विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 72 घंटे की हड़ताल की। हड़ताली कर्मचारियों की मांग थी कि सरकार बिजली पारेषण और वितरण के निजीकरण को रोके, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करे और अनुबंध पर रखे गये सभी कर्मचारियों को नियमित करने की अपनी पूर्व स्वीकृत को लागू करे।

महाराष्ट्र में भिवंडी के सैकड़ों निवासी निजी बिजली वितरण कंपनी टोरेंट से आज़ादी की मांग को लेकर जुलाई और अगस्त में सड़कों पर उतरे। इन जुझारू कार्रवाइयों में महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। निवासियों ने बिजली बिलों में भारी वृद्धि और कंपनी द्वारा निवासियों के खि़लाफ़ बिजली चोरी के झूठे मामले दर्ज़ करने का विरोध किया। सार्वजनिक बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों ने भी इन प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया।

लोको पायलटों ने ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) के आह्वान पर 10 अक्तूबर को दिल्ली में ‘हंगर फास्ट’ का आयोजन किया। लंबे समय से लंबित उनकी मांगों में शामिल हैं – ड्यूटी की दो शिफ्टों के बीच पर्याप्त आराम, खाली पड़े पदों को भरना, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छ शौचालय की बुनियादी सुविधाएं, महिला रनिंग स्टाफ के लिए अलग शौचालय का प्रबंध और पुरानी पेंशन योजना की बहाली।

पूरे साल के दौरान, चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आई.सी.एफ.) के मज़दूरों, हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (एच.ई.सी.) के मज़दूरों और तमिलनाडु के चमड़ा उद्योग के मज़दूरों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण और छंटनी के खि़लाफ़ और वेतन के लंबित बक़ाए के भुगतान को लेकर प्रदर्शन किया।

पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग को लेकर, देश की राजधानी और कई राज्यों में अर्थव्यवस्था कई क्षेत्रों के मज़दूरों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये गये। अगस्त और अक्तूबर में ज्वाइंट फोरम फॉर रिस्टोरेशन ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम और नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम द्वारा दिल्ली में कई रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें रेलवे, रक्षा, डाक, शिक्षा, बैंक, बीमा आदि के लाखों कर्मचारियों ने अपनी आवाज़ें बुलंद कीं। 23 जनवरी, 2023 को करीब 1 लाख कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन के मुद्दे पर जयपुर में एक विशाल रैली का आयोजन किया। इसके बाद 14 मार्च को पूरे महाराष्ट्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हुई, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारियों, अर्ध-सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भाग लिया। शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मियों तथा विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों ने राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किए।

मध्य प्रदेश में लगभग 5,75,000 सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना, महंगाई भत्ता बक़ाया का भुगतान, पदोन्नति और आउटसोर्सिंग समाप्त करने की लंबे समय से लंबित अपनी मांगों को लेकर 25 अगस्त को सामूहिक अवकाश लिया।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष देशभर के किसानों ने पुलिस की बर्बरता के बावजूद, अपनी उचित मांगों के लिए इस वर्ष कई आंदोलन किए।

2023 के मार्च में अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले हजारों किसान और उनके समर्थक लाभकारी मूल्य, पूर्ण क़र्ज माफ़ी, बिजली के लंबित बिलों को माफ़ करने और 12 घंटे दैनिक बिजली आपूर्ति, सरकार और बीमा कंपनियों द्वारा बेमौसम बारिश आदि से ख़राब हुई फ़सलों के लिए मुआवजे़ का आश्वासन देने जैसी मांगों के लिए नासिक से मुंबई तक 200 किमी पैदल चले।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष राजस्थान के हनुमानगढ़ के किसान पानी की चोरी के खि़लाफ़ लगातार संघर्ष कर रहे थे। कई विरोध प्रदर्शनों और धरनों के बाद प्रशासन को किसानों की मांगें मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। फ़िरोज़पुर में किसानों ने अल्कोहल निर्माण संयंत्र मालब्रोस इंटरनेशनल लिमिटेड के खि़लाफ़ 5 महीने से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन किया, जिसने वहां के भूजल को नुक़सान पहुंचाया था और जिसकी वजह से कई लोगों की जानें चली गई थीं। इसके अलावा किसानों ने राजस्थान के नोहर में, हरियाणा के सिरसा में और पंजाब में बाढ़ के कारण नष्ट हुई फ़सलों के मुआवज़ों के लिये और फ़सलों की ख़राबी के लिए मिलने वाले बीमा दावों के भुगतान की मांग के लिए अगस्त से कई प्रदर्शन आयोजित किए हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब के हजारों गन्ना किसानों ने बक़ाया के भुगतान के लिये और गन्ने की राज्य-अनुकूलित क़ीमतों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर अक्तूबर-नवंबर में आंदोलन किये। हरियाणा के 15 गांवों के 3,000 से अधिक किसानों को राज्य द्वारा अधिग्रहित उनकी 1,800 एकड़ से अधिक भूमि के लिए उचित मुआवजे़ की मांग के लिए 200 दिनों तक संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़ा और अंततः उन्होंने नवंबर में गुरुग्राम-जयपुर एक्सप्रेसवे को अवरुद्ध कर दिया।

