शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर राजस्थान में कार्यक्रम

हनुमानगढ़ में विचार गोष्ठी

Ramgadh_shaheed_bhagat_singh_birthday27 सितम्बर, 2023 को राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की उप-तहसील रामगढ़ में भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी हुई। इसके बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय था – वर्तमान में भगतसिंह के विचारों की प्रासंगिकता। भगत सिंह मेमोरियल शिक्षण समिति की अगुवाई में इस कार्यक्रम को आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम का आरंभ में बहुत ही जोश के साथ नारे लगाए गए – ‘इंक़लाब जिंदाबाद!’, ‘समाजवाद ज़िंदाबाद!’, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!

इस कार्यक्रम में गांव के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में नौजवान, बच्चे और महिलाएं उपस्थित थीं।

Ramgadh_shaheed_bhagat_singh_birthdayनौजवानों और बच्चों ने क्रांतिकारी गीतों पर नृत्य पेश किये। उन्होंने छोटे-छोटे वक्तव्यों और नाटकों के ज़रिये भगत सिंह के विचारों को पेश किया और उपस्थित लोगों से भगत सिंह के रास्ते पर चलने का आह्वान किया।

विचार गोष्ठी को संबोधित करने वालों में थे – हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से कामरेड बिरजू नायक, मज़दूर एकता कमेटी से संतोष कुमार, राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) से राममूर्ति स्वामी, अशोक वर्मा, भूप साहू, ओम सांगर, मणिराम लकेशर, अजय बाल्मिकी, दिनेश, राजगुरू, इत्यादि।

Ramgadh_shaheed_bhagat_singh_birthdayहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की और से कामरेड बिरजू नायक ने शहीद भगत सिंह की दूरदर्शी बातों को याद दिलाया। भगत सिंह ने कहा था कि “हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मुट्ठीभर लोग अपने हित के लिए मेहनतकशों का शोषण करते रहेंगे। शोषणकर्ता चाहे हिन्दोस्तानी हो या अंग्रेज़ या दोनों का गठबंधन, कोई हमें इस रास्ते पर चलने से नहीं रोक सकता”। अंग्रेजों ने 1947 में राज्य सत्ता हिन्दोस्तान के पूंजीपतियों को सौंपी थी। पूंजीवादी हुक्मरानों ने अपने राज्य में अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गयी शासन व्यवस्था व दमन के तंत्रों को बरकरार रखा तथा उन्हें और कुशल बनाया। इस राज्य तंत्र के सहारे मज़दूरों और किसानों का शोषण करके तथा कुदरती संसाधनों को लूटकर, अब वे विश्व स्तरीय इजारेदार पूंजीपति बन गए हैं। वे ही हिन्दोस्तान के असली हुक्मरान हैं। इस हुकूमत की जगह पर मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करके ही इस देश के तमाम मेहनतकशों का भविष्य खुशहाल हो सकता है। इसके लिए मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों को लामबंध करना ही शहीद भगत सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कई अन्य वक्ताओं ने कहा कि हुक्मरानों ने भगत सिंह के नाम का इस्तेमाल मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों को गुमराह करने के लिए किया है। उन्होंने भगत सिंह को मूर्ति के रूप में स्थापित करके उनके क्रांतिकारी विचारों की धार को कुंद करने का काम किया है। हमें नौजवानों और बच्चों को भगत सिंह के विचारों से लैस करना होगा। तभी हम पूंजीवाद को हरा सकते हैं और मज़दूरों-किसानों का राज स्थापित कर सकते हैं।

विचार गोष्ठी का समापन लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा के वक्तव्य से हुआ। उन्होंने कहा कि हमें लोगों को यह समझाना होगा कि हिन्दोस्तान पर पूंजीपति वर्ग राज करता है। भगत सिंह जिन काले अंग्रेजों का जिक्र करते हैं, वे ही हमारे हुक्मरान हैं। इस बात को सभी लोगों को समझाना हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में करीब 150 इजारेदार पूंजीवादी घराने हुक्मरान पूंजीपति वर्ग की अगुवाई करते हैं। वे देश की अर्थव्यवस्था की दिशा को निर्धारित करते हैं। वे देश की नीति को निर्धारित करते हैं। राज्य के सभी संस्थान उन्हीं के हितों की सेवा में काम करते हैं। यह राज्य मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी है। पूंजीवाद बेरोज़गारी का जनक है। जब तक पूंजीवाद रहेगा तब तक सबको रोज़गार नहीं मिल सकता है। हमें लोगों को देश की बागडोर खुद अपने हाथों में लेने के लिए जागृत करना होगा ।

भादरा में इंक़लाब रैली

27 सितंबर, 2023 को राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की तहसील भादरा की अनाज मंडी में इंक़लाब रैली हुई। यह रैली शहीद भगत सिंह के 116वें जन्म दिवस के अवसर पर की गई थी। इस इंक़लाब रैली में भादरा और इसके आस-पास के गांवों से मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों ने हजारों की संख्या में हिस्सा लिया।

इसके बाद अनाज मंडी से लेकर शहीद भगत सिंह चौक तक जुलूस निकाला गया। जूलूस में महिलाओं की भागीदारी हजारों में थी। भादरा के विधायक कामरेड बलवान पुनिया ने शहीद भगत सिंह की मूर्ति का अनावरण किया।

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