पत्रकारों और मीडिया पर हमले के विरोध में प्रदर्शन

पत्रकारों, शिक्षकों, छात्रों, वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर पत्रकारों और समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक पर हमले की निंदा की है।

4 अक्टूबर को, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के सैकड़ों छात्रों, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, महिला संगठनों के कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों ने जंतर-मंतर पर एक ज़ोरदार विरोध रैली का आयोजन किया। प्रतिभागियों ने पत्रकारों पर हमलों के लिए केंद्र सरकार की निंदा की और जिन पत्रकारों पर हमला हुआ, उनके साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।

उसी दिन दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों और मीडिया पर हो रहे हमलों की निंदा करने के लिए एक बैठक हुई। इस बैठक में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के 18 संगठनों की ओर से मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को लिखा गया एक पत्र पढ़ा गया और अनुमोदित किया गया। पत्र में इन मीडिया संगठनों ने मुख्य न्यायाधीश से मीडिया और पत्रकारों पर हो रहे हमलों से तत्काल निपटने का अनुरोध किया है।

पत्र में, इन संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि कुछ ऐसे मानदंड बनाये जायें ताकि पुलिस पत्रकारों के फोन और लैपटॉप को मनमर्जी से ज़ब्त न कर सकें, जैसा कि इस समय किया जा रहा है। उन्होंने अदालत से दिशानिर्देश बनाने को कहा है, कि पत्रकारों से पूछताछ और उनसे बरामदगी करने के क्या क़ायदे होने चाहियें। इसके अलावा, पत्र में अनुरोध किया गया है कि पत्रकारों के पत्रकारीय कार्यों के लिए, उनके खि़लाफ़ अस्पष्ट और बे-सबूत जांच के ज़रिये अदालतों को गुमराह करने वाले राज्य के एजेंसियों और व्यक्तिगत अधिकारियों की जवाबदेही स्थापित की जाए।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में डिजीपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन; इंडियन विमेंस प्रेस कोर; प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली; फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स; नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया; चंडीगढ़ प्रेस क्लब; नेशनल अलायंस ऑफ जर्नलिस्ट्स; दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स; केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स; बृहन्मुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स; फ्री स्पीच कलेक्टिव-मुंबई; मुंबई प्रेस क्लब; अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स; प्रेस एसोसिएशन; गौहाटी प्रेस क्लब; इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन; कोलकाता प्रेस क्लब; और वर्किंग न्यूज कैमरामेन एसोसिएशन (डब्ल्यू.एन.सी.ए.) शामिल हैं।

पत्रकारों पर हमले की निंदा देश के कई अन्य भागों में तथा विदेशों में भी की गयी है।

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