इस वर्ष मज़दूरों और किसानों ने मुद्रास्फीति को रोकने, निजीकरण को समाप्त करने, न्यूनतम वेतन की मांग करते हुए, कई संयुक्त सम्मेलन और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। अन्य मांगों में सभी मज़दूरों के लिए प्रति माह 26,000 रुपये न्यूनम वेतन, एम.एस.पी. की क़ानूनी गारंटी, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेना शामिल थे। उन्होंने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कैद करने की भी निंदा की। शासक पूंजीपति वर्ग के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी कार्यक्रम के खि़लाफ़ इन संयुक्त विरोध प्रदर्शनों में छात्रों, युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

20 मार्च को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशाल किसान महापंचायत में 10,000 से अधिक किसानों ने भाग लिया। 50 से अधिक किसान नेताओं और मज़दूर यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बैठक को संबोधित किया और कॉर्पाेरेट घरानों द्वारा शोषण को समाप्त करने के लिए देशव्यापी संघर्ष चलाने की घोषणा की। 5 अप्रैल को मज़दूर-किसान संघर्ष रैली के लिए हजारों लोग दिल्ली में एकत्र हुए। देशभर के मज़दूरों और किसानों ने मज़दूरों की सर्व हिन्द आम हड़ताल के पहले दिन और 2021 में किसानों द्वारा संसद तक किये गये ऐतिहासिक मार्च की वर्षगांठ मनाने के लिए 26-28 नवंबर को तीन दिवसीय महापड़ाव (बड़े विरोध) में उत्साहपूर्वक भाग लिया। देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों में, दिन भर सभायें और प्रदर्शन आयोजित किए गए। 3 अक्तूबर 2023 को मज़दूरों और किसानों की यूनियनों ने संयुक्त रूप से अपने एकजुट संघर्ष को तेज़ करने और महापड़ाव की तैयारी के लिए आह्वान करने के लिए देशभर में बैठकें आयोजित कीं।

24 अगस्त को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, फेडरेशनों, एसोसियेशनों और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा एक सर्व हिन्द संयुक्त सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें मज़दूरों और किसानों की मांगों का एक चार्टर अपनाया गया। 9 अगस्त को यूनाइटेड फोरम ऑफ ट्रेड यूनियंस के आह्वान पर देशभर में 700 से ज्यादा जगहों पर मज़दूरों ने महापड़ाव आयोजित किए।

गिग क्षेत्र के लाखों मज़दूर और ठेका मज़दूरी की प्रणाली के तहत काम करने वाले मज़दूर, जिन्हें मज़दूर बतौर मान्यता नहीं है, वे बतौर मज़दूर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बार-बार सड़कों पर आए हैं।

हरियाणा में लगभग 20,000 आशा कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये करने और सरकारी कर्मचारी के दर्ज़े की मांग को लेकर अगस्त और अक्तूबर के बीच जुझारू हड़ताल की। अंततः सरकार को 6,100 रुपये की बढ़े हुए मासिक मानदेय और सेवानिवृत्ति लाभ की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पदोन्नति, भर्ती और पेंशन से संबंधित मांगों को लेकर पूरे मध्य प्रदेश में हज़ारों नर्सों ने 10 जुलाई, 2023 को अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। राजस्थान में नर्सों ने नर्सिंग शिक्षा और प्रशिक्षण, नर्सिंग शिक्षकों की रिक्तियों को भरने, वेतन और भत्ते, संविदा नर्सों को नियमित करने और प्लेसमेंट एजेंसियों के ज़रिये की जाने वाली भर्तियों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित अपनी मांगों को लेकर कई महीनों तक संघर्ष किया और 14 अगस्त को मशाल जुलूस निकाला।

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के फार्मासिस्टों ने समय पर पदोन्नति और समय पर वेतन दियेे जाने, उचित वेतन आदि की मांगों को लेकर 1 सितंबर से हड़तालों की एक श्रृंखला शुरू की थी। तमिलनाडु के सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में निजीकरण की पृष्ठभूमि में काम की बिगड़ती स्थितियों के विरोध में 18 अगस्त को चेन्नई में एक रैली का आयोजन किया था।

ब्लिंकिट (ज़ोमैटो) के डिलीवरी कर्मचारी कंपनी द्वारा शुरू की गई एक नई अनुचित भुगतान प्रणाली का विरोध करने के लिए अप्रैल में हड़ताल पर चले गए। 24 नवंबर को दुनियाभर में अमेज़न मज़दूरों ने अपने काम की भयानक परिस्थितियों के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन और हड़तालें आयोजित कीं। प्राप्त ख़बरों के अनुसार, अमेज़न के मज़दूरों ने देशभर के कई शहरों – दिल्ली, मुंबई, पटना, वाराणसी, कोलकाता, औरंगाबाद, ऋषिकेश, आगरा, भोपाल, कोल्हापुर और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन किये।

केरल के कोड़िकोड और वायनाड जिलों में बड़ी संख्या में महिला मज़दूरों सहित बी.एस.एन.एल. के कैज़ुअल और ठेका मज़दूरों ने वेतन मिलने में देरी और आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा सामाजिक सुरक्षा के लाभ न दिये जाने के विरोध में 18 अप्रैल को रिले भूख हड़ताल की थी। वेतन मिलने में देरी, नौकरी की असुरक्षा और जातिगत आधार पर भेदभाव को लेकर 18 सितंबर को जे.एन.यू. के परिसर में संविदा मज़दूरों ने एक “सम्मान रैली” आयोजित की।

हरियाणा में परिवहन कर्मचारियों ने सड़क परिवहन सेवाओं के निजीकरण के खि़लाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये। पश्चिम बंगाल में परिवहन मज़दूरों और देशभर में महिला निर्माण मज़दूरों ने मज़दूर वर्ग के संघर्षाें में भाग लिया और अपनी मांगों के चार्टर में मांगों को शामिल किया। सैकड़ों महिला सफ़ाई कर्मचारियों ने 28 अगस्त, 2023 को दिल्ली में एक प्रदर्शन किया और मांग की कि सरकार सीवर और टैंकों की सफाई करने वाले कर्मचारियों को संपूर्ण सुरक्षा उपकरण, गैस मास्क आदि प्रदान करे। उन्होंने मृत मज़दूरों के परिवारों के लिए उचित मुआवज़ा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार की मांग की।

हजारों मेहनतकश महिलाओं और पुरुषों ने अपनी आजीविका और अपने घरों के अधिकार पर हमलों के खि़लाफ़ लड़ाई लड़ी है।

उत्तराखंड के हलद्वानी में अपने घरों से जबरन बेदखली के विरोध में 50,000 पुरुष, महिलाएं और बच्चे सड़कों पर उतरे। सरकार ने बेदखली का आदेश दिया, संभवतः कारण था निजी पूंजीपतियों को भूमि प्रदान करना, जो राष्ट्रीय मुद्रीकरण नीति के माध्यम से पास के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर क़ब्ज़ा कर लेगा। लोगों का अनिश्चितकालीन धरना दिसंबर 2022 की कड़कड़ाती ठंड के दिनों में शुरू हुआ और 5 जनवरी, 2023 को सुप्रीम कोर्ट को बेदखली के आदेश पर रोक लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

