गाज़ा में युद्धविराम पर संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को अमरीका ने वीटो किया :
मानवता के ख़िलाफ़ घोर अपराध

8 दिसंबर को संयुक्त राज्य अमरीका ने अपनी वीटो शक्ति का उपयोग करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को रोक दिया, जिसमें गाज़ा पर लगातार चल रहे इज़रायली हमले में तत्काल युद्धविराम की मांग की गई थी। अमरीका का निकटतम सहयोगी ब्रिटेन एक ऐसा देश था जिसने वोट से एबस्टेन किया, लेकिन उसे छोड़कर, सुरक्षा परिषद के अन्य सभी 13 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।

UNGA_Hall_voting_Dec-127 अक्तूबर के बाद से, पूरी दुनिया इज़रायल द्वारा गाज़ा के छोटे से क्षेत्र में रहने वाले लगभग 20 लाख फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे जनसंहारक युद्ध को बड़े गुस्से के साथ देख रही है। “आत्मरक्षा” के नाम पर, इज़रायल घरों, अस्पतालों, स्कूलों, शरणार्थी शिविरों और यहां तक कि जनसंहार से अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे असहाय लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सड़कों पर भी अंधाधुंध, दिन-रात बम बरसाता जा रहा है। इज़रायली सैनिकों ने भी इन सभी क्षेत्रों में मार्च किया है और लोगों को अंधाधुंध ढंग से मार डाला है। 18,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी नागरिकों की हत्या कर दी गई है। उनमें से 7,000 से अधिक छोटे बच्चे हैं। हज़ारों लोगों के लापता होने की सूचना है। घायल और विस्थापित व्यक्तियों की संख्या की गिनती नहीं की जा सकती। गाज़ा के लोगों को भोजन, ईंधन, पानी, बिजली और बुनियादी स्वास्थ्य सेवा से वंचित कर दिया गया है। गाज़ा में लोगों को एक संकीर्ण जगह में घेर दिया गया है, जहां इज़रायली सेना उन्हें इधर-उधर धकेलती रहती है।

पूरी आबादी का यह अंधाधुंध क़त्लेआम, जिसका अंत नज़र नहीं आता है, यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून के हर असूल का उल्लंघन करता है। इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसके चलते हर घंटे में सैकड़ों बच्चों और अन्य निर्दाेष लोगों की मौत निश्चित है। इसीलिए इज़रायली हमले को तत्काल बंद करना मानव समाज की आम मांग है।

इस अभूतपूर्व संकट के चलते, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के बहुत ही कम इस्तेमाल किए जाने वाले अनुच्छेद 99 को लागू किया, जो उन्हें किसी ख़ास मामले को सुरक्षा परिषद के ध्यान में लाने की इजाज़त देता है, अगर वह “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा है”। अमरीका ने अन्य सदस्यों की तत्काल युद्धविराम की सर्वसम्मत मांग को रोक दिया, हालांकि ऐसा करने में वह बिल्कुल अकेला था।

पिछले 75 वर्षों में, फ़िलिस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ इज़रायली जाउनवादी राज्य द्वारा किए गए प्रत्येक अपराध के पीछे अमरीकी साम्राज्यवाद का हाथ रहा है। जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतदान चल रहा था, तब भी अमरीका अपने खूनी अभियान को जारी रखने के लिए इज़रायल को और अधिक हथियार और गोला-बारूद भेज रहा था।

जिस निर्मम तरीके़ से अमरीका ने गाज़ा में जनसंहार को समाप्त करने की सभी संभावनाओं को रोक दिया है, उससे अमरीका के ‘मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा करने’ के नारों का पाखंड साफ़ दिखता है। इन नारों के ज़रिये अमरीका दुनियाभर के देशों और सरकारों पर अपने हमलों को उचित ठहराता है। इज़रायल को इस जनसंहारक युद्ध को बिना किसी रोक-टोक के जारी रखने के लिए अमरीका के प्रोत्साहन ने उसे दुनिया के लोगों और सरकारों की नज़रों में अलग-थलग कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले सभी असूलों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता बतौर, अमरीका द्वारा “नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” का आह्वान कुछ और नहीं, बल्कि इस मांग के रूप में स्पष्ट होता है कि दुनिया के अन्य सभी देशों को अमरीकी दादागिरी को स्वीकार करना चाहिए। फ़िलिस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ इज़रायल द्वारा किये जा रहे जनसंहारक युद्ध को अमरीका द्वारा दिया गया समर्थन एक बार फिर दिखाता है कि अमरीकी साम्राज्यवाद विश्व स्तर पर साम्राज्यवादी युद्धों और आतंकवाद का मुख्य प्रायोजक तथा शांति का सबसे बड़ा दुश्मन है।

गाज़ा में तत्काल मानवीय युद्धविराम के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को वीटो करने और जनसंहार को रोकने में नाक़ामयाब होने के लिए, विश्व नेताओं, अंततराष्ट्रीय तौर पर लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों और संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारियों ने संयुक्त राज्य अमरीका की आलोचना की है। फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास ने अमरीकी रवैये को सभी मानवीय असूलों और मूल्यों का घोर उल्लंघन बताया है। संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, चीन, रूस, ओमान, यूनान, तुर्की और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अधिकारियों ने युद्धविराम पर अमरीकी वीटो की कड़ी आलोचना की है।

गाज़ा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के रोके जाने के बाद, मामले को 12 दिसंबर को सभी 193 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में ले जाया गया। वहां, भारी बहुमत से 80 प्रतिशत देशों यानि 154 देशों ने गाज़ा में तत्काल युद्धविराम के पक्ष में मतदान किया। अमरीका और इज़रायल सहित केवल दस सदस्य देशों ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव में “गाज़ा पट्टी में विनाशकारी मानवीय स्थिति और फ़िलिस्तीनी नागरिक आबादी की पीड़ा पर गंभीर चिंता” व्यक्त की गई। हिन्दोस्तान की सरकार, जिसने 27 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसी तरह के एक प्रस्ताव पर एबस्टेन किया था, ने इस बार अपना रुख़ बदल दिया और बहुमत के साथ युद्धविराम के लिए मतदान किया।

संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों द्वारा तत्काल युद्धविराम के लिए दिया गया भारी वोट दुनिया के सभी देशों के अधिकतम लोगों की मांग को दर्शाता है। अमरीका और ब्रिटेन समेत दुनिया के तमाम देशों में लाखों लोग इस मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अमरीका द्वारा अपनाया गया रुख़ पूरी तरह से विश्व जनमत की अवमानना है। यह मानवता के ख़िलाफ़ घोर अपराध है।

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *