पंजाब और हरियाणा के किसान अपने दावे पर दृढ़ता से डटे हैं

पंजाब और हरियाणा के किसान अपने दावों पर ज़ोर देने के लिए विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं।

Farmers_protest_railway_tracks_sideपंजाब के उन्नीस किसान संगठनों ने 28 सितंबर से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय रेल रोको विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। वे हाल की बाढ़ से हुए नुक़सान के लिए मुआवज़े, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) की क़ानूनी गारंटी और क़र्ज़ माफ़ी की मांग कर रहे हैं।

एक महीने पहले ही इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान कर दिया गया था। आंदोलनकारी किसानों ने 2021 की लखीमपुर खीरी घटना, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी, उसके मुख्य आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करने की मांग की। किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के सरवन सिंह पंधेर ने कहा, ”अगर पंजाब के किसानों के साथ किसी ने अन्याय करने की कोशिश की तो हरियाणा के किसान भी पंजाब के किसानों के साथ खड़े हो जाएंगे। पूरे देश में किसान एकजुट हैं।”

Farmers_protest_railway_tracks_side30 सितंबर को हरियाणा के किसान संगठनों ने पंजाब के किसानों के समर्थन में भारतीय रेल के अंबाला-राजपुरा खंड पर 4 घंटे का रेल रोको अभियान आयोजित किया।

किसान शंभू टोल प्लाजा के पास एकत्र हुए और फिर घेल गांव से होते हुए रेलवे ट्रैक की ओर बढ़ गए। पटियाला की महिला कृषि कार्यकर्तायें भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।

Farmers_protest_railway_tracks_sideबी.के.यू. (शहीद भगत सिंह) के नेता तेजवीर सिंह ने कहा, ”पंजाब में किसानों के समर्थन में किसानों ने क़रीब 4 घंटे तक रेलवे ट्रैक जाम रखा। कृषि आंदोलन का दूसरा चरण शुरू हो गया है और मांगें पूरी नहीं होने पर सरकार को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। आक्रोश की भावना पैदा हो रही है और किसान यूनियनें जल्द ही दिल्ली की ओर बढ़ेंगी।

किसान यूनियनों द्वारा तीन दिवसीय ”रेल रोको“ विरोध प्रदर्शन 30 सितंबर की शाम को अमृतसर जिले के देवीदासपुरा गांव में रेलवे पटरियों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा किये गये विरोध प्रदर्शन के साथ संपन्न हुआ।

Farmers_protest_railway_tracks_sideकिसान यूनियनों ने घोषणा की है कि हम विरोध प्रदर्शन के अगले चरण के तहत 23-24 अक्तूबर को किसान दशहरा का आयोजन करेंगे। इन दोनों दिन सरकारी नीतियों के प्रति अपना असंतोष व्यक्त करने के लिए केंद्र सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले जलाए जाएंगे।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “कॉर्पोरेट समर्थक सरकारें किसानों को भीख का कटोरा थमाने की कोशिश कर रही हैं। हमने सरकार को यह दिखाने के लिए इन कटोरों को तोड़ दिया कि हम भिखारी नहीं बनेंगे और अपने अधिकारों को पाने के लिए लड़ेंगे।“ किसानों की एम.एस.पी. के लिए क़ानूनी गारंटी की मांग लंबे समय से लंबित थी क्योंकि अधिकांश फ़सलों की क़ीमतें निजी ख़रीदारों द्वारा तय की जाती थीं। उन्होंने कहा कि “सरकार दो दर्जन से अधिक फ़सलों के लिए एम.एस.पी. की घोषणा करती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से राज्य में यह केवल दो फ़सलों – चावल और गेहूं – पर ही उपलब्ध है। यदि एम.एस.पी. के लिए क़ानूनी गारंटी है, तो हम उन सभी फ़सलों पर एम.एस.पी. प्राप्त करने में सक्षम होंगे जिन पर इसकी घोषणा की गई है”।

इस बीच, हरियाणा के किसानों ने बाढ़, कम बारिश और कीटों के हमले के कारण फ़सल को हुए नुक़सान के मुआवज़े की मांग करते हुए हिसार से चंडीगढ़ तक पदयात्रा की।

Farmers_protest_railway_tracks_sideएक किसान कार्यकर्ता ने कहा, “हिसार में चार महीने तक धरना देने के बाद हमें आंशिक सफलता मिली। अब, हम किसानों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए चंडीगढ़ जा रहे हैं। किसानों की मांगें पूरी होने तक हम चंडीगढ़ में ”पक्का मोर्चा“ शुरू करेंगे। किसान पगड़ी संभाल जट्टा (पी.एस.जे.) के बैनर तले लड़ रहे हैं।

किसानों ने कहा कि बीमा कंपनी 2021 और 2022 के लिए 700 करोड़ रुपये के दावे की भरपाई करने से इंकार कर रही थी। 26 मई को पी.एस.जे. द्वारा हिसार में धरना शुरू करने के बाद, सरकार ने हस्तक्षेप किया और बीमा कंपनी को लगभग 400 करोड़ रुपये के दावों के मुआवज़े जारी करने पड़े। 67 गांवों के किसानों के दावे अब भी लंबित हैं।

करनाल जिले में धान की ख़रीद की धीमी गति के विरोध में किसानों ने तरावड़ी और निगधू की अनाज मंडियों में ताला लगा दिया।

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