‌फ़िलिस्तीनी लोगों के क़त्लेआम को बंद करने और उनके लिए इंसाफ़ की मांग को लेकर इंग्लैंड में विरोध प्रदर्शन जारी है
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) के संवाददाता की रिपोर्ट

फ़िलिस्तीनी लोगों के खि़लाफ़ इज़रायल द्वारा किये जा रहे जनसंहारक युद्ध का विरोध करते हुए, पूरे इंग्लैंड में लोग अपना विरोध प्रदर्शन और भी तेज़ कर रहे हैं।

साउथहॉल में विरोध प्रदर्शन

16 दिसंबर को लोगों ने लंदन के साउथहॉल में साउथहॉल के टाउन हॉल के सामने एक रैली आयोजित की। लोगों ने धरना प्रदर्शन करते हुए सड़क पर क़ब्ज़ा कर लिया और साउथहॉल ब्रॉडवे के प्रमुख जंक्शन को ब्लाक कर दिया। उन्होंने तत्काल युद्धविराम और फ़िलिस्तीनी लोगों के क़त्लेआम को बंद करने का आह्वान किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने साउथहॉल ब्रॉडवे पर साउथहॉल टाउन हॉल से मस्जिद तक मार्च किया जहां पर एक रैली आयोजित की गई।

फ़िलिस्तीनी एकता अभियान, इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.), स्टॉप द वॉर गठबंधन, द मॉनिटरिंग ग्रुप, ईलिंग टीयूसी और अन्य ट्रेड यूनियनों, सामुदायिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और वक्ताओं ने रैली को संबोधित किया। कई युवाओं और छोटे बच्चों ने एकजुट होने के संदेश और प्रेरणादायी भाषण दिए।

प्रदर्शनकारियों के आसपास, घोड़ों पर सवार पुलिस समेत, भारी पुलिस बल मौजूद था। लोगों पर अधिकारियों के साथ-साथ कुछ स्थानीय राजनेताओं की ओर से धरना-प्रदर्शन या मार्च न करने का दबाव था। विरोध-प्रदर्शनों के आयोजकों और पूरे साउथहॉल में रहने वाले लोगों ने इस दबाव को नज़र अंदाज़ कर दिया। इस दबाव के बावजूद लोगों द्वारा किया गया बहादुरीपूर्ण विरोध-प्रदर्शन, नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ और इंसाफ़ की हिफ़ाज़त के लिए, साउथहॉल के लोगों की खड़े होने की गौरवशाली परंपरा का एक जीता-जागता सबूत है।

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इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जीबी) – इस विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में से एक था। इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जीबी) के एक कार्यकर्ता ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने नस्लवाद के ख़िलाफ़ खड़े होने में साउथहॉल में रहने वाले लोगों की गौरवशाली संघर्ष-परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमरीका और ब्रिटेन पर शासन करने वाले बड़े पूंजीपतियों और उनके साम्राज्यवादी सहयोगियों द्वारा मिडिल-ईस्ट में तेल, गैस और अन्य समृद्ध संसाधनों के द्वारा खुद को समृद्ध करने के लिए, बड़े पैमाने पर फ़िलिस्तीनी लोगों का क़त्लेआम और उनकी मातृभूमि पर क़ब्ज़ा क़ायम रखने के उद्देश्य से गाज़ा में युद्ध किया जा रहा है। एक अन्य वक्ता ने बताया कि अमरीका, ब्रिटेन और अन्य साम्राज्यवादी देशों की सरकारें, अधिकतम मुनाफ़ा कमाने के लिए, इन देशों के इजारेदार पूंजीपतियों के हितों की सेवा करती हैं। कई वक्ताओं ने उन सरकारी पार्षदों और सांसदों की निंदा की जो हो रहे इस क़त्लेआम के लिए ज़िम्मेदार, इज़रायली सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इनमें से किसी भी राजनेता को रैली में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। फ़िलिस्तीनी लोगों के क़त्लेआम को सही ठहराने के लिए ब्रिटिश सरकार और विपक्षी लेबर पार्टी, दोनों की निंदा की गई और उन्हें शर्मिंदा किया गया।

फ़िलिस्तीन को आज़ाद करो!, तुरंत युद्धविराम करो!, क़त्लेआम ख़त्म करो! बमबारी बंद करो! जैसे नारे रैली में, सड़क नाकेबंदी के दौरान और ब्रॉडवे पर आयोजित लंबे मार्च के दौरान गूंजते रहे।

इलफर्ड में वेलेंटाइन पार्क में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया

गाज़ा में उन बच्चों के लिए जिनका इज़रायली सेना द्वारा क़त्ल किया जा रहा है, फ़िलिस्तीनी एकजुटता अभियान द्वारा एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया। घरों, अस्पतालों, स्कूलों और शरणार्थी शिविरों पर प्रतिदिन होने वाली बमबारी में 7,000 से अधिक बच्चे मारे गए हैं।