महाराष्ट्र में रत्नागिरी के निवासी प्रस्तावित बारसु सालगांव तेल रिफ़ाइनरी परियोजना को रोकने के लिए अप्रैल में सड़कों पर उतरे। इस परियोजना से लोगों के जीवन और आजीविका को ख़तरा है और कोंकण के पर्यावरण के लिए ख़तरा पैदा हो गया है। प्रदर्शनकारियों पर, ख़ासकर महिलाओं पर, क्रूरतापूर्वक हमला किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। परन्तु लोगों ने अपना संघर्ष जारी रखा, जिससे उन्हें देश के सभी न्याय-प्रिय लोगों से समर्थन प्राप्त हुआ।

महिलाओं ने काम की जगह पर यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और हिंसा के खि़लाफ़ और सम्मान के अधिकार के लिए जोशपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

2023 में हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों के संघर्ष देश की महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का मुक़दमा चलाने और उन्हें दोषी ठहराने की मांग करते हुए सरकार के खि़लाफ़ तीखी लड़ाई छेड़ दी। विरोध करने वाले पहलवानों को महिला संगठनों, मज़दूर यूनियनों, किसान संगठनों और पंचायत संगठनों से समर्थन मिला। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारी पहलवानों के समर्थन में 11 मई से 18 मई तक सर्व हिन्द आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा की है। भारी पुलिस उपस्थिति और हमलों के बावजूद, देशभर से सैकड़ों लोग पहलवानों का समर्थन करने के लिए विरोध स्थल पर आए।

देशभर में श्रमजीवी वर्ग और किसानों ने मणिपुर के लोगों के खि़लाफ़ राज्य द्वारा आयोजित हिंसा को समाप्त करने की मांग को लेकर विशाल प्रदर्शन और धरने आयोजित किए। 25 जुलाई को मज़दूरों, किसानों और महिला कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें “मणिपुर और सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों से ए.एफ.एस.पी.ए. हटाओ”, ”मणिपुर में राजकीय  आतंकवाद और हिंसा मुर्दाबाद”, “पूंजीवाद मुर्दाबाद”, शासक वर्ग की “फूट डालो और राज करो की नीति” को ख़त्म करो और “महिलाओं के खि़लाफ़ हिंसा के अपराधियों को दंडित करो” की मांग की गई।

6 दिसंबर, 1992 को राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा की निंदा करते हुए, 6 दिसंबर को संसद के पास एक जुझारू विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जोशपूर्ण नारे लगाए कि – “बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दोषियों को सज़ा दो!”, “राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा के खि़लाफ़ एकजुट हों!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!“, “यू.ए.पी.ए. को रद्द करें!”, “अन्याय के खि़लाफ़ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डालने और यातना देने का विरोध करें!”

3 अक्तूबर को न्यूज़क्लिक और लगभग पचास पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों पर सरकार द्वारा किए गए हमले के खि़लाफ़ पत्रकारों, ट्रेड यूनियनों, महिला संगठनों, किसान संगठनों, नौजवान और छात्र संगठनों ने पूरे देश में जुझारू विरोध प्रदर्शन शुरू किये। कम्युनिस्ट और वामपंथी पार्टियों ने इस मुद्दे पर 10 अक्तूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों मज़दूरों, महिलाओं और नौजवानों ने भाग लिया।

8 अक्तूबर को छात्रों और नौजवानों ने नई शिक्षा नीति को रद्द करने और सभी के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोज़गार सुनिश्चित करने की मांग को लेकर, दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आये युवाओं ने भाग लिया।

2023 के अक्तूबर महीने में फ़िलिस्तीन के लोगों के खि़लाफ़ इज़रायल के जनसंहारक युद्ध के कारण दुनियाभर और हिन्दोस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। मज़दूरों, महिलाओं, नौजवानों और छात्रों ने इस जनसंहारक युद्ध की निंदा करने के लिए 7 नवंबर को दिल्ली में एक जनसभा की। 22 नवंबर को दिल्ली की विभिन्न ट्रेड यूनियनों, छात्रों, नौजवानों के संगठनों और जन संगठनों ने प्लैकार्ड लेकर एक जुलूस निकाला और नारे लगाए – “अपनी मातृभूमि के लिए फ़िलिस्तीनी लोगों का वैध संघर्ष ज़िंदाबाद!”, “अमरीका समर्थित इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनी लोगों का जनसंहार मुर्दाबाद!”, “फ़िलिस्तीन के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करो!”, “अमरीकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!” अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक बैठकें आयोजित की गईं।

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