मज़दूरों, किसानों और महिलाओं ने मणिपुर में शांति बहाल करने की मांग बुलंद की

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट 

25 जुलाई, 2023 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मणिपुर के पीड़ित लोगों के समर्थन में तथा वहां शांति बहाल करने की मांग को उठाते हुए, एक धरना आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली की ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की अगुवाई में आयोजित किया गया।

20230725_Joint meeting on Manipur violenceआल इंडिया किसान संगठन (ए.आई.के.एस.) तथा आल इंडिया एग्रिकल्चरल वर्कर्स यूनियन (ए.आई.ए.डब्ल्यू.यू.) से जुड़े किसानों सहित पुरोगामी महिला संगठन की महिला कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में प्लेकार्ड व बैनर थे, जिन पर नारे लिखे हुए थे: “मणिपुर सहित सभी पूर्वोत्तर राज्यों से आफ्स्पा को हटाओ!”, “मणिपुर में राजकीय आतंक व हिंसा मुर्दाबाद!”, “हुक्मरान पूंजीपति वर्ग की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति मुर्दाबाद!”, “महिलाओं पर हिंसा फैलाने वाले गुनहगारों को सज़ा दो!”, इत्यादि। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राज्य की एजेंसियों को दोषी ठहराते हुए, ज़ोरदार नारे दिए गए।

सहभागी यूनियनों – एटक, सीटू, मज़दूर एकता कमेटी, एच.एम.एस, ए.आई.यू.टी.यू.सी., सेवा, एल.पी.एफ., यू.टी.यू.सी., आई.सी.टी.यू., पुरोगामी महिला संगठन, ए.आई.ए.डब्ल्यू.यू. – के प्रतिनिधियों ने धरने को संबोधित किया।

धरने को संबोधित करते हुए, वक्ताओं ने केन्द्र सरकार और मणिपुर सरकार को मणिपुर की मौजूदा दर्दनाक स्थिति के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और उनकी कड़ी निंदा की।

वक्ताओं ने सरकार द्वारा उन अनेक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आवाज़ों को दबाने के प्रयासों की निंदा की, जिन्होंने मणिपुर की वर्तमान स्थिति में सरकार और राज्य प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाये हैं।

मणिपुर के लोगों की भयानक हालतों का विवरण करते हुए, वक्ताओं ने बताया कि मणिपुर में 3 मई, 2023 से अराजकता और हिंसा फैल रही है। इसके चलते 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। लोगों के घर और आजीविका के साधन नष्ट हो गए हैं। राजधानी इंफाल सहित विभिन्न शहरों में और ग्रामीण क्षेत्रों में हथियारबंद गिरोहों ने लोगों, उनके घरों और संपत्तियों को निशाना बनाया है। महिलाओं के खि़लाफ़ जघन्य अपराधों को अंजाम दिया गया है। इन सभी अपराधों को फ़ौजी शासन की निगरानी में अंजाम दिया गया है। हजारों की संख्या में लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। परिणामस्वरूप पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ म्यांमार में शरणार्थी शिविरों में एक लाख से अधिक लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।

वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे, राज्य व उसकी एजेंसियों द्वारा लोगों को बांटने और क़त्लेआम आयोजित करने की घिनावनी हरकतें साफ़-साफ़ नज़र आ रही हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मणिपुर में फ़ौरन हिंसा रोकने और शांति बहाल करने के लिए केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार ठोस क़दम उठाएं और पीड़ित लोगों को फ़ौरन राहत पहुंचाएं तथा उनके पुनर्वास का इंतज़ाम करें। स्कूलों को फिर से खोलने और इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने की मांग की गई।

कार्यक्रम के अंत में इन मांगों के साथ गृहमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया।

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