नौसेना के ठेका मज़दूरों की समस्यायें

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

नौसेना के दक्षिणी कमान के तहत भारतीय नौसेना की केरल के कोच्ची और कन्नूर में स्थित दो छावनियों में देश के अलग-अलग इलाकों से विभिन्न ठेकेदारों के ज़रिये हजारों ठेका मज़दूर काम कर रहे हैं। जिन्हें दोनों नौसैनिक छावनियों में हाउसकीपिंग, सफाई व अन्य सेवाएं देने के लिए भर्ती किया जाता है। उनमें से कई तो बीस साल तक काम करने के बाद भी ठेका मज़दूर ही बने हुये हैं!

दक्षिणी नौसेना कमान कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 10 सितंबर को आयोजित अपने राज्य स्तरीय सम्मेलन में इन मज़दूरों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी समस्याओं को श्रम उपायुक्त (केंद्रीय) के समक्ष बार-बार उठाया है।

इन ठेका मज़दूरों को क़ानूनी तौर पर मिलने वाले न्यूनतम वेतन से वंचित किया जाता है। उनके पास न तो नौकरी की सुरक्षा है और न ही सामाजिक सुरक्षा के कोई उपाय हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, वे 617 रुपये प्रति दिन की मज़दूरी के पात्र हैं, जिसे हर छह महीने में संशोधित किया जाना चाहिए। हालांकि, कई ठेकेदार कंपनियों द्वारा नियुक्त मज़दूरों ने शिकायत की है कि उन्हें सरकार द्वारा घोषित वेतन नहीं दिया जा रहा है।

न ही ठेकेदारों द्वारा मज़दूरों के वेतन से काटी गई भविष्य निधि (पी.एफ.) को मज़दूरों के खातों में जमा किया जा रहा है। मज़दूरों के मुताबिक ठेकेदार मज़दूरों के वेतन से 12 फ़ीसदी राशि रुपये काट लेते हैं। ठेकेदार उनके पी.एफ. खातों में 13 फ़ीसदी का योगदान करने के बजाय मज़दूरों के खातों में किसी भी राशि का भुगतान करते ही नहीं हैं। इससे मज़दूरों की मासिक आय में 25 प्रतिशत का नुक़सान हो जाता है।

मज़दूर विशेष रूप से इस तथ्य से परेशान हैं कि उनके प्रमुख नियोक्ता, यानी कि भारतीय नौसेना ने मज़दूरों की चिंताओं को दूर करने और आधिकारिक तौर पर निर्धारित शर्तों को पूरा न करने के लिए ठेकेदारों को दंडित करने से लगातार इनकार किया है। अधिकांश ठेकेदारों की कंपनियों के पास पंजीकृत स्थानीय कार्यालय नहीं हैं और वे केंद्रीय श्रम आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में, ठेकेदारों और मज़दूरों को एक-दूसरे से मिलने का मौका तक नहीं मिलता है। मज़दूर अपनी समस्या ठेकेदार के सामने नहीं रख पा रहे हैं। ठेकेदार मज़दूरों को उचित मुआवज़ा दिए बिना ही अनुबंध को समाप्त कर देते हैं। मज़दूरों के विवादों और दावों के निपटारे के लिए यूनियन को ठेकेदार, प्रमुख नियोक्ता (यानी भारतीय नौसेना) और क्षेत्रीय श्रम आयुक्त से संपर्क करने के लिये कठिन प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। ठेकेदार और प्रमुख नियोक्ता समझौते के लिए बार-बार उपस्थित नहीं होते हैं, जिससे मज़दूरों की बकाया राशि मिलने में बाधा आती है।

आंदोलित मज़दूरों ने भारतीय नौसेना से अनुरोध किया है कि यदि ठेकेदार समय पर मज़दूरी का भुगतान नहीं करता है, तो अनुबंध श्रम विनियमन और उन्मूलन अधिनियम, धारा 21 (4) के अनुसार, भारतीय नौसेना मज़दूरों का भुगतान करे। उन्होंने गुजारा भत्ता, बोनस अधिनियम लागू करने की अपनी मांग को लेकर संघर्ष तेज़ करने का संकल्प लिया है और वे नौसेना से आग्रह कर रहे हैं कि वह ठेकेदार कंपनियों पर मुकदमा चलाये।

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *