बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 31 साल बाद :
हुक्मरान वर्ग की सांप्रदायिक राजनीति के ख़िलाफ़ जुझारू विरोध प्रदर्शन

6 दिसंबर, 2023 को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर संसद के पास एक जुझारू विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।

Babari Masjid Demo-2दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन से कुछ मिनट पहले ही इस विरोध रैली को आयोजित करने की अनुमति वापस ले ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए आधिकारिक तौर पर घोषित स्थल – जंतर-मंतर – पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रदर्शन स्थल तक आने से रोक दिया था। इस स्थिति में संसद मार्ग पर फ्लैश विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

इस प्रदर्शन की शुरुआत सांझे बैनर के साथ की गई। महिलाओं, नौजवानों और अन्य कामकाजी लोगों ने निडरता पूर्वक अपने प्लाकार्ड ऊंचे उठाये हुए थे। सड़क से गुजरते हुए, सैकड़ों कामकाजी लोगों ने खड़े होकर इस विरोध प्रदर्शन को देखा। दिल्ली पुलिस हैरान हो गई। जब तक रैपिड एक्शन फोर्स के सैकड़ों पुलिसकर्मी और महिला पुलिसकर्मी विरोध स्थल पर पहुंचते, तब तक एक सफल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जा चुका था।

प्रदर्शनकारियों ने विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमले की खुलकर निंदा की। विरोध प्रदर्शन की अनुमति रद्द करने के पीछे अधिकारियों ने जो प्रत्यक्ष कारण बताया, वह यह था कि विरोध प्रदर्शन से सांप्रदायिक सद्भाव को ख़तरा होगा। यह सच्चाई के बिल्कुल विपरीत है। यह हुक्मरान वर्ग और उसकी मुख्य राजनीतिक पार्टियां हैं जो लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के लिए ज़िम्मेदार हैं।

Babari Masjid Demo-2सच्चाई को प्रकट करना और सांप्रदायिक राजनीति के ख़िलाफ़ एकता बनाना बहुत ही महत्वपूर्ण है इसलिए हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हर साल 6 दिसंबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में भाग लेती आई है।

विरोध प्रदर्शन के मुख्य बैनर पर लिखा था – “फ़िरक़ापरस्ती की राजनीति का विरोध करें!” और ”एकता और अमन-चैन के लिए संघर्ष करें!”

प्रदर्शनकारियों ने जोशपूर्ण नारे लगाए – “बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दो!”, ”राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा के ख़िलाफ़ एकजुट हों!”, “लोगों को बांटने की राजनीति के ख़िलाफ़ एकजुट हों!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!”, “राजकीय आतंकवाद के खि़लाफ़ एकजुट हों!”, “यू.ए.पी.ए. रद्द करो!”, “अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डालना और यातना देना बंद करो!”, आदि।

Babari Masjid Demo-2प्रदर्शनकारियों ने 1992 में मस्जिद के विध्वंस के लिए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार दोनों को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर लोगों को विभाजित करने तथा सांप्रदायिक हिंसा और जनसंहार आयोजित करने के लिए हुक्मरान वर्ग और उसकी राजनीतिक पार्टियों की निंदा की। उन्होंने सांप्रदायिक राजनीति को हराने के लिए लोगों की एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अलावा, विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले अन्य संगठनों में शामिल थे – लोक राज संगठन, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, लोक पक्ष, जमात-ए-इस्लामी हिंद, यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट, वूमेन इंडिया मूवमेंट, फ्रेटरनिटी मूवमेंट ऑफ इंडिया, पुरोगामी महिला संगठन, किसान मज़दूर महासभा, सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी, स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया, सेवा और मज़दूर एकता कमेटी।

हिन्दोस्तान के लोग राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और हर प्रकार के राजकीय आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए संघर्ष में प्रतिबद्ध हैं। इस लक्ष्य के लिए वे एकजुट होकर संघर्ष करते रहेंगे। बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 31वीं बरसी के अवसर पर आयोजित विरोध रैली में यही संदेश गूंज रहा था।

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