नागपुर में फैक्ट्री में धमाका :
मज़दूरों की सुरक्षा की घोर उपेक्षा

18 दिसंबर, 2023 को सोमवार के दिन नागपुर जिले की एक फैक्ट्री में हुए, उस विस्फोट में 9 मज़दूरों की मौत हो गई, जिनमें 6 महिलाएं थीं। बताया जा रहा है कि यह विस्फोट सोलर इंडस्ट्री नामक एक निजी कंपनी में विस्फोटक पदार्थों की पैकिंग के दौरान हुआ।

नागपुर विस्फोट पदार्थों के निर्माण के केन्द्रों में से एक है। 2018 में इलाके की एक अन्य फैक्ट्री में भी इसी तरह के विस्फोट में मज़दूर मारे गए थे। अभी हाल ही में अप्रैल 2023 में एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से तीन मज़दूरों की मौत हो गई थी।

पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पी.ई.एस.ओ.) केंद्र सरकार का संस्थान है, जिसकी ज़िम्मेदारी है ख़तरनाक पदार्थों का उत्पादन करने वाले उद्योगों में सुरक्षा सुनिश्चित करना। इसका मुख्यालय नागपुर में है और साथ ही साथ, देश में इसकी 3,60,000 से अधिक इकाइयां हैं जो इसे रिपोर्ट करती हैं। ऐसी प्रत्येक औद्योगिक इकाई के निरीक्षण का काम एक महीने तक चलता है जिसे सावधानीपूर्वक किया जाता है।

नागपुर जिले में केवल चार ही अधिकारी हैं और पी.ई.एस.ओ. में कर्मचारियों की भारी कमी है। संस्थान द्वारा किये जाने वाले निरीक्षणों की संख्या आवश्यकता से बहुत कम है। नतीजतन, कई फैक्ट्रियां बेहद असुरक्षित परिस्थितियों में चलाई जा रही हैं। निजी कंपनियों के मालिक, मज़दूर मुहैया कराने वाले ठेकेदारों के ज़रिये हजारों अकुशल मज़दूरों को काम पर रखते हैं।

मज़दूरों की सुरक्षा की घोर उपेक्षा की जा रही है और मज़दूर मुहैया कराने वाले ठेकेदारों के ज़रिये काम पर लगाये जाने वाले मज़दूरों को दी जाने वाली बेहद कम मजदूरी, देश के मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था की अमानवीय प्रकृति को उजागर करती है। उत्पादन क्षेत्र की दिशा, मज़दूरों के अधिकतम और बहुत तेज़ शोषण के ज़रिये, पूंजीपतियों के लिए अधिकतम निजी लाभ बनाने की ओर उन्मुख है। राज्य के जिन संस्थानों पर काम करने की सुरक्षित परिस्थितियां सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी है, उनमें कर्मचारियों की भारी कमी होना, यह साफ़ दर्शाता है कि शासक वर्ग को मज़दूर वर्ग की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है।

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