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कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण, रेडब्रिज स्कूलों के बच्चों द्वारा उन कविताओं को पढ़ना था, जो फ़िलिस्तीन में रहने वाले बच्चों और उनके परिवारों के दैनिक जीवन, और उनके तथा आम लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करती थीं।

इनमें से एक कविता उस पिता के बारे में थी जिसने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए कहा था, कि “एक सफेद कपड़े की पतंग बनाकर उसे आकाश में उड़ाया जाए ताकि उसके बच्चे अपने पिता को स्वर्ग से अलविदा कहते हुए देख सकें”। वह पिता कहता है कि उसे नहीं पता कि वह कब मारा जाएगा और इस दुनिया से जाने से पहले लोगों से अलविदा नहीं कह पाएगा। इस कविता को पढ़ने वाले शिक्षक ने सफेद कपड़े से एक पतंग बनाई थी और उस पर यह कविता लिखी थी। पार्क में पेड़ों के बीच पतंगों की एक डोर लटकी हुई थी।
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एक शिक्षक ने उन सात बच्चों की कहानियां बताईं, जो हाल ही में इज़रायली हमलों में मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ये बच्चे डॉक्टर और शिक्षक बनना चाहते थे और वे स्कूल को याद कर रहे थे क्योंकि उनके स्कूल को इज़रायली मिसाइलों ने बमबारी करके बर्बाद कर दिया था। जब ये कहानियां बताई जा रही थीं, इलफर्ड में रहने वाले बच्चों ने अपने हाथों में ग़ाज़ा के मारे गए बच्चों की तस्वीरें ले रखी थीं।

6 या 7 साल से कम उम्र के एक बच्चे ने, माक्र्स एंड स्पेंसर, मैकडोनाल्ड्स आदि सहित विभिन्न कंपनियों के बारे में जो इज़राइल से जुडी हुई हैं, तथ्यों और आंकड़ों का हवाला देते हुए एक ज़ोरदार भाषण दिया। इन कंपनियों को घाटा हो रहा है क्योंकि आम लोगों ने इन कंपनियों से ख़रीदारी बंद कर दी है। उन्होंने यह भी बताया कि इज़राइल को हथियार सप्लाई करने के कारण, अमरीकी साम्राज्यवाद क़र्ज़ में डूबता जा रहा है। इस युवा-वक्ता के भाषण की खूब सराहना हुई।

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) ने भी इस विरोध-प्रदर्शन में भाग लिया। इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) के एक प्रतिनिधि ने फ़िलिस्तीनी लेखक और सेनानी, गासन कनाफ़ानी की एक कविता पढ़ी, जिनकी हत्या इज़रायली सरकार की खुफ़िया एजेंसी मोसाद ने की थी। कविता का शीर्षक था – ‘काश बच्चे न मरते’ – और इस अंग्रेजी में लिखी गयी कविता और इसका उर्दू अनुवाद भी पढ़ा गया। इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (जी.बी.) के प्रतिनिधि ने फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन के साहस को सलाम किया। उन्होंने अमरीकी साम्राज्यवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अमरीकी साम्राज्यवाद ने फ़िलिस्तीनी भूमि पर इज़रायल को स्थापित करने के बाद से, पिछले 75 वर्षों में फ़िलिस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ इज़रायली सरकार द्वारा किए गए हर एक अपराध से बचाव किया है। उन्होंने ग़ाज़ा और वेस्ट बैंक में जारी क़त्लेआम का समर्थन करने के लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद और अन्य यूरोपीय देशों की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तभी ख़त्म होगा और पूरे मध्य-पूर्व में शांति तभी स्थापित होगी, जब फ़िलिस्तीनी लोगों को सही मायनों में अपनी मातृभूमि वापस मिल जाएगी। उन्होंने अपना भाषण “फ्री फ्री पेलेस्टाईन!” और “शीज़फायर नाव!” के नारों के साथ समाप्त किया।

एक सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षक, बेन मॉरिस ने एक बहुत ही भावुक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि जो बाइडन को यह स्वीकार करने को मजबूर होना पड़ा है कि दुनिया में लोग इज़रायल के साथ-साथ अमरीका के भी ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं। ख़ासकर सभी यूरोपीय देशों के नौजवान, इज़रायली सरकार द्वारा किये जा रहे जुल्मों में अपनी सरकारों की मिली-भगत को साफ़-साफ़ देख रहे हैं। उन्होंने इस समय के एक लोकप्रिय नारे “हम हजारों में, हम लाखों में, हम-सब फ़िलिस्तीनी हैं!” को दोहराते हुए कहा, इज़राइल फ़िलिस्तीनी लोगों को ख़त्म करने में कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा, इज़राइल ग़ाज़ा को लोगों के रहने लायक नहीं बनाने पर तुला हुआ है और उसने खुल्लम-खुल्ला ऐसा करने का अपना इरादा प्रकट किया है, इसलिए हम सबका विरोध जारी रहना चाहिए। यह घोषणा की गई कि अगला राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन 13 जनवरी, 2024 को लंदन में होगा।